जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का इतिहास, महत्व और जाने का सही समय Jagannath Rath Yatra 2025

ओडिशा के पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा की शुरुआत हो रही है। यह भव्य यात्रा पुरी के जगन्नाथ मंदिर से शुरू होकर गुंडिचा मंदिर तक जाती है। जगन्नाथ रथ यात्रा में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा है। 12 दिन चलने वाली रथ यात्रा को लेकर भक्त उत्साहित हैं। पुरी में भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा शुरू हो गई है। सबसे पहले भगवान बलभद्र का रथ भक्तों ने खींचा। कुछ दूर खींचने के बाद अभी रथ रुक गया है। बलभद्र के बाद देवी सुभद्रा और फिर भगवान जगन्नाथ का रथ खींचा जाएगा। लाखों की संख्या में लोग इसका हिस्सा बनते हैं.  यात्रा में भगवान कृष्ण, उनके भाई बलराम और बहन सुभद्रा के लिए रथ यात्रा पर निकली जाती है. चार धाम में से एक भगवान जगन्नाथ धाम की इस रथ यात्रा में शामिल होने की सोच रहे हैं

जगन्नाथ पुरी रथ यात्रा का इतिहास, महत्व और सही समय

Jagannath Rath Yatra 2025

हिंदू धर्म में जगन्नाथ रथ यात्रा का खास धार्मिक महत्व है. हर साल आषाढ़ शुक्ल द्वितीया तिथि के दिन ओडिशा के पुरी में यह भव्य रथ यात्रा निकाली जाती है. इस साल भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा 27 जून दिन शुक्रवार से आरंभ हो रही है. इस यात्रा में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और सुभद्रा रथों पर सवार होकर नगर के भ्रमण पर निकलते हैं. इस पावन मौके पर लाखों श्रद्धालु पुरी आते हैं और रथों को खींचने का सौभाग्य प्राप्त करते हैं. मान्यता है कि इस यात्रा में शामिल होने और रथ को खींचने से जीवन के सभी पाप नष्ट हो जाते हैं.

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हर वर्ष क्यों निकलती है रथ यात्रा ?
स्थानीय सांसद संबित पात्रा कहते हैं कि इस यात्रा में एक लोकतंत्र का भाव छिपा है. उनका कहना है, “ आप सूक्ष्म भाव से देखें तो यह लोकतंत्र की जननी है. ओडिशा के राजाधिराज खुद महाप्रभु जगन्नाथ हैं. वो रत्न सिंहासन को छोड़कर रथ पर बैठते हैं और जनता के बीच आते हैं. गजपति महाराज स्वयं झाड़ू लेकर रथ के आगे का मार्ग साफ करते हैं. यह संदेश देता है कि परमेश्वर के सामने सभी समान हैं.” संबित पात्रा का कहना है कि कोई जाति, राजा या बड़ा नहीं होता. यही इस यात्रा के जरिए जगन्नाथ महाप्रभु का संदेश होता है कि वो जनता के सुख-दुख में लेने खुद उनके बीच आ रहे हैं

रथ यात्रा की शुरुआत और समय
इस बार आषाढ़ शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि 27 जून को है. इसी दिन रथ यात्रा की शुरुआत होगी. पंचांग के अनुसार, 27 जून को सुबह 5:25 बजे से 7:22 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग है. इसके बाद पुष्य नक्षत्र. आज का शुभ समय दोपहर 11:56 से 12:52 तक है, जिसे अभिजीत मुहूर्त कहा जाता है. इसी समय भगवान की यात्रा शुरू होती है

रथ यात्रा का धार्मिक महत्व
यह दिन खास इसलिए भी होता है क्योंकि आमतौर पर भगवान जगन्नाथ गर्भगृह में विराजमान रहते हैं और केवल इसी दिन वे मंदिर से बाहर निकलकर आम भक्तों को दर्शन देते हैं। भक्तजन भगवान के रथ को खींचते हैं, जिसे अत्यंत पुण्यकारी कार्य माना जाता है। मान्यता है कि रथ खींचने से व्यक्ति के सभी पाप मिट जाते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है। यह रथ यात्रा ईश्वर की कृपा और सेवा भावना का प्रतीक बन जाती है।

रथ यात्रा इन मार्गों से होगी

रथयात्रा जीवाजी क्लब से शुरू होकर सनातन धर्म मंदिर मार्ग, जयेंद्रगंज चौराहा, दाल बाजार, नया बाजार, लोहिया बाजार, ऊंट पुल, पाटनकर बाजार, दौलतगंज, महाराज बाड़ा, सराफा बाजार, गश्त का ताजिया, नई सड़क, हनुमान चौराहा और अंत में लक्ष्मीगंज स्थित गोयल वाटिका में विसर्जित होगी।

रथ को खींचने के लिए दोनों तरफ 100-100 फीट लंबी रस्सियां लगाई गई हैं, जिससे श्रद्धालु भगवान के रथ को अपने हाथों से खींचकर पुण्य लाभ कमा सकें। मान्यता है कि भगवान जगन्नाथ का रथ खींचने से सारे पाप नष्ट हो जाते हैं और जीवन में सुख-शांति आती है।

श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था

रथयात्रा के विसर्जन स्थल पर 30 हजार से अधिक श्रद्धालुओं के लिए प्रसाद की व्यवस्था की गई है। जगह-जगह पुष्प वर्षा, भजन-कीर्तन और श्रृंगारित स्वागत द्वार रथयात्रा को अत्यंत भव्य और दिव्य बनाएंगे।

मदन बाथम और धर्मेंद्र तोमर बिट्टू जैसे श्रद्धालुओं का कहना है कि “जो लोग पुरी नहीं जा पाते, वे यहीं भगवान जगन्नाथ के दर्शन कर भाव-विभोर हो जाते हैं।”

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पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पहांडी अनुष्ठान शुरू

पुरी के जगन्नाथ मंदिर में पहांडी अनुष्ठान शुरू हुआ। इसमें भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को रथ यात्रा के लिए 12वीं सदी के मंदिर से उनके संबंधित रथों तक जुलूस के रूप में ले जाया गया। अनुष्ठान एक घंटे देरी से शुरू हुआ और तीन घंटे तक चलेगा। पहांडी में त्रिदेवों भगवान बलभद्र, देवी सुभद्रा और भगवान जगन्नाथ को जुलूस के रूप में सिंह द्वार के सामने खड़े उनके रथों तक ले जाया जाता है। जहां से उन्हें श्री गुंडिचा मंदिर ले जाया जाता है।  घंटियां, शंख और झांझ बजाते हुए चक्रराज सुदर्शन को सबसे पहले मुख्य मंदिर से बाहर लाया गया और देवी सुभद्रा के ‘दर्पदलन’ रथ पर बैठाया गया। पंडित सूर्यनारायण रथशर्मा ने बताया कि सुदर्शन भगवान विष्णु का चक्र अस्त्र है, जिनकी पूजा पुरी में भगवान जगन्नाथ के रूप में की जाती है। सुदर्शन के पीछे भगवान जगन्नाथ के बड़े भाई भगवान बलभद्र थे। भगवान बलभद्र अपने तालध्वज रथ पर विराजमान हैं। जब भगवान जगन्नाथ मंदिर से बाहर आए, तो ग्रैंड रोड पर भावनाओं का सैलाब उमड़ पड़ा, क्योंकि भक्तों ने हाथ उठाकर ‘जय जगन्नाथ’ का नारा लगाया।

 Ask questions :

1. जगन्नाथ पुरी जाने के लिए कौन से स्टेशन पर उतरना पड़ता है ?
मंदिर के सबसे नज़दीकी हवाई अड्डा बीजू पटनायक अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा है, जो लगभग 60 किलोमीटर दूर है। मंदिर के सबसे नज़दीकी रेलवे स्टेशन पुरी रेलवे स्टेशन है जो 3 किलोमीटर की दूरी पर है।

2. जगन्नाथ पुरी घूमने में कितने दिन लगते हैं ?
संपूर्ण पुरी क्षेत्र घुमने के लिए कम से कम 3 रातें और 4 दिन चाहि

3. जगन्नाथ पुरी का क्या प्रसाद है ?
दरअसल, जगन्नाथ मंदिर में चावल का भोग लगाया जाता है और इसे भी हर भक्त ग्रहण करता है। लेकिन दूर-दराज रह रहे भक्त इस भोग को नहीं ले जा सकते हैं। इसलिए उनके लिए निर्माल्य बनाया जाता है।

 4. जगन्नाथ पुरी का टिकट कितने का है ?
18410 श्री जगन्नाथ एक्स्प्रेस किराया
वयस्क 1,885 790
बच्चा 1,165 380
वयस्क तत्काल – 1,105
बाल तत्काल – 69

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