कोरबा का प्रसिद्ध दर्शनीय मां मड़वारानी मन्दिर 2023

 माता का मंदिर इतना खास क्यों है

कोरबा में मां मड़वारानी का प्रसिद्ध मंदिर है. मान्यता है कि मां मड़वारानी अपनी शादी के मंडप (मड़वा) को छोड़कर आ गई थीं और पेड़ के नीचे विराजमान हो गईं. इस मंदिर में मां कुंवारी स्वरूप में विद्यमान हैं देश भर में कई धार्मिक स्थल हैं, जहां से अनेकों मान्यताएं निकल कर सामने आती हैं. ठीक इसी प्रकार छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भी देवी मां का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है.

 छोटे से ब्लॉक में आपको मड़वारानी मंदिर के बारे में  बताऊंगी जहां पर आप फैमिली और दोस्तों के साथ जा सकते हैं यहां पिकनिक के लिए बहुत सुन्दर पर्यटन स्थल है जहां आप आपने पूरे परिवार के साथ जा कर आनंद का  अनुभव कर सकते हैं 

जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर मड़वारानी मंदिर कोरबा से चांपा रोड पर स्थित है पहाड़ी की चोटी पर माता मड़वारानी का मंदिर है नवरात्रि के दिनों में इस मंदिर के भीड़ उमड जाती है प्रत्येक वर्ष के नवरात्री सीजन के दौरान  यहां मेला लगता हैं

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परिचय –  मां मड़वारानी मंदिर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित है यहां के स्थानीय निवासियों के श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक है और एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है मंडप को स्थानीय भाषा में “मड़वा” कहा जाता है मां मड़वारानी के मंडप से आने के कारण गांव और पर्वत को मड़वारानी के नाम से जाना जाता है स्थान जिला मुख्यालय कोरबा से 18 किलोमीटर एवं जांजगीर जिले से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

मड़वारानी रेलवे स्टेशन के लिए लोकल ट्रेन की सुविधा है इसके अलावा कोरबा एवं चांपा से मड़वारानी के लिए बस की सुविधा भी उपलब्ध हैं

माँ मड़वारानी मंदिर की स्थापना कैसे हुई ( कथा ) :

यहा रहने वाले लोगो कहते है के जब मॉं मड़वारानी की शादी उनके पिता जी द्वारा तय कर दी गई थी तब वे यह शादी नहीं करना चाहती थी और उन्होंने अपने शादी के मंडप को छोड़कर “भाग गई मंडप” जिसे छत्‍तीसगढ़ में मड़वा भी कहते हैं, बरपाली मड़वारानी के रास्‍ते इस गाँव में पहूंची जहां उनके शरीर पर शादी के लिए लगी हल्‍दी एक पत्‍थर पर पड गयी जिससे वह पत्‍थर पीला हो गया जिसका साक्ष्‍य आज भी इस गावं में द‍ेखा जा सकता हैं, मॉं मड़वारानी ने पहाड़ पर ही शरण ले ली और वहीं से उन्‍हे मॉं मड़वारानी कहा जाने लगा जिसके बाद भक्‍त श्रद्धालुओं की वे मॉं मडवारानी बन गई और लोगों पर उनकी कृपा हमेशा बनी रहीं |

मान्यता: – मां मड़वारानी मंदिर पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित हैं पहले कहानी मड़वारानी मां जब अपने शादी के मंडप को छोड़कर आए तो बरपाली से मडवारानी  के रास्ते पर उनके शरीर से टकरा कर हल्दी एक बड़े पत्थर पर लग गई और वहां पत्थर पीला हो गया दूसरी प्रसिद्ध कहानियां हैं कि मां मड़वारानी भगवान शिव से कनकी में मिली एवं मड़वारानी पर्वत पर आए मां मड़वारानी संस्कृत में “मडवी देवी”के नाम से भी जानी जाती

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मडवारानी मंदिर कैसे पहुंचे :

सड़क मार्ग – मडवारानी मंदिर तक पहुंचने के लिए पक्की सड़क आपको आसानी से मिल जायेगी जिससे आप अपने वाहनों के माध्यम से पहुंच सकते हैं। यह कोरबा जिले से लगभग 40 किलोमीटर व जांजगीर चाम्पा जिले के चाम्पा से लगभग 20 किलोमीटर व राजधानी रायपुर से लगभग 170 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है |
रेल मार्ग – मडवारानी मंदिर से सबसे निकतम रेलवे स्टेशन है, मडवारानी रेलवे स्टेशन जिसकी दुरी लगभग 2 किलोमीटर है
हवाई मार्ग – मडवारानी मंदिर से सबसे निकटतम हवाई अड्डा है, रायपुर हवाई अड्डा है जिसकी दूरी लगभग 310 किलोमीटर है
   

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