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पूरे भारत में जन्माष्टमी के त्यौहार को काफी धूमधाम से मनाया जाता है. मथुरा जिले का एक छोटा सा शहर, वृंदावन भगवान कृष्ण की बचपन की शरारतों और रासलीला का स्थल माना जाता है इसी दिन भगवान श्री कृष्ण का जन्म हुआ था. आपकी जानकारी के लिए बता दें इस साल जन्माष्टमी का त्यौहार 26 अगस्त, सोमवार को मनाया जाने वाला है. सोमवार को जन्माष्टमी होने की वजह से शनिवार और रविवार के दिन कई जागहों पर छुट्टी रहने वाली है. छुट्टी के इस मौके पर अगर आप कहीं घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं
1.गोकुल
गोकुल वह स्थान है जहाँ कृष्ण को मथुरा में जन्म लेने के तुरंत बाद ले जाया गया था। कृष्ण अपने दत्तक माता-पिता यशोदा और नंद के निर्देशन में गोकुल में पले-बढ़े, जिससे यह कृष्ण के बचपन से जुड़ी सबसे महत्वपूर्ण जगह बन गई। मथुरा-वृंदावन-गोकुल का पूरा इलाका भारत में जन्माष्टमी के दौरान घूमने के लिए सबसे अच्छी जगह है। यह न केवल आपको कृष्ण के इर्द-गिर्द के जीवन और भक्ति से परिचित कराएगा, बल्कि आपको भारत के विभिन्न, कम-ज्ञात भागों की संस्कृति, परंपरा और आतिथ्य का भी स्वाद चखाएगा।जन्माष्टमी जिसे गोकुलाष्टमी के नाम से भी जाना जाता है, गोकुल में पूरे देश में एक दिन बाद मनाई जाती है क्योंकि कृष्ण को आधी रात के बाद मथुरा से यहाँ लाया गया था।
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2.मथुरा- वृंदावन (उत्तर प्रदेश)
वृंदावन भगवान कृष्ण जी जन्मस्थली है, इस वजह से यहां अलग ही रौनक देखने को मिलती है। वृंदावन में तो जन्माष्टमी का उत्सव 10 दिन पहले से ही शुरू हो जाता है। मंदिरों को तरह-तरह के फूलों से सजाया जाता है। पूरे दिन भजन-कीर्तन होते हैं। पूरा माहौल भक्तिमय होता है। मतलब यहां आकर एक अलग ही तरह की शांति का एहसास होगा आपको। दिल्ली और इसके आसपास शहरों में रहने वालों के लिए ये एकदम बेहतरीन जगह है जन्माष्टमी पर घूमने के लिए।
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3.जयपुर
जयपुर के श्री गोविन्द देव जी को जयपुर का आराध्य देव माना जाता है. इस मंदिर में दर्शक के लिए लोग देश-विदेश से आते हैं, ऐसे में श्री कृष्ण जन्माष्टमी से पहले ही यहां भजन मंडलियों द्वारा संकीर्तन किया जाता है. जिसकी शुरुआत हो चुकी हैं. मंदिर में अष्ट प्रहर हरिनाम कीर्तन की स्वर लहरियों के साथ मंदिर के मुख्य द्वार पर शहनाई और नौबत वादन प्रारंभ हो गया है और साथ ही मंदिर परिसर में कृष्ण जन्माष्टमी की बधाइयों की बंदरवार लगनी भी शुरू हो गई है
4.द्वारका (गुजरात)
गुजरात के द्वारका में भगवान श्री कृष्ण का पौराणिक मंदिर है। मथुरा छोड़ने के बाद वो द्वारका ही आए थे। गुजरात का द्वारकाधीश मंदिर अद्भुत है। वैसे तो पूरे साल ही इस मंदिर में भक्त दर्शन के लिए आते हैं, लेकिन जन्माष्टमी के अवसर पर तो दुनियाभर से दर्शनार्थियों की भीड़ उमड़ती है। मंदिर में दर्शन के साथ ही यहां आसपास भी कई जगहें हैं, जहां आप घूम-फिर सकते हैं।
5.पुरी
जगन्नाथ मंदिर भारत के सबसे पवित्र चार धाम मंदिरों में से एक है, जो पुरी में स्थित है। भारत में भगवान कृष्णके महत्वपूर्ण रूपों में से एक के रूप में पूजा जाता है। जन्माष्टमी समारोह के दौरान शहर के हर पहलू को अद्भुत और जीवंत सजावट से सजाया जाता है। भक्तों के लिए हर शाम पंडालों में कृष्ण और उनके सबसे अच्छे दोस्त बलराम का इतिहास रचा जाता है और दिखाया जाता है। इस दौरान बच्चों द्वारा कृष्ण लीला भी की जाती है, जो निश्चित रूप से एक मजेदार अनुभव है। ये उत्सव 17 दिनों तक चलता है और कृष्ण द्वारा कंस का वध के साथ समाप्त होता है। यहां कुछ जगहों पर मुंबई जैसी प्रतियोगिताएं भी आयोजित की जाती हैं।
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6.मणिपुर
भारत के पूर्वोत्तर क्षेत्र में स्थित, मणिपुर उतना ही सुंदर है जितना आप सपनों में देखते या समझते हैं। प्राकृतिक सुंदरता और संस्कृति से भरपूर, मणिपुरउन पर्यटकों के लिए एक बेस्ट जिन्हें आस्था से प्रेम है। साथ ही, जो रोमांचक रास्ते से गुजरना या यात्रा करना पसंद करते हैं। इसके अलावा, मणिपुर के लोग त्योहारों को बहुत-ही उत्साह के साथ मनाते हैं और जन्माष्टमी जिसे कृष्ण जन्म के नाम से जाना जाता है। आपको आश्चर्य हो सकता है कि मणिपुर राज्य ने जन्माष्टमी को भी बहुत ही भव्य तरीके से मनाया जाता है। आप मणिपुर जाने का भी प्लान बना सकते हैं और जन्माष्टमी को नए तरीके से मना सकते हैं।
7.उडुपी, कर्नाटक
श्री कृष्ण मंदिर के लिए प्रसिद्ध, उडुपी कर्नाटक का एक छोटा सा शहर है। 13वीं शताब्दी में स्थापित, उडुपी कृष्ण मठ पूरे भारत से लाखों तीर्थयात्रियों को आकर्षित करता है। श्री कृष्ण मंदिर में जन्माष्टमी का जश्न एक अनोखे तरीके से मनाया जाता है। आधी रात को दूध चढ़ाने की रस्म निभाई जाती है और भगवान को कई तरह की मिठाइयाँ चढ़ाई जाती हैं।
8.इम्फाल, मणिपुर
मणिपुर में भगवान कृष्ण के जन्म का जश्न बहुत ही धूमधाम और धूमधाम से मनाया जाता है। जन्माष्टमी के अवसर पर इम्फाल के प्रसिद्ध श्री श्री गोविंदजी मंदिर में कृष्ण के जीवन को दर्शाते हुए मणिपुरी शास्त्रीय नृत्य की मनमोहक रासलीला भी प्रस्तुत की जाती है।
9.मुंबई
मुंबई की तो बात ही निराली है यहां के मंदिरों में जन्माष्टमी का त्योहार काफी धूम-धाम से व बेहतरीन तरीके से मनाया जाता है। मुंबई के मंदिरों में दही-हांडी फोड़कर जन्माष्टमी मनाया जाता है जिसे देखकर आनंद आ जाता है।
10.केरल
केरल के थ्रिसूर जिले में स्थित गुरुवायु मंदिर को जन्माष्टमी में काफी भव्य तरीके से सजाया जाता है। बता दें कि इस मंदिर में भगवान कृष्ण के बालरूप की पूजा की जाती है। मान्यताओं के अनुसार इस मंदिर को बृहस्पति और वासुदेव ने बनवाया था। इसी वजह से इस मंदिर का नाम गुरुवायु मंदिर रखा गया।
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