सावन में घुमने के लिए 9 BEST PLACE IN CHHATTISHGHAD

सावन में शिव भक्ति – सावन का महीना शुरू होने वाला है। सावन जुलाई महीने के 11 तारीख से शुरू हो गया है और अगस्त महीने के 9 तक सावन मनाया जाएगा। दोस्तों, सावन के साथ अब शुरू हो जाएगी, भगवान शिव की आराधना। क्योंकि सावन का महीना महादेव का माना जाता है। सावन के हर सोमवार को उनकी पूजा-अर्जना होती है। लड़कियां अच्छे वर की प्राप्ति के लिए सोमवार के व्रत भी रखती हैं। वैसे तो देवों के देव महादेव उनको याद कर लेने से ही खुश हो जाते हैं, लेकिन सावन में उन्हें भांग, दूध, धतूरा और बेलपत्र अर्पित कर पूजा को पूर्ण किया जाता है। दोस्तों, आज कल लोगों का ध्यान सिर्फ हिल स्टेशनों की ओर ही होता हैं ऐसा देखा जाता हैं। लेकिन भारत में घूमने के लिए ऐसे कई पौराणिक स्थल भी हैं जिनके दर्शन मात्र से ही आपकी यात्रा का आनंद दुगुना हो सकता हैं। वैसे तो भारत में काफी पौराणिक स्थल मौजूद हैं लेकिन जैसा कि आप सभी को मेरे आर्टिकल का टाईटल पढ़ के समझ आ ही गया होगा की आज मैं किन पौराणिक और पवित्र स्थलों की बात कर रही हूं। जैसा कि आप सभी को पता ही होगा की सावन की शुरुआत होने ही वाली हैं। इसलिए आज मैं आपको भारत के प्राचीन शिव मंदिरों के बारे में बताने जा रही हूं जिनके दर्शन के लिए देश-विदेश से श्रद्धालु आते हैं वैसे तो इन मंदिरों में पूरे साल भीड़ देखी जाती है लेकिन सावन में इन मंदिरों की यात्रा को और भी शुभ माना जाता हैं। तो आइए जानते हैं वो पवित्र स्थल कौन से और कहाँ स्थित हैं।

सावन महीने का विशेष महत्व

सनातन धर्म में सावन महीने का विशेष महत्व है। यह महीना भगवान शिव को समर्पित होता है। इस महीने में भगवान शिव जी और माता पार्वती की पूजा उपासना की जाती है। मान्यता है कि सच्ची श्रद्धा से भगवान शिव की पूजा करने वाले व्यक्ति की मनोकामना शीघ्र पूरी हो जाती है। इस अवसर पर बागों में झूले लगाए जाते हैं। वहीं, लड़कियां और महिलाएं झूला झूलती हैं और गीत गाती हैं। चारों तरफ उत्साह, उमंग और आनंद का वातावरण फैला रहता है। अगर आप भी सावन के महीने में घूमने की प्लानिंग कर रहे हैं, तो पहाड़ों के प्रदेश छतीसगढ़ की यात्रा जरूर करें। इस प्रदेश में कई धार्मिक और पर्यटन स्थल है

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1.तुर्रीधाम
छत्तीसगढ़ के जांजगीर -चांपा जिले से अलग होकर नवींतम जिले सक्ती के पावन धरा तुर्रीधाम शिवभक्तों के लिए अत्यंत ही पूजनीय है. यहां श्रद्धालु बारहों मास आते हैं, लेकिन सावन महीने में अधिक संख्या में शिव भक्त अपनी मनोकामना लेकर तुर्रीधाम पहुंचते है. स्थानीय दृष्टिकोण से यहाँ उपस्थित शिवलिंग, प्रमुख ज्योतिर्लिंगों के समान ही वंदनीय है.मंदिर के निर्माण संबंधित जानकारी देते हुए पुजारी ने बताया की इसका निर्माण स्थानीय राजा-रानी द्वारा कराया गया था. यह किस राजा के शासन में निर्मित हुआ यह अज्ञात है. इसका जीर्णोद्धार 3-4 पीढ़ियों से किया जा रहा है.

तुर्री धाम जिला सकती में स्थित है

2.कनकी धाम
छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में हसदेव नदी के तट पर कनकी नाम का एक छोटा सा गांव है. लेकिन सावन महीने में अधिक संख्या में शिव भक्त जिला मुख्यालय से 20 किलोमीटर दूर कनकी का कनकेश्वर महादेव मंदिर यहां के आचार्य मनोज शर्मा कहते हैं, ‘मान्यता है कि एक गाय रोज जाकर इस शिवलिंग पर दूध चढ़ाती थी. एक दिन गाय को ग्वाले ने ऐसा करते देख लिया. गुस्से में गुस्से में उसने जहां दूध गिर रहा था वहां डंडे से प्रहार कर दिया. जैसे ही उसने डंडा मारा कुछ टूटने की आवाज आई और कनकी (चावल के टुकड़े) के दाने वहां बिख उस जगह की सफाई करने पर वहां एक टूटा हुआ शिवलिंग मिला. बाद में इसी स्थान पर मंदिर का निर्माण करवाया गया

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3.दमऊ धारा
भारत के छत्तीसगढ़ राज्य में शक्ति के सुरम्य परिदृश्यों के बीच स्थित है दमऊ धारा का रहस्यमयी स्थल। लेकिन सावन महीने में अधिक संख्या में शिव भक्त अपनी मनोकामना लेकर दमऊ धारा पहुंचते है यह छिपा हुआ रत्न, जिसे अक्सर “दमऊ का रावण” कहा जाता है, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति का अनूठा मिश्रण प्रस्तुत करता है।दमऊ धारा में, सतपुड़ा पर्वतमाला से एक छोटी नदी गिरकर मनमोहक दमऊ धारा जलप्रपात बनाती है। अपनी शांत सुंदरता और मधुर ध्वनि के लिए प्रसिद्ध यह जलप्रपात एक मनोरम दृश्य प्रस्तुत करता है। पर्यटक इसके ताज़ा पानी में डुबकी लगा सकते हैं या आसपास के शांत वातावरण का आनंद ले सकते हैं।दमाऊ धारा का एक मुख्य आकर्षण पहाड़ की चोटी पर स्थित एक छोटा सा मंदिर है। इस दर्शनीय स्थल से पर्यटक हरी-भरी घाटियों और दूर-दराज के प्राकृतिक दृश्यों का आनंद ले सकते हैं। यह मंदिर एक आध्यात्मिक अभयारण्य के रूप में कार्य करता है, जो शांति और आत्मनिरीक्षण चाहने वालों के लिए एक शांतिपूर्ण आश्रय स्थल प्रदान करता है

दमाऊ दहर शिव मंदिर और जलप्रपात

4.जगदलपुर
सावन के महीने में घूमने के लिए सबसे खूबसूरत जगह छत्तीसगढ़ है. इस राज्य में जगदलपुर है. यह नगर छत्तीसगढ़ के प्रमुख पर्यटन स्थलों में से एक है और अपनी प्राकृतिक सुंदरता, ऐतिहासिक महत्व और धार्मिक महत्व के लिए प्रसिद्ध है. जगदलपुर छत्तीसगढ़ के आदिवासी संस्कृति, जलप्रपात, धार्मिक स्थलों और प्राकृतिक अभ्यास के लिए मशहूर है. जगदलपुर के पास स्थित चित्रकोट जलप्रपात एक शानदार प्राकृतिक आकर्षण है. यह जलप्रपात गोदावरी नदी पर बसा हुआ है और घने वनों में सुरम्यता लाता है. थोड़ी ही दूरी पर तिरथगढ़ है यह धार्मिक स्थल माता धानगंगा के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है. यहां शिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं.

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5.मैनपाट
मैनपाट छत्तीसगढ़ के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में गिना जाता है। इस स्थान पर सावन के महीने में लोगों का उमड़ता हुआ भीड़ अधिक देखने को मिलती है यह जगह इतना ख़ूबसूरत है कि लोग इसको ‘छोटा तिब्बत’ कहकर सम्बोधित करते हैं। समुद्र तल से लगभग 1100 मीटर की ऊँचाई पर स्थित इस जगह पर घूमने और देखने के लिए काफ़ी कुछ है। सावन के महीने में इस जगा पर आना इसलिए ख़ास होता है क्योंकि यह हिल स्टेशन आपको ट्रेकिंग का मौक़ा देता है। आप ट्रेकिंग के दौरान प्रकृति के अद्भुत दृश्यों से होकर गुज़रते हैं। अगर आप मानसून देखना चाहते हैं तो एक बार मैनपाट जरूर जाएं।

मैनपाट

6.श्रीगुरुद्वारा साहिब जी
छत्तीसगढ़ के जगदलपुर में ही गुरुद्वारा गुरु गोविंद सिंह जी है. यह गोविंद सिंह के आवास के रूप में मान्यता प्राप्त है. यह धार्मिक स्थल सदस्यों के बीच बहुत प्रसिद्ध है और यहां धार्मिक आयोजन आयोजित किए जाते हैं. इसके अलावा यहां कोठुम जलप्रपात है यह औरंगाबाद से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है और यहां एक विशाल जलप्रपात है जिसे घने जंगलों में घिरा हुआ है. वहीं जलप्रपात, तिरथगढ़ भी घूमने के लिए जगह है. जहां आप सावन के महीने में घूम सकते हैं.

7.बस्तर छत्तीसगढ़
बस्तर छत्तीसगढ़ राज्य के पश्चिमी भाग में स्थित है और यह छत्तीसगढ़ का सबसे बड़ा जिला है. बस्तर घने वन, प्राकृतिक सौंदर्य और आदिवासी संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है. यहां कई आकर्षक स्थान हैं जहां आप सावन के महीने में आनंद ले सकते हैं. जेरो छत्तीसगढ़ में स्थित एक प्राचीन आदिवासी गांव है और यहां आप आदिवासी संस्कृति का अद्भुत दर्शन कर सकते हैं. यहां आप आदिवासी गीत, नृत्य, और परंपराओं का अनुभव कर सकते हैं. इसके अलावा आप दंतेश्वर घूम सकते हैं. यहां पर्वतीय जलप्रपात और मंदिर स्थित हैं. यहां श्रद्धालु आते हैं और शिव जी की पूजा करते हैं.

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8.गड़िया पर्वत
कांकेर जिले में स्थित गड़िया पर्वत एक बहुत ही ख़ूबसूरत पर्यटन स्थल है। इस जगह पर आकर मौसम की जो छटा आपको देखने को मिलेगी वह आपको भावविभोर कर देगी। हर जगह हरे भर ख़ूबसूरत दृश्य और झरने, सावन को जो मज़ा इस जगह पर आकर आपको मिलेगा हमेशा हमेशा के लिए आपकी स्मृतियों में रह जाएगा। इस जगह पर आकर आप किला डोंगरी का भी दीदार कर सकते हैं। इस जगह पर बहने वाली दूध नदी के प्रति सैलानियों का जो आकर्षण है वह बहुत ही लाजवाब जान पड़ता है।

8. भिलाई
सावन का महीन चल रहा है. ऐसे में अगर आप इस महीने में घूमना पसंद करते हैं तो छत्तीसगढ़ जरूर जाएं. क्योंकि आपको यहां घूमने के लिए बहुत सारी जगहें मिल जाएंगी. इन्ही जगहों में से एक है भिलाई नगर. यह छत्तीसगढ़ का एक उद्योगिक शहर है और यहां आप मारकंडेय देवी मंदिर घूम सकते हैं. यह मंदिर भिलाई नगर के पास स्थित है और भगवान मारकंडेय को समर्पित है. यहां आप पूजा कर सकते हैं और आध्यात्मिक आत्मर्पण कर सकते हैं. इसके अलावा आप गंगावर तालाब का सैर कर सकते हैं. यह तालाब भिलाई नगर के पास स्थित है और यहां आप शांतिपूर्ण वातावरण में घूमने का आनंद ले सकते हैं. यहां आप चिड़ियों की आवाज़ सुन सकते हैं और प्रकृति के निकटता में समय बिता सकते हैं. सबसे खास यहां श्री शिव मंदिर है. सावन के महीने में इस मंदिर का दर्शन करने से शुभ सामाचार मिलता है. यह मंदिर भिलाई नगर के पास स्थित है और श्रद्धालु लोग यहां शिव पूजा करते हैं. यहां आपको धार्मिक वातावरण में घूमने का अवसर मिलता है.

9.अंबिकापुर
सरगुजा जिले में स्थित अंबिकापुर घने जंगल और धारदार या नुकीले हिल्स के लिए जाना जाता है. अगर आप सिटी लाइफ स्टाइल से ऊब चुके हैं, तो वीकेंड हॉलिडे के लिए अंबिकापुर जरूर जाएं. अंबिकापुर में तमोर पिंगला अभ्यारण्य और सेमरसोत वन्‍यजीव अभ्यारण स्थित हैं. हर साल काफी संख्या में पर्यटक अभ्यारण्य घूमने आते हैं.

अंबिकापुर

कोरबा में सावन में घूमने के लिए कुछ प्रमुख स्थान:

सर्वमंगला मंदिर:
यह कोरबा का एक प्रसिद्ध मंदिर है जो देवी दुर्गा को समर्पित है।

पाली का शिव मंदिर:
यह मंदिर कोरबा-बिलासपुर मार्ग पर स्थित है और यहां एक प्राचीन शिव मंदिर है।

कनकी धाम:
यह कोरबा से 25 किलोमीटर दूर स्थित है और भगवान शिव को समर्पित है।

सीतामणी गुफाएं:
ये तीन चट्टानी गुफाएं हैं जो भगवान राम, लक्ष्मण और सीता को समर्पित हैं।

मड़वारानी मंदिर:
यह मंदिर कोरबा-चांपा रोड पर स्थित है और पहाड़ी की चोटी पर बना है।

कुदुरमाल:
यह एक गाँव है जहाँ संत कबीर की समाधि है और एक हनुमान मंदिर भी है।

कोसगईगढ़:
यह एक किला है जो पहाड़ी पर स्थित है और कोरबा जिले का एक सुंदर दृश्य प्रस्तुत करता है।

Ask questions

1.सावन में ऐसा क्या खास है?
सावन के सोमवार का महत्व माना जाता है कि सावन के सोमवार को भगवान शिव की विशेष कृपा प्राप्त होती है.

2.सावन में लोग कहां जाते हैं?
यहाँ स्थित दक्षेश्वर महादेव मंदिर विशेष रूप से प्रसिद्ध है। यह मंदिर उसी स्थान पर बना है जहाँ राजा दक्ष ने यज्ञ किया था। भक्तों का मानना है कि सावन के महीने में भगवान शिव यहाँ साक्षात विराजमान होते हैं,

3.सावन का दूसरा नाम क्या है?
श्रावण मास, जिसे सावन का महीना भी कहा जाता है,

4.सावन में क्या चीजें नहीं खानी चाहिए?
सावन सोमवार का खास महत्व है. सावन के महीने में कुछ चीजें खाने की मनाही होती है. सावन सोमवार व्रत में प्याज, लहसुन, मांस-मछली और शराब जैसी चीजों से दूरी बना कर रहना चाहिए. इन दिनों सात्विक और शुद्ध भोजन ही खाना चाहिए.

5.सावन 2025 कब से शुरू होगा और कब समाप्त होगा?
सावन के महीने की शुरुआत 11 जुलाई यानी आज से होने जा रही है और इसका समापन 9 अगस्त 2025 को होगा.1 day ago

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