Ganesh Chaturthi 2025 – गणेश चतुर्थी के दौरान भारत में घूमने के लिए लोकप्रिय स्थान

गणेश चतुर्थी के दौरान भारत के दर्शनीय स्थलों की यात्रा

गणेश चतुर्थी भारत का एक प्रमुख और लोकप्रिय पर्व है,जो देशभर में भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह त्योहार भगवान गणेश को समर्पित है और दस से बीस दिनों तक विभिन्न परंपराओं के साथ आयोजित होता है। घरों से लेकर बड़े-बड़े पंडालों तक गणपति की स्थापना होती है और माहौल भक्तिमय हो जाता है। पूजा-अर्चना, भजन, सांस्कृतिक कार्यक्रम और शोभायात्राओं से गलियां गूंज उठती हैं। अंत में प्रतिमाओं का जल विसर्जन किया जाता है, जो उत्सव का भावपूर्ण समापन होता है। यह पर्व सिर्फ धार्मिक आस्था ही नहीं, बल्कि सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक रंगों का भी प्रतीक है

गणेश चतुर्थी के दौरान घूमने के लिए लोकप्रिय स्थान की सूची

  • मुंबई
  • अहमदाबाद
  • हैदराबाद
  • दिल्ली
  • कोलकाता
  • नागपुर
  • बेंगलुरु
  • कनिपकम
  • गंगटोक
  • गोवा

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गणेश चतुर्थी के दौरान घूमने के लिए लोकप्रिय स्थान

1. मुंबई (Mumbai)

मुंबई का गणेशोत्सव दुनियाभर में मशहूर है. यहां की विशाल और रंग-बिरंगी गणेश प्रतिमाएं पूरे शहर को सजाती हैं. अरब सागर के किनारे बप्पा का विसर्जन एक ऐसा दृश्य पेश करता है, जिसे देखकर हर श्रद्धालु मंत्रमुग्ध और भाव-विभोर हो जाता है. शहर के अलग-अलग कोनों में होने वाले जुलूस, सांस्कृतिक कार्यक्रम और संगीत समारोह इस उत्सव को और भी जीवंत बनाते हैं. यहां कुछ फेमस गणेश पंडाल लालबागचा राजा, गणेश गल्ली चा राजा (मुंबईचा राजा) और जीएसबी सेवा मंडल हैं.

2. अहमदाबाद

गणेश पर्व अहमदाबाद में सामाजिक एकता का प्रतीक माना जाता है। क्योंकि, इस अवसर पर लोग हर जातियों, धर्मों, और समुदायों के लोग साथ मिलकर एक पंडाल के नीचे गणेश जी की पूजा करते हैं। इस दौरान लोगों के बीच सामूहिक भजन, पूजा, और उत्सव का आयोजन होता है, जो सामाजिक एकता और सहयोग को प्रोत्साहित करता है। अहमदाबाद में गणेश पर्व की भव्यता और उत्सव देखने के लिए देश-विदेश से पर्यटक आते हैं। आपको भी यहां का पर्व देखने आने का प्लान बनाना चाहिए।

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3. हैदराबाद (Hyderabad)

हैदराबाद में गणेशोत्सव का उत्साह बहुत बड़ा होता है. इस दौरान पूरे शहर की रौनक देखते ही बनती है. खैरताबाद का विशाल गणेश और शहर के अन्य पंडालों जैसे बालापुर, गोवलीपुरा और कमला नगर में श्रद्धालु दूर-दूर से दर्शन करने आते हैं. यहां की सजावट, जुलूस और सांस्कृतिक गतिविधियां इस त्योहार को देखने लायक बनाती हैं.जोश और उल्लास से हैदराबाद में गणेश चतुर्थी 2024 मनाई जाती है। इस शहर में यह त्योहार विनायक चविथी से शुरू होता है और अनंत चतुर्दशी पर मूर्तियों के विसर्जन के साथ समाप्त होता है। शहर में लगभग 75,000 गणेश पंडाल स्थापित किए जाते हैं। मूर्तियों को देखने के लिए लोकप्रिय स्थानों में खैरताबाद, बालापुर, पुराना शहर, दुर्गम चेरुवु और न्यू नागोले शामिल हैं। मुख्य विसर्जन समारोह हुसैन सागर झील में होता है।

4. दिल्ली (Delhi)

देश की राजधानी में गणेशोत्सव का माहौल हर गली और मोहल्ले में महसूस किया जा सकता है. विशाल पंडालों में पूजा-अर्चना के साथ भंडारे और जुलूस का आयोजन होता है. बुराड़ी का पंडाल बेहद फेमस है, जहां दूर-दूर से लोग दर्शन करने आते हैं. यहां लोग मिलकर उत्सव मनाते हैं और हर पंडाल में भक्ति का आनंद लिया जा सकता है.

5. कोलकाता (Kolkata)

कोलकाता में गणेशोत्सव बड़े लेवल पर नहीं होता, लेकिन यह स्थानीय संस्कृति और परंपराओं के रंग में रचा-बसा होता है. शहर के छोटे-छोटे पंडाल और सजावट इस त्योहार को अपने अंदाज में खास बनाते हैं. लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों से पूजा-अर्चना करते हैं और पूरे उत्सव का आनंद लेते हैं.

6.नागपुर

नागपुर के गणपति मंडल इस उत्सव को बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं, आरती गाते हैं और “मम सर्वकर्मसिद्धये सिद्धिविनायक पूजनमहं करिष्ये” जैसे मंत्रों का जाप करते हैं। 31 फुट ऊँची विदर्भ मठाधी कामगार गणेश उत्सव मूर्ति यहाँ का मुख्य आकर्षण है। हर साल मनाया जाने वाला यह उत्सव इस दौरान नागपुर के लोगों के लिए एक आकर्षण का केंद्र बन जाता है।हर रात होने वाली सामाजिक गतिविधियाँ एक अतिरिक्त आकर्षण हैं। विसर्जन के दिन, हज़ारों भक्त अपने प्रिय गणेश को अंतिम विदाई देने के लिए फुटाला झील क्षेत्र में एकत्रित होते हैं। श्री गणेश मंदिर टेकड़ी नागपुर एक और स्थान है जहाँ सुबह की आरती की जाती है।

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7.बेंगलुरु

कर्नाटक में गणेश चतुर्थी का उत्सव अन्य स्थानों की तरह बिल्कुल अलग होता है, क्योंकि इस उत्सव से पहले स्वर्ण गौरी व्रतम या गौरी हब्बा मनाया जाता है। इसलिए, यहाँ गणेश गौरी उत्सव को चतुर्थी के नाम से भी जाना जाता है। घरों के अलावा, शहर में कई जगहों पर विनायक चतुर्थी का भव्य उत्सव मनाया जाता है। पिछले पाँच दशकों में, बसवनगुडी के एपीएस कॉलेज मैदान में सबसे लोकप्रिय उत्सवों में से एक का आयोजन होता रहा है। भारत के सबसे बड़े सांस्कृतिक आयोजनों में से एक, बेंगलुरु गणेश उत्सव दस दिनों तक चलने वाला एक सांस्कृतिक उत्सव है जिसमें जाने-माने संगीतकार अपनी प्रस्तुतियाँ देते हैं।

8.कनिपकम

गणेश चतुर्थी 2025 के लिए एक और प्रमुख स्थान, कनिपकम, आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में एक छोटा सा शहर और तीर्थस्थल है। ऐसा माना जाता है कि वरसिद्धि विनायक मंदिर में विनायक की एक बढ़ती हुई मूर्ति है। ब्रह्मोत्सव, एक 21-दिवसीय उत्सव, गणेश चतुर्थी के साथ शुरू होता है। पर्यटक गणेश चतुर्थी के दौरान एक जीवंत और आनंदमय वातावरण का आनंद ले सकते हैं।

9.गणेश टोक मंदिर, गंगटोक 

गंगटोक का यह मनमोहक मंदिर एक पहाड़ी पर स्थित है जहाँ से कंचनजंघा पर्वत का मनोरम दृश्य दिखाई देता है। पर्यटक और तीर्थयात्री गणेश टोक को एक पवित्र स्थल मानते हैं। यहाँ की हरी-भरी वनस्पतियों और ऊबड़-खाबड़ रास्तों के कारण यह मंदिर पैदल यात्रियों और ट्रेकर्स को आकर्षित करता है। 

10.गोवा (Goa)

समुद्र के किनारे बसा गोवा मुंबई के एकदम करीब है. यह सिर्फ बीच और पार्टियों के लिए ही नहीं, बल्कि गणेशोत्सव के लिए भी जाना जाता है. यहां लोग घरों में गणपति की मूर्तियां स्थापित करते हैं और पूजा-अर्चना करते हैं. संगीत और नृत्य के आयोजन से यह त्योहार और भी जीवंत हो जाता है. समुद्र किनारे होने वाला उत्सव अनुभव को और यादगार बना देता है.

गणेश चतुर्थी क्यों मनाते हैं?

मुंबई में गणेश चतुर्थी एक ऐसा त्योहार है जो बुद्धि, समृद्धि और नई शुरुआत के देवता, भगवान गणेश के जन्मोत्सव का प्रतीक है। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार, देवी पार्वती ने भगवान गणेश की रचना की थी, जिन्हें विघ्नहर्ता माना जाता है। यह त्योहार उनके भक्तों को आशीर्वाद देने के लिए पृथ्वी पर उनके अवतरण का प्रतीक है। इसलिए, लोगों का मानना ​​है कि गणेश की पूजा करने से उनके जीवन से विघ्न दूर होते हैं और उन्हें समृद्धि और खुशियाँ मिलती हैं।

भगवान गणेश को जल में क्यों विसर्जित किया जाता है?

गणपति विसर्जन, या गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन, जन्म और मृत्यु के चक्र का प्रतीक है। कुछ दिनों तक पूजा करने के बाद, मूर्ति को जल में विसर्जित कर दिया जाता है, जो इस बात का प्रतीक है कि जीवन क्षणभंगुर है और भगवान गणेश अपने स्वर्गलोक लौट गए हैं। वास्तव में, यह अनुष्ठान भक्तों को सभी सांसारिक मोह-माया त्यागकर जीवन के आध्यात्मिक पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करने के लिए प्रेरित करता है। यह एक मार्मिक क्षण होता है, जब भक्त गणेश को विदाई देते हैं और अगले वर्ष उनका स्वागत करने का वादा करते हैं।

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