अगर आप कोरबा के आसपास 90 किमी के अंदर घूमने की योजना बना रहे हैं, तो यह गाइड आपके लिए है। कोरबा सिर्फ औद्योगिक शहर ही नहीं, बल्कि प्राकृतिक सुंदरता, झरनों, पहाड़ों, बांधों और ऐतिहासिक मंदिरों के लिए भी जाना जाता है। यहां कपल्स, परिवार, दोस्तों और प्रकृति प्रेमियों के लिए कई बेहतरीन जगहें मौजूद हैं
छत्तीसगढ़ का औद्योगिक केंद्र कोरबा, जंगलों और पहाड़ियों से घिरा एक अनूठा पर्यटन स्थल है, जो एक रोमांचक यात्रा का अनुभव प्रदान करता है। हसदेव नदी के किनारे बसा कोरबा प्राकृतिक, ऐतिहासिक और धार्मिक स्थलों सहित कई दर्शनीय स्थल प्रदान करता है, जो इसे परिवार और दोस्तों के साथ घूमने के लिए एक आदर्श स्थान बनाता है।
जंगलों और नदियों से घिरा एक जीवंत औद्योगिक शहर, कोरबा को “छत्तीसगढ़ की ऊर्जा राजधानी” के रूप में जाना जाता है और यह अपने ऊर्जा क्षेत्र, आदिवासी संस्कृति और प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है – संस्कृति के शौकीनों, प्रकृति प्रेमियों और उसके अलावा उससे हटकर खोज करने वालों के लिए एकदम सही जगह है।
कोरबा घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है, जब मौसम दर्शनीय स्थलों की सैर और क्षेत्र के प्राकृतिक और सांस्कृतिक आकर्षणों को देखने के लिए सुहावना होता है।
कपल्स और Romantic places के लिए सबसे अच्छी जगहें
- सतरेंगा
- गोल्डन आइलैंड
- केंदई जलप्रपात
- हसदेव बांगो डैम
- देवपहरी जलप्रपात
- माता सर्वमंगल मंदिर
- कोसगाई पहाड़
- बालको डैम क्षेत्र
- पथर्रीपारा प्राकृतिक क्षेत्र
- मेहरगढ़
- कुदुरमाल
- कनकी
- माँ मड़वारानी मंदिर
- पाली शिव मंदिर
1. सतरेंगा
सतरेंगा: Korba शहर से लगभग 38 कि.मी. और बिलासपुर शहर से लगभग 126 कि.मी. दूर बांगो रिसर्वायर में सतरेंगा गांव पे स्थित है यह झील जो खुबसूरत पहाड़ो से घिरा हुआ है। इस झील का आनन्द लेने लोग बड़ी दूर – दूर से आते है। यहां पहुंचने पर सबसे पहले आपको दुर से ही एक खुबसुरत महादेव पहाड़ का नजारा दिखेगा जो इस जगह का एक दर्शनीय स्थल है जहां बहुत सारे लोग इस नेचुरल ब्युटी की फोटो भी लेते जाते हैं, इसके अलावा आपको यहां एक 1400 साल पुराना साल वृक्ष (Soreya Robasta) भी देखने को मिलेगा, जो आपको सतरेंगा गांव की बस्ती से लगभग 500 मी. की दूरी पर दिखेगी।
Romantic places के लिए सतरेंगा में मुख्य आकर्षण और गतिविधियाँ
सतरेंगा में नवविवाहित जोड़ों के लिए कई शानदार अनुभव मौजूद हैं
- फ्लोटिंग कॉटेज और हाउसबोट (Floating Cottages & Houseboats): झील के बीचों-बीच तैरते हुए कॉटेज में ठहरना एक अद्भुत अनुभव देता है।
- बोट क्लब (Satrenga Boat Club): यहाँ आप पार्टनर के साथ स्पीड बोट, जेट स्की और सुकून भरी पेडल बोटिंग का लुत्फ उठा सकते हैं
- गोल्डन आइलैंड (Golden Island): नाव द्वारा इन छोटे द्वीपों पर जाएँ, जहाँ आपको पूरी तरह से शांति और प्राकृतिक सुंदरता मिलेगी
- सनसेट पॉइंट (Sunset Point): शाम के समय यहाँ से डूबते हुए सूरज का नज़ारा बेहद रोमांटिक होता है
हनीमून के लिए बेहतरीन टिप्स
- जाने का सबसे सही समय: अक्टूबर से मार्च का समय (जब मौसम सुहावना और हरियाली भरपूर होती है) हनीमून के लिए सबसे उत्तम है
- कैसे पहुँचें: सतरेंगा कोरबा शहर से लगभग 36 किलोमीटर उत्तर में स्थित है निकटतम हवाई अड्डा रायपुर (लगभग 250 किमी दूर) है, जहाँ से आप टैक्सी द्वारा आसानी से पहुँच सकते
2. गोल्डन आईलैंड Korba छत्तीसगढ़
Korba की यह खुबसुरत जगह कोरबा जिले के मोरगा नामक गांव के पास हैं, जो बिलासपुर-अम्बिकापुर नेशनल हाईवे से केंदई नामक गांव से लगभग 11 कि.मी. की दूरी पर हसदेव-बांगो रिसर्वायर पर स्थित हैं, यहां पहुंचने के लिए आप बाइक या कार का उपयोग कर सकते हैं, यहां तक पहुंचने के लिए लगभग 8 कि.मी. तक रोड बनी हुई हैं,
फिर उसके बाद कच्चे रोड से होकर आपको यहां जाना होगा । यहां पर आप नौका विहार, पिकनिक, कैम्पिंग, फिशिंग और नेचर के मनोरम दृश्य का आनंद ले सकते हैं, यहां यात्रियों के रूकने के लिए रेस्ट हाउस भी बनाया गया हैं, जहां वो विश्राम कर यहां कुछ दिनो तक अपने फैमिली के साथ समय व्यतीत कर सकते हैं,
हनीमून के लिए गोल्डन आइलैंड की खासियत:
- Romantic नज़ारे: हरे-भरे जंगलों के बीच पानी से घिरे छोटे-छोटे टापू इसे एक जादुई और शांत वातावरण देते हैं
- बोटिंग और सनसेट: यहाँ कपल्स के लिए नौका विहार (Boating) की सुविधा उपलब्ध है शाम के समय डूबते सूरज की किरणें पानी पर पड़ती हैं, जिससे पूरा आइलैंड सोने की तरह चमकने लगता है, इसीलिए इसे ‘गोल्डन आइलैंड’ कहते है
- प्री-वेडिंग और फोटोग्राफी: इस लोकेशन का प्राकृतिक सौंदर्य कपल्स के लिए बेहतरीन प्री-वेडिंग और फोटोग्राफी की पृष्ठभूमि तैयार करता है
3. केंदई जलप्रपात
केंदई जलप्रपात छत्तीसगढ़ राज्य के Korba जिले का एक बहुत ही खुबसुरत जलप्रपात है। जो की कोरबा जिले में स्थित दुसरी सबसे ऊंची जलप्रपात हैं, केंदई नमक यह झरना कोरबा जिले के केंदई नमक गांव में स्थित हैं, जिसके कारण इस जलप्रपात को भी केंदई के नाम से जाना जाता है।
केंदई बिलासपुर – अंबिकापुर राजमार्ग संख्या क्रमांक 5 में कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 85 km. की दूरी पर स्थित एक गांव है। प्राकृतिक संपदाओं से लदा हुआ यह खूबसूरत जलप्रपात बिलासपुर जिले से भी लगभग 134 km. की दूरी में स्थित हैं। इसकी सुंदरता दार्शनिको को लुभाने और अपनी ओर खींचने में पर्याप्त है। जहां आकर हर कोई हर्ष और उल्लास की उमंग से झूम उठता है।
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केंदई जलप्रपात और आसपास के मुख्य आकर्षण
- केंदई जलप्रपात (Kendai Waterfall): कटघोरा से लगभग 50 किमी दूर स्थित यह झरना मॉनसून और सर्दियों के मौसम में बहुत शानदार लगता है। यहाँ सीढ़ियों के माध्यम से आप झरने के बिल्कुल करीब जा सकते हैं।
- सतरेंगा बोट क्लब (Satrenga Boat Club): हसदेव नदी के बैकवाटर पर स्थित यह जगह (कोरबा से लगभग 45 किमी) हाउसबोट और वाटर स्पोर्ट्स के लिए हनीमून कपल्स के बीच बहुत लोकप्रिय है।
- देवपहरी (Devpahari): केंदई के आसपास स्थित यह एक और अद्भुत पिकनिक और सुकून भरा स्थान है, जो अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है।
4. हसदेव बांगो डैम
बांगो में स्थित हसदेव-बांगो रिसवार्यर पर एक खुबसुरत और नायाब डैम जो अभियांत्रिकी का एक बहुत ही बेहतरीन नमुना है, यह डैम कोरबा शहर से लगभग 51 कि.मी. दूर और बिलासपुर शहर से लगभग 95 कि.मी. दूर बांगो में हसदेव नदी के हसदेव-बांगो रिसवार्यर में स्थित है,
इसका निर्माण 1961-62 में हसदेव नदी में किया गया था। यह छत्तीसगढ़ का सबसे लम्बा और चौड़ा डैम भी है, यह छत्तीसगढ़ का पहला बहुउद्येशीय परियोजना भी है, इसका जलभराव क्षेत्रफल लगभग 6730 वर्ग कि.मी. है, इसे हसदेव-बांगो परियोजना या फिर मिनीमाता बांध के नाम से भी जाना जाता है।
स्थान: हसदेव बंगो बांध, लालपुर, छत्तीसगढ़ 495453
मुख्य आकर्षण: बांध
घूमने का सबसे अच्छा समय: बरसात का मौसम
कोरबा से दूरी: 50 किमी
5. देवपहरी जलप्रपात korba
Korba छत्तीसगढ़, भारत विस्तृत जानकारी देव-पहाड़ी जलप्रपात, जिसे गोविंद कुंज के नाम से भी जाना जाता है, कोरबा जिले में चोरनाई नदी पर स्थित एक भव्य प्राकृतिक जलप्रपात है। यह जलप्रपात छत्तीसगढ़ के सबसे खूबसूरत स्थलों में से एक है, जो अपनी ऊंचाई और गहरे कुंड में गिरने वाले पानी की विशाल मात्रा के लिए प्रसिद्ध है।
नीचे देखें। “देव-पहाड़ी” नाम का अर्थ है “देवताओं का पर्वत”, जो स्थानीय मान्यता को दर्शाता है कि यहाँ का जल पवित्र और दिव्य है। यह झरना घने जंगलों और ऊबड़-खाबड़ पहाड़ी इलाकों से घिरा हुआ है, जो इसे पर्यावरण-प्रेमियों और रोमांच के शौकीनों के लिए एक प्रमुख गंतव्य बनाता है। जल चट्टानी सीढ़ियों की एक श्रृंखला से बहता हुआ अंत में नाटकीय रूप से नीचे गिरता है,

जिससे एक धुंधली फुहार बनती है जो गर्मियों के चरम पर भी आसपास की हवा को ठंडा कर देती है। गिरते पानी की ध्वनि दूर से ही सुनाई देती है, जो आगंतुकों को जंगल के रास्तों से होते हुए झरने तक ले जाती है। झरने का आधार एक प्राकृतिक तैराकी क्षेत्र बनाता है जहाँ पानी साफ और ताज़ा होता है, हालांकि मानसून के चरम मौसम में सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। देव-पहाड़ी के आसपास का क्षेत्र एक लोकप्रिय पिकनिक स्थल है, जहाँ परिवार और दोस्तों के समूह प्राकृतिक सुंदरता का आनंद लेने के लिए इकट्ठा होते हैं
बेहतरीन फोटो स्पॉट:
बेस पूल: जलस्तर से तस्वीरें लेने पर झरने की विशालता और शक्ति का आभास होता है।
ऊपरी रिज: झरने के शीर्ष से नीचे की ओर देखने पर नदी के मार्ग का एक अनूठा परिप्रेक्ष्य प्राप्त होता है।
6. माता सर्वमंगल मंदिर
सर्वमंगल मंदिर देवी दुर्गा को समर्पित है और यह Korba के जमींदार राजेश्वर दयाल के पूर्वजों द्वारा निर्मित एक प्रसिद्ध मंदिर है। इस स्थान का मुख्य आकर्षण नदी के नीचे स्थित एक रहस्यमयी गुफा है, जो मंदिर के दूसरी ओर खुलती है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रानी धनराज कुंवर देवी प्रतिदिन इस मंदिर में दर्शन के लिए आती थीं, जिससे भक्तों के लिए मंदिर का महत्व और भी बढ़ जाता है। यहां दर्शन के दौरान, आप आसपास के अन्य मंदिरों, जैसे त्रिलोकिनाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलश भवन से भी आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
स्थान: 8MRP+CRF, पावर हाउस रोड, सर्वमंगला पारा, कोरबा, छत्तीसगढ़ 495677
मुख्य आकर्षण: त्रिलोकीनाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलश भवन
जाने का सर्वोत्तम समय: कभी भी
कोरबा से दूरी: 8.7 किमी
7. कोसगाई पहाड़
कोरबा: जिला मुख्यालय से 35 किलोमीटर दूर कोसगाई पहाड़ पर स्थित देवी का मंदिर, अपनी प्राचीनता और पुरातात्विक महत्व के कारण विशेष रूप से जाना जाता है. प्रकृति की गोद में बसा कोसगाई गढ़, कोरबा जिले के गौरवशाली इतिहास को दर्शाता है. पुरातात्विक दृष्टि से यह मंदिर 16वीं शताब्दी का माना जाता है
और छत्तीसगढ़ के 36 गढ़ों में से एक, छुरीगढ़ से इसका गहरा संबंध है. आज भी राज घराने के सदस्य यहां पूजा-अर्चना करने आते हैं. इस पहाड़ पर चढ़ना जितना मुश्किल है, ऊपर पहुंचने पर उतना ही सुकून मिलता है. मान्यता है कि यहां जो भी भक्त मनोकामना लेकर आता है, माता उसकी मुराद पूरी करती हैं. यही वजह है कि मंदिर में भक्तों की भीड़ लगातार बढ़ती जा रही है.
कोसगाई मंदिर से जुड़ी मुख्य बातें और मान्यताएँ:
- ऐतिहासिक महत्व: इस मंदिर का निर्माण लगभग 12वीं से 16वीं शताब्दी के बीच कलचुरी राजा बहरेंद्र साय द्वारा कराया गया था। यह स्थान छत्तीसगढ़ के ’36 गढ़ों’ में से एक कोसगईगढ़ (या छुरीगढ़) का हिस्सा है।
- खुला आसमान: इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि मंदिर के ऊपर कोई छत नहीं है। मान्यता है कि माता कोसगाई को छत पसंद नहीं है, जिसके कारण आज तक इसका निर्माण अधूरा है।
- सफेद ध्वज: यहाँ लाल कपड़े के बजाय माता को सफेद ध्वज अर्पित किया जाता है, क्योंकि माता को शांति का प्रतीक माना जाता है।
- पर्यटन: यहाँ नवरात्रि के समय भक्तों की भारी भीड़ होती है। इसके अलावा, पहाड़ी की चोटी से आसपास के हरे-भरे जंगलों और कोरबा शहर का मनोरम दृश्य दिखाई देता है।
8. बालको डैम क्षेत्र
बालको (Vedanta Group) द्वारा इस औद्योगिक क्षेत्र के पास उत्कृष्ट जल प्रबंधन की दिशा में कई कदम उठाए गए हैं। जल संचय अभियान के तहत क्षेत्र में कई चेक डैम बनाए गए हैं, जिनका नवीनीकरण भी किया गया है। इससे भू-जल का स्तर बढ़ने के साथ-साथ आस-पास के किसानों को सिंचाई में काफी लाभ मिल रहा है।
प्रमुख पिकनिक और पर्यटन स्थल
बालको नगर से लगे हुए और इसके आस-पास कई बेहतरीन प्राकृतिक और पर्यटन स्थल स्थित हैं, जहाँ पर्यटक और स्थानीय निवासी वीकेंड पर घूमने आते हैं:
- केसला पिकनिक स्पॉट (Kesla Picnic Spot): बालकोनगर के निकट स्थित यह एक बेहद खूबसूरत और शांत प्राकृतिक स्थल है।
- सतरेंगा (Satrenga): हसदेव नदी के बैकवाटर पर स्थित यह पिकनिक स्थल अपने शानदार दृश्यों (व्यू पॉइंट) और बोटिंग (Satrenga Lake) के लिए प्रसिद्ध है।
9. पथर्रीपारा प्राकृतिक क्षेत्र
पथरीपारा-बस्ती कोरबा जिले के कोरबा में स्थित एक इलाका है, जिसका पिन कोड 495677 है। छत्तीसगढ़ के मध्य में स्थित इस क्षेत्र में पूरे वर्ष मध्यम तापमान के साथ उष्णकटिबंधीय जलवायु पाई जाती है। यह क्षेत्र मुख्य रूप से कृषि प्रधान है, जिसमें विशाल कृषि भूमि और लघु उद्योग हैं।
पथरीपारा-बस्ती के निवासी मुख्य रूप से कृषि, व्यापार और सेवा क्षेत्र में कार्यरत हैं। इस इलाके की आबादी अपेक्षाकृत कम है, जिसमें शहरी और ग्रामीण दोनों तरह के लोग रहते हैं। यह क्षेत्र सड़कों और राजमार्गों के जाल के माध्यम से आसपास के शहरों और कस्बों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। स्थानीय अर्थव्यवस्था कृषि क्षेत्र पर बहुत अधिक निर्भर है, जिसमें धान, गेहूं और दालें निवासियों की आय के प्राथमिक स्रोत हैं। कोरबा जिला, जहां पथरीपारा-बस्ती स्थित है,
10. मेहरगढ़
इस किले के अवशेष पाउना खरा पहाड़ी पर 2000 फीट की ऊंचाई पर पाए जाते हैं, जो राजगमार कोयला खानों के 15 किमी उत्तर पूर्व के आसपास स्थित है। कई स्तम्भों में से एक पर एक वैज्ञानिक लेखन पाया जा सकता है। इसके अलावा कुछ मूर्तियां भी हैं|
किले के चारों ओर घने जंगल विभिन्न प्रकार के जंगली जानवरों और पक्षियों के लिए घर है।
11. कुदुरमाल
कुदुरमाल एक छोटा गांव है जो कोरबा जिला मुख्यालय से करीब 15 किमी दूर स्थित है। संत कबीर के शिष्य में से एक का समाधि यहाँ है, जो लगभग 500 वर्ष पुराना है इसलिए यह ऐतिहासिक महत्व रखता है|
इसके अलावा, यहां एक मंदिर है, जिसे संकटमोचन हनुमान मंदिर कहते हैं|जो मंदिर के केंद्र में हनुमान की एक प्रमुख संतमूर्ति स्थापित की गई थी जहा महात्मा केवलाल पटेल ने मंदिर बनाया था मंदिर के चारों ओर में काली, दुर्गा, राम, सीता, कबीर आदि के अन्य छोटे मंदिर हैं। यहाँ हर साल (जनवरी और फरवरी) में माघ पूर्णिमा पर एक मेला होता है।
मंदिर के पास एक चट्टान के नीचे एक गुफा है, जो कि गोलियों के चट्टानों से भी आकर्षित होता है|
12. कनकी
कनकी एक गांव है जो उर्गा के पास हसदो नदी के तट पर स्थित है, जो कोरबा से 20 किमी दूर है।कनकी ऊर्गा से 12 किलोमीटर की दूरी पर है।यह धार्मिक स्थल कंकेश्वर या चक्रेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर प्रसिद्ध है। यह माना जाता है कि कनकी का मंदिर कोरबा के जमींदारों द्वारा 1857 के आस-पास बनाया गया था।
मंदिर पत्थरों में बनाई गई कई खूबसूरत चित्रों से सजा हुआ है। भगवान शिव-पार्वती की असंख्य मूर्तियों की है।
इसके अलावा, देवी दुर्गा का एक और प्राचीन मंदिर है।
13. माँ मड़वारानी मंदिर
माँ मड़वारानी मंदिर पहाड़ की चोटी पर स्थित है | माँ मड़वारानी मंदिर घने पर्वत में फूलों एवं फलदार वृक्षों से अच्छादित हैं और आयुर्वेदिक दृष्टि से महत्वपूर्ण हैं | पहाड़ में पशु पक्षियों जैसे भालू, बंदर आदि को विचरण करते देखा जा सकता है | माँ मड़वारानी मंदिर, पहाड़ ऊपर मुख्यतः चार मार्गों से जाया जा सकता है –
- मुख्य रूप से सबसे ज़्यादा उपयोग किया जाने वाला मार्ग माँ मड़वारानी नीचे स्थित मंदिर से जाता है | यह मार्ग 5 कि.मी. लंबा है तथा वाहन के द्वारा जाया जा सकता है |
- दूसरा मुख्य मार्ग ग्राम बरपाली से होकर जाता है और यह 1 कि.मी. का मार्ग पूर्णतः सीढ़ियों वाला है |
- यह मार्ग ग्राम झींका-महोरा से शुरू होता है और 1 कि.मी. लंबाई का है |
- यह मार्ग ग्राम खरहरी से शुरू होता है और 4 कि.मी. लंबाई का है
14. पाली शिव मंदिर
पाली शिव मंदिर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली में स्थित एक ऐतिहासिक और चमत्कारिक मंदिर है यह 9वीं शताब्दी में बाणवंशी राजा विक्रमादित्य द्वारा बनवाया गया था और बाद में 11वीं-12वीं सदी में कलचुरी राजा जाजल्यदेव प्रथम ने इसका जीर्णोद्धार कराया था
मंदिर की मुख्य विशेषताएं
- स्थापत्य कला: इस अद्भुत पत्थर के मंदिर की नक्काशी और वास्तुकला खजुराहो के मंदिरों से काफी मिलती-जुलती है
- नौ-कोनी तालाब: मंदिर के प्रवेश द्वार के समीप एक बहुत ही सुंदर नौ कोने वाला तालाब है, जो साल भर पानी से भरा रहता है
- धार्मिक महत्व: इसे एक प्रमुख प्राचीन तीर्थ माना जाता है और यहाँ महाशिवरात्रि व अन्य त्योहारों पर भारी भीड़ उमड़ती है
यहाँ आपके घूमने के लिए 14 रोमांटिक जगहों और उनके अनुमानित खर्च की सूची दी गई है
| स्थान (Place) | कोरबा से दूरी | मुख्य आकर्षण | अनुमानित मूल्य/खर्च (Price List) |
|---|---|---|---|
| Satrenga Tourist Spot | ~35 km | हसदेव नदी, वॉटर स्पोर्ट्स और बोटिंग | एंट्री फ्री। बोटिंग का खर्च ₹200-₹500 प्रति व्यक्ति |
| Madwarani Mandir | ~22 km | हाड़ी की चोटी से नज़ारा | निःशुल्क |
| Kosgai Fort | ~25 km | फुटका पहाड़ | बिल्कुल मुफ्त |
| Golden Island | 65 से 70 किलोमीटर | बेहद खूबसूरत और लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट | निःशुल्क |
| Bango Dam | 26 km | हसदेव बांगो बांध हरा-भरा वातावरण | निःशुल्क |
| Hasdeo Bango Dam | ~35 km | हरा-भरा बैकवाटर और सुंदर नज़ारे | निःशुल्क |
| Dev-Pahari | ~58 km | चौराणी नदी और सुंदर झरना | बिल्कुल मुफ्त |
| Chaiturgarh (Lafagarh) | ~70 km | ऐतिहासिक किला और पहाड़ियाँ | एंट्री फ्री फॉरेस्ट पार्किंग फीस (लगभग ₹50) |
| Kendai Waterfall | ~85 km | 75 फीट ऊँचा झरना और पिकनिक स्पॉट | निःशुल्क |
| Sarvamangla Temple | ~5 km | हसदेव नदी के तट पर धार्मिक स्थल | एंट्री फ्री |
| Kudurmal | ~15 km | संत कबीर समाधि और प्राचीन मंदिर | निःशुल्क |
घूमने का सबसे अच्छा समय
अक्टूबर से मार्च का समय सबसे अच्छा माना जाता है। बारिश के बाद झरने और हरियाली अपने पूरे सौंदर्य पर होती है।
यात्रा के दौरान ध्यान रखें
- सुबह जल्दी निकलें।
- बारिश में फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी रखें।
- पानी और हल्का भोजन साथ रखें।
- प्राकृतिक स्थानों पर साफ-सफाई बनाए रखें।
- स्थानीय प्रशासन के निर्देशों का पालन करें।
अधिक पूछे जाने वाले प्रश्न
1. कोरबा छत्तीसगढ़ किस लिए प्रसिद्ध है?
छत्तीसगढ़ का Korba मुख्य रूप से विशाल कोयला खदानों (भारत की सबसे बड़ी खदानों में से एक) और भारी बिजली उत्पादन के लिए जाना जाता है। इसे छत्तीसगढ़ की “ऊर्जाधानी” (Energy Capital) कहा जाता है, जहाँ नेशनल थर्मल पावर कॉर्पोरेशन (NTPC) और बालको (BALCO) जैसे प्रमुख उद्योग स्थित हैं
2. कोरबा के पास 90 किमी के अंदर कपल्स के लिए सबसे अच्छी जगह कौन-सी है?
सतरेंगा, केंदई जलप्रपात और चैतूरगढ़ किला कपल्स के लिए सबसे लोकप्रिय और खूबसूरत जगहों में शामिल हैं।
3. Korba के आसपास कपल्स के लिए वन-डे ट्रिप की सबसे अच्छी जगह कौन-सी है?
सतरेंगा, केंदई जलप्रपात, देवपहारी और चैतूरगढ़ किला एक दिन की रोमांटिक यात्रा के लिए बेहतरीन विकल्प हैं।
4. क्या सतरेंगा कपल्स के घूमने के लिए अच्छा स्थान है?
हाँ, सतरेंगा अपनी शांत झील, बोटिंग, सुंदर सूर्यास्त और प्राकृतिक वातावरण के कारण कपल्स की पसंदीदा जगह है।
5. कोरबा के पास रोमांटिक जगहों पर घूमने का सबसे अच्छा समय कौन-सा है?
अक्टूबर से फरवरी का समय सबसे अच्छा माना जाता है, क्योंकि इस दौरान मौसम सुहावना रहता है।
6. क्या कोरबा के पास कपल्स के लिए खूबसूरत जलप्रपात हैं?
हाँ, केंदई जलप्रपात और देवपहारी जलप्रपात कपल्स और प्रकृति प्रेमियों के लिए बेहतरीन जगहें हैं।
7. क्या चैतूरगढ़ किला एक दिन में घूमकर वापस आया जा सकता है?
हाँ, चैतूरगढ़ किला कोरबा से लगभग 70 किमी दूर है और एक दिन की यात्रा के लिए उपयुक्त है।
8. क्या कोरबा के आसपास की ये रोमांटिक जगहें कपल्स के लिए सुरक्षित हैं?
हाँ, दिन के समय अधिकांश पर्यटन स्थल सुरक्षित हैं। शाम होने से पहले वापस लौटना और स्थानीय नियमों का पालन करना बेहतर रहता है।
9. कोरबा से केंदई जलप्रपात की दूरी कितनी है?
केंदई जलप्रपात कोरबा से लगभग 85 किमी दूर स्थित है और यह आसपास के सबसे खूबसूरत प्राकृतिक पर्यटन स्थलों में से एक है।
10. korba का प्रसिद्ध स्थान क्या है?
कोरबा मुख्य रूप से इसके लिए प्रसिद्ध है सतरंगा , हरे-भरे जंगलों से घिरा एक दर्शनीय पर्यटन स्थल और जलाशय है, और चैतुरगढ़ (जिसे लाफागढ़ भी कहा जाता है), लगभग 70 किलोमीटर दूर स्थित एक प्राचीन, अत्यधिक किलेबंद ऐतिहासिक स्थल है।कोरबा अपने विशाल कोयला क्षेत्रों और विद्युत संयंत्रों के कारण विश्व स्तर पर “छत्तीसगढ़ की विद्युत राजधानी” के रूप में भी प्रसिद्ध है।
निष्कर्ष
कोरबा के आसपास 100 किमी के अंदर कई ऐसे पर्यटन स्थल हैं जो प्राकृतिक सुंदरता, धार्मिक आस्था और एडवेंचर का बेहतरीन अनुभव देते हैं। यदि आप एक दिन या वीकेंड ट्रिप की योजना बना रहे हैं, तो सतरेंगा, गोल्डन आइलैंड, केंदई जलप्रपात और चैतुरगढ़ किला आपकी सूची में जरूर होने चाहिए।
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