सक्ती छत्तीसगढ़ का नवगठित जिला है. इसे हाल ही में जांजगीर-चांपा से अलग कर नया जिला घोषित किया गया था. कभी प्रदेश की 14 रियासतों में से एक सक्ती क्षेत्र में एक अलग तरह की ही शक्ति है क्योंकि यह क्षेत्र कृषि, प्राकृतिक संसाधन, खनिज संपदा समेत धार्मिक स्थलों से भी समृद्ध है. यहां की भूमि उर्वरा शक्ति से भरपूर है इसलिए इसे सक्ती के नाम से जाना जाता है. इस क्षेत्र का इतिहास इतना पुराना है कि इसका उल्लेख महाभारत काल में भी मिलता है. सक्ती जिले में डोलोमाइट का प्रचुर भंडार है, जिसकी वजह से इसे भारत का ‘डोलोमाइट हब’ भी कहा जाता है.
इतिहास
सक्ती जिले का इतिहास बहुत प्राचीन है। महाभारत काल में इस स्थान का उल्लेख ऋषभ तीर्थ के रूप में मिलता है। सक्ती रेलवे स्टेशन से लगभग 14 मील की दूरी पर गुंजी नामक गांव में प्राचीन शिलालेख पाए गए हैं, जो पाली भाषा में लिखे गए हैं। ये संभवत पहली शताब्दी के हैं। मान्यता है कि यहां की भूमि शक्ति से भरपूर है इसलिए इसे ‘सक्ती’ के नाम से जाना गया।यह भी बताया जाता है कि यह क्षेत्र पहले संबलपुर शाही परिवार के अधीन था। दशहरे के दिन गोंड राजाओं ने भैंसों को लकड़ी की तलवार से मारकर अपनी शक्ति का प्रदर्शन किया था। उनके प्रदर्शन से प्रसन्न होकर संबलपुर के राजा ने सक्ती को एक स्वतंत्र रियासत का दर्जा दिया। तब से यहां गोंड राजाओं का शासन चलता था। मध्य भारत में यह सबसे छोटी रियासत हुआ करती थी।
सक्ती राज्य का इतिहास
- सक्ती राज्य छत्तीसगढ़ के जांजगीर-चांपा जिले में स्थित एक रियासत थी।
- इसकी स्थापना दो जुड़वां भाइयों ने की थी, जो संबलपुर के राजा के सैनिक थे।
- अंतिम शासक राणा बहादुर लीलाधर सिंह थे।
- सक्ती को अब एक जिले के रूप में जाना जाता है, जिसकी स्थापना 2021 में हुई थी और 2022 में इसका उद्घाटन किया गया था।
Also read – आगरा के इतिहास History of Agra
सक्ती जिले इतिहास कृषि
सक्ती जिले में मुख्य रूप से धान की फसल ली जाती है। इसके अलावा यहां गेहूं,रागी, कोदो-कुटकी, चना, अरहर, मूंग, आदि की भी खेती की जाती है।इस भली प्रकार सिंचित जिले में बागवानी फसलों के साथ-साथ मसालों की खेती भी खूब होती है।कृषि भारत की अर्थव्यवस्था और संस्कृति की आत्मा है। यह लाखों परिवारों का भरण-पोषण करती है और राष्ट्र की पहचान को आकार देती है। पिछले ग्यारह वर्षों में, भारत कृषि में आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा है, आयात पर निर्भरता कम कर रहा है, घरेलू उत्पादन बढ़ा रहा है और मूल्य श्रृंखला में क्षमता का निर्माण कर रहा है।सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि किसानों के प्रति दृष्टिकोण बदल गया है। अब उन्हें राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भागीदार और भारत के विकास के वाहक के रूप में देखा जाता है। जैसे-जैसे देश अमृत काल में प्रवेश कर रहा है, सशक्त किसान भारत को खाद्य सुरक्षा के मामले में आत्मनिर्भरता और खाद्य उत्पादन में वैश्विक नेतृत्व की ओर ले जाने के लिए तैयार हैं।

सक्ती जिले इतिहास कृषि
सक्ती जिले अर्थव्यवस्था
इतिहास जिले में डोलोमाइट का प्रचुर भंडार है। इसे देश का‘डोलमाइट हब’ माना जाता है। यहां उत्पादित डोलोमाइट का उपयोग भिलाई, राउरकेला और दुर्गापुर के साथ-साथ देश के विभिन्न हिस्सों में स्थापित स्टील प्लांट्स में किया जाता है।यहाँ ट्रक के टिपर, ट्रेलर, फ्लैटबेड ट्रेलर, बॉक्स टाइप ट्रेलर, ट्रैक्टर ट्रॉली और कृषि उपकरणों का निर्माण किया जाता है। जिला कोसा के वस्त्रों के लिए भी जाना जाता है। यहां चावल मिल और दो बिजली संयंत्र है।
प्रमुख शिक्षण संस्थान
प्रमुख काॅलेज
- जेएलएन कॉलेज
- शासकीय क्रांति कुमार भारतीय महाविद्यालय
- शासकीय अटल बिहारी वाजपेयी महाविद्यालय
- श्याम शिक्षा महाविद्यालय
- श्री बालाजी कॉलेज ऑफ फार्मास्युटिकल साइंसेज
- जगरानी देवी डिग्री कॉलेज
- शासकीय आईटीआई
- जगरानी देवी आईटीआई आदि
प्रमुख स्कूल
- जिंदल वर्ल्ड स्कूल
- सरस्वती शिशु मंदिर
- शासकीय हाई स्कूल
- एमएल जैन हायर सेकंडरी स्कूल
- गवर्नमेंट गर्ल्स स्कूल
- संस्कार पब्लिक स्कूल
- अनुनय कान्वेंट स्कूल आदि
Also read – राजस्थान के रहस्यमय इतिहास Mysterious history of Rajasthan
सक्ती जिले प्रमुख पर्यटन स्थल
1.अड़भार
अड़भार सक्ती जिले का प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक पर्यटन स्थल है। अपने आठ विशाल द्वारों के कारण इसे नाम मिला अष्टद्वार, जिसका अपभ्रंश होते हुए इसे अड़भार कहा जाने लगा। यहां स्थित दुर्गा देवी मंदिर को महान शक्तिपीठों में से एक माना जाता है, जिसमें देवी की ग्रेनाइट निर्मित अष्टभुजी दुर्लभ आदमकद मूर्ति है। दक्षिणामुखी यह मूर्ति काफी अच्छी स्थिति में है। यहाँ नवरात्रि में ज्योति कलश स्थापित किए जाते हैं।अष्टभुजी माता का मंदिर और इस नगर के चारों ओर बने आठ विशाल दरवाजों की वजह से इसका प्राचीन नाम अष्टद्वार पड़ा और धीरे धीरे अपभ्रंश होकर इसका नाम अड़भार हो गया। मंदिर में मां अष्टभुजी की ग्रेनाइट पत्थर की आदमकद मूर्ति इमली के पेड़ के नीचे विराजित है। आठ भुजाओं वाली मां दक्षिणमुखी भी है। सम्पूर्ण भारत में कलकत्ता की दक्षिणमुखी काली माता और अड़भार की दक्षिणमुखी अष्टभुजी देवी के अलावा और कहीं की भी देवी दक्षिणमुखी नहीं है।

2.कन्हैया महल
कन्हैया महल शक्ति जिले का एक प्रमुख ऐतिहासिक स्थल है। यह महल छत्तीसगढ़ के पुराने किलों में से एक है, और यहां की वास्तुकला दर्शनीय है। कन्हैया महल में पर्यटकों को पुराने समय की परंपराओं और संस्कृति का एहसास होता है। Tourist Places in Sakti Chhattisgarh में कन्हैया महल एक महत्वपूर्ण स्थल है, जहाँ इतिहास प्रेमी और संस्कृति में रुचि रखने वाले लोग आते हैं।
3.बम्लेश्वर मंदिर
बम्लेश्वर मंदिर शक्ति जिले का एक प्रमुख धार्मिक स्थल है, जो भगवान शिव को समर्पित है। यह मंदिर अपने अद्भुत वास्तुकला और भव्यता के लिए प्रसिद्ध है। Tourist Places in Sakti Chhattisgarh में बम्लेश्वर मंदिर एक प्रमुख स्थल है, जो भक्तों के लिए आस्था का केंद्र है और यहां की शांतिपूर्ण वातावरण में पूजा अर्चना करने का अनुभव अद्भुत होता है।

बम्लेश्वर मंदिर
4.शक्ति किला
शक्ति किला इस जिले का ऐतिहासिक किला है, जो एक समय में शक्तिशाली राज्य का हिस्सा था। किले के आसपास का वातावरण और प्राचीन दीवारें पर्यटकों को उस समय की याद दिलाती हैं। Tourist Places in Sakti Chhattisgarh में शक्ति किला एक महत्वपूर्ण स्थल है, जो ऐतिहासिक प्रेमियों के लिए एक आदर्श जगह है। यहां की दीवारों और किले की संरचना पर्यटकों को बहुत आकर्षित करती है।
5.कन्हैया झरना
कन्हैया झरना शक्ति जिले का एक प्राकृतिक जलप्रपात है, जो अपनी सुंदरता और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। यह जलप्रपात जंगलों से घिरा हुआ है, और यहां के दृश्य पर्यटकों को मंत्रमुग्ध कर देते हैं। Tourist Places in Sakti Chhattisgarh में कन्हैया झरना एक प्रमुख स्थल है, जहाँ आप प्राकृतिक सौंदर्य का अनुभव कर सकते हैं और जलप्रपात के नजदीक समय बिता सकते हैं।
6.चंद्रहासिनी मंदिर
मांड नदी,लात नदी और महानदी के संगम पर स्थित है चन्द्रपुर। यहाँ माँ चंद्रहासिनी देवी का प्रसिद्ध मंदिर है। देवी का मुख चंद्रमा की आकृति में होने के कारण इनकी प्रसिद्धि चंद्रहासिनी देवी के रूप में हुई। यहाँ पौराणिक व धार्मिक कथाओं की झांकियां जैसे समुद्र मंथन, महाभारत की द्यूत क्रीड़ा आदि आगंतुकों को आकर्षित करती हैं।

7.दमउदरहा जलप्रपात
सक्ती से कोरबा जाने के रास्ते में पड़ता है दमउदरहा जलप्रपात। यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं। यहां जल प्रपात के अलावा गुफाएं, रामजानकी मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, ऋषभ देव मंदिर इत्यादि हैं।यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं यहॉ एक ओर प्राकृतिक पानी का जल प्रपात, गुफाएॅ रामजानकी मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, ऋषभ देव मंदिर इत्यादि है। इसके पास ही अन्य पर्यटन स्थलों पंचवटी, सीतामणी आदि आकर्षित करने वाले पर्यटन स्थल है
Also read – जांजगीर-चांपा में घूमने योग्य स्थान best Places to visit in Janjgir champa
8.रेनखोल
जिले से 24 किमी दूर चारों ओर पहाड़ों से घिरा गांव है रेनखोल। पहाड़ों के बीच तलहटी में स्थित होने से यह एक कटोरे की तरह दिखाई देता है। चौतरफा हरियाली से युक्त इस पर्यटन स्थल में सूर्योदय आधा घंटा देर से नजर आता है वहीं सूर्यास्त जल्दी होता है। प्राकृतिक सुषमा के बीच सुकून की तलाश में बहुत से पर्यटक यहां आते हैं।कल्पना कीजिए एक ऐसी जगह की, जहाँ सुबह की पहली किरण पहाड़ियों पर गिरते झरने की बूंदों से टकरा कर इंद्रधनुष रचती है, और हरियाली इतनी घनी होती है कि सूरज की किरणें भी रुककर चलती हैं। जहाँ गर्मियों में भी ठंडी हवा आपकी आत्मा को छू जाती है, और बारिश की हर बूँद संगीत बनकर ज़मीन से टकराती है। यह कोई फिल्मी सेट नहीं, बल्कि हकीकत है।।छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले की गोद में बसा छोटा-सा गाँव रैनखोल। यह गाँव न सिर्फ अपने शांत वातावरण के लिए जाना जाता है, बल्कि इसके एकमात्र मगर बेहद मनोहारी झरने के लिए भी, जो इस स्थान की आत्मा है। रायगढ़ से 85 किलोमीटर और सक्ती से मात्र 15 किलोमीटर दूर स्थित यह गाँव, एक ऐसा दृश्य रचता है जो किसी भव्य बॉलीवुड फिल्म की लोकेशन से कम नहीं लगता।

- कल्चुरी राजवंश: मध्यकाल में छत्तीसगढ़ के बड़े हिस्से पर कलचुरी शासकों (9वीं-18वीं शताब्दी) का प्रभाव था, जिन्होंने रतनपुर और रायगढ़ क्षेत्रों को शक्तिशाली बनाया, जिसमें सक्ती क्षेत्र भी शामिल था।
- रियासत काल: सक्ती ऐतिहासिक रूप से एक रियासत (Princely State) थी, जो ब्रिटिश काल में भी बनी रही और बाद में स्वतंत्र भारत का हिस्सा बनी.
आधुनिक सक्ती का विकास
- छत्तीसगढ़ राज्य का गठन: छत्तीसगढ़ के 2000 में मध्य प्रदेश से अलग होकर नया राज्य बनने के बाद, सक्ती को जांजगीर-चांपा जिले का हिस्सा माना जाता था।
- जिला सक्ती का निर्माण (2022): 15 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री द्वारा सक्ती को नए जिले के रूप में घोषित किया गया और 9 सितंबर 2022 को इसका उद्घाटन हुआ, जिससे यह छत्तीसगढ़ का 33वां जिला बना।
भौगोलिक और आर्थिक महत्व
- नदियाँ: महानदी, सोन और बोरई जैसी नदियाँ इस क्षेत्र से होकर बहती हैं, जो कृषि और जीवन के लिए महत्वपूर्ण हैं।
- खनिज: सक्ती को ‘भारत का डोलोमाइट हब’ कहा जाता है क्योंकि यहाँ डोलोमाइट के बड़े भंडार हैं।
- उद्योग: यह कृषि उपकरणों के निर्माण के लिए भी जाना जाता है और छत्तीसगढ़ के विकास में योगदान देता है।
सक्ती जिले कैसे पहुँचे
प्लेन से
निकटवर्ती प्रमुख हवाई अड्डा विवेकानंद हवाई अड्डा रायपुर है। यहाँ से बस या कैब से सक्ती पहुंचा जा सकता है।
ट्रेन से
सक्ती बॉम्बे-हावड़ा मुख्य रेल लाइन पर स्थित है। सक्ती में रेलवे स्टेशन है। जांजगीर-चांपा स्टेशन नजदीकी अन्य स्टेशन है। रायपुर निकटवर्ती बड़ा स्टेशन है।
सड़क मार्ग से
NH 200 ज़िले से होकर गुजरता है। जिला राजकीय राजमार्ग से निकटवर्ती शहरों से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
Ask question
1.शक्ति रियासत का इतिहास क्या है?
आज यह छत्तीसगढ़ राज्य में स्थित है। इसका क्षेत्रफल 357 वर्ग किलोमीटर था और 1892 में इसकी जनसंख्या 22,819 थी। इसके शासक राजगोंड थे और उन्हें 29,000 रुपये का निजी कोष प्राप्त था। यह रियासत 1 जनवरी 1948 को भारतीय संघ में विलय हो गई और इस प्रकार इसका अस्तित्व समाप्त हो गया।
2.सक्ती जिला कब बनाया गया था?
सक्ती छत्तीसगढ़ का 33वां जिला है, जिसका उद्घाटन 9 सितंबर 2022 को हुआ था। जांजगीर-चांपा से अलग होकर बना यह जिला महानदी घाटी में स्थित है, जो कृषि और डोलमाइट (Dolomite) के लिए प्रसिद्ध है। सक्ती शहर इस नए जिले का प्रशासनिक मुख्यालय है, जो नेशनल हाईवे-49 पर स्थित है
3.शक्ति छत्तीसगढ़ किसके लिए प्रसिद्ध है?शक्ति को भारत का डोलोमाइट केंद्र माना जाता है।
शक्ति जिले में भारत का सबसे बड़ा डोलोमाइट भंडार क्षेत्र खोजा गया है, जहां आने वाले समय में खनन शुरू होगा। यहां का रेशमी कपड़ा छत्तीसगढ़ भर में प्रसिद्ध है।