सावन के महीने में कोरबा में घूमने लायक बेहतरीन पर्यटन स्थल 2026

सावन का महीना प्रकृति प्रेमियों और धार्मिक यात्राओं के लिए सबसे खास समय माना जाता है। छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता, घने जंगलों, जलप्रपातों, पहाड़ियों और धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्ध है। बारिश के मौसम में यहां की हरियाली और भी अधिक आकर्षक हो जाती है। यदि आप 2026 में के दौरान कोरबा घूमने की योजना बना रहे हैं तो यह लेख आपके लिए एक संपूर्ण यात्रा गाइड साबित होगा।

सावन में कोरबा क्यों घूमना चाहिए?

1. प्राकृतिक सौंदर्य अपने चरम पर
बारिश के कारण कोरबा के जंगल और पहाड़ियां हरे रंग से भर जाती हैं। झरनों में पानी का प्रवाह बढ़ जाता है और हर तरफ ताजगी महसूस होती है।

2. धार्मिक माहौल
सावन भगवान शिव का प्रिय महीना माना जाता है। इस दौरान कोरबा के मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना, भजन-कीर्तन और धार्मिक आयोजन होते हैं।

3. फोटोग्राफी के लिए शानदार अवसर
यदि आप प्रकृति की तस्वीरें लेना पसंद करते हैं तो सावन का कोरबा आपको निराश नहीं करेगा। बादलों से ढके पहाड़, झरने और हरियाली कैमरे में कैद करने योग्य दृश्य प्रस्तुत करते हैं।

1. ऐतिहासिक और सबसे प्रसिद्ध शिव मंदिर कोरबा

पाली का प्राचीन शिव मंदिर

यह मंदिर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले के पाली उप-जिला में कोरबा शहर से 50 किलोमीटर दूर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि बन्ना वंश के शासक राजा विक्रमादित्य ने लगभग 870 ईसा पूर्व पाली में इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण कराया था, जो आज भी एक बड़े तालाब के किनारे स्थित है। यहां कई अन्य अवशेष भी देखे जा सकते हैं।

11वीं और 12वीं शताब्दी में कलचुरी के राजा जाजवाल्यदेव प्रथम ने इसका जीर्णोद्धार कराया था। उनका नाम मंदिर पर अंकित है। सावन माह में यहां एक भव्य मेला लगता है। गांव के लोगों ने बताया कि

सावन माह में हजारों श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन के लिए यहां आते हैं। इसके साथ ही दूर-दूर से कांवड़िया भी भगवान शिव को जल अर्पित करने के लिए यहां पहुंचते हैं।

हर साल सावन माह में यहां मेला आयोजित किया जाता है।

लोकेशन: पाली गांव, बिलासपुर-कोरबा रोड (कोरबा जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी).

पाली के शिव मंदिर कैसे पहुंचें : बिलासपुर बस स्टैंड से करीब 55 km. एवं कोरबा बस स्टैंड से करीब 50 km. की दूरी पर स्थित है अतः यहां आप अपने किसी भी साधन मोटर साइकिल, या चार पहिया वाहनों के सहारे आसानी से आ सकते है।

कनकी

कनकी एक गांव है जो उरगा के पास हसदो नदी के तट पर स्थित है, जो कोरबा से 20 किमी दूर है।कनकी ऊर्गा से 12 किलोमीटर की दूरी पर है।यह धार्मिक स्थल कंकेश्वर या कक्रेश्वर महादेव मंदिर के नाम पर प्रसिद्ध है। यह माना जाता है कि कनकी का मंदिर कोरबा के जमींदारों द्वारा 1857 के आस-पास बनाया गया था।

मंदिर पत्थरों में बनाई गई कई खूबसूरत चित्रों से सजा हुआ है। भगवान शिव-पार्वती की असंख्य मूर्तियों की है।

इसके अलावा, देवी दुर्गा का एक और प्राचीन मंदिर है।

यह गांव घने जंगल से घिरा हुआ है और कई तालाबों की संख्या वहां पाया जा सकता है।इस क्षेत्र प्रवासी पक्षियों के द्वारा प्रवासी समय के दौरान देखा जाता है ।

लोकेशन: ग्राम कनकी, हसदेव नदी के किनारे, उरगा से 12 किमी (कोरबा शहर से करीब 20 किमी).

कैसे पहुंचें – कोरबा रेलवे स्टेशन से 15 किमी की दुरी पर स्थित है ||

श्री सप्तदेव मंदिर (महादेव मंदिर परिसर)

देशभर के श्रद्धालु द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों की यात्रा पर निकलते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां भक्तों को एक ही स्थान पर सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है. कोरबा मुख्य मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध सप्तदेव मंदिर न केवल कोरबा बल्कि आसपास के जिलों के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है.

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इस मंदिर की सबसे विशेष और आकर्षक बात यह है कि यहां सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर,

इन 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का प्रतिष्ठापन किया गया है. यहां उन सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है, जो विभिन्न कारणों से दूरदराज के इन तीर्थस्थलों की यात्रा नहीं कर पाते

यहां आकर श्रद्धालु एक ही छत के नीचे सभी ज्योतिर्लिंगों के साक्षात दर्शन करके स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं.

सप्तदेव मंदिर

सप्तदेव मंदिर में नियमित रूप से प्रातः और सायंकाल पूजा-अर्चना, आरती और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होता है. महाशिवरात्रि के पावन दिन यहां का नजारा ही कुछ और होता है. आज (रविवार) तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है

  • लोकेशन: ओल्ड बस स्टैंड रोड, पुरानी बस्ती, कोरबा (495677)

कैसे पहुंचें – बरपाली से सप्तदेव मंदिर की दुरी 18 किलोमीटर होगा


तुमान शिव मंदिर (SHIV TEMPLE TUMAN)

शिव मंदिर तुमान का इतिहास

प्राचीन इतिहास में कहा जाता है, कि तुमान है वंश के राजाओं की राजधानी हुआ करती थी, जिस समय यहां एक शिव मंदिर मिला जो माना जाता है कि इस प्राचीन शिव मंदिर का निर्माण कल्चुरीयों के राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा 11 A.D. आसपास करवाई गयी थी

 इस मंदिर के आसपास कई और मंदिर पाये गये थे जिनकी संख्या संख्या लगभग 20 हैं, लेकिन सभी मंदिर ध्वस्त हो चुके है पुरातत्व हैं केवल एक ही मंदिर बचा हुआ हैं, 

तुमान काटघोरा से 10 किमी दूर स्थित एक छोटा गांव है, जो उत्तर-पश्चिम दिशा में जिला मुख्यालय कोरबा से 30 किमी दूर है।

प्राचीन इतिहास में कहा गया है कि तुमान हाईया वंश के राजाओं की राजधानी थी। एक प्राचीन शिव मंदिर यहां पाया जाता है। यह माना जाता है कि यह मंदिर राजा रत्नदेव प्रथम द्वारा कालचुरी (11 ई सा .) के शासनकाल के दौरान बनाया गया था।

इस शिव मंदिर के अलावा, कुछ अन्य अवशेष यहां भी पाए जाते हैं।

लोकेशन: ग्राम तुमान, करतला तहसील, कटघोरा मार्ग से अंदर (कोरबा से लगभग 26-30 किमी).

कैसे पहुंचें – कोरबा बस स्टैंड से 35 किमी की दुरी पर स्थित है |

2. कोरबा मुख्य शहर के शिव मंदिर

सार्वजनिक श्री काशी विश्वनाथ शिव मंदिर छत्तीसगढ़ के कोरबा शहर में काशी नगर के बोल बम चौक, ज्ञान अंजलि विद्या मंदिर के पास स्थित है। यह स्थानीय क्षेत्र में भगवान शिव को समर्पित एक प्रमुख और श्रद्धा का केंद्र है।

  • स्थान: 9P7C+8VG, बोल बम चौक, काशी नगर, कोरबा, छत्तीसगढ़ 495677
  • मुख्य आकर्षण: सावन माह और महाशिवरात्रि पर यहाँ विशेष पूजा-अर्चना और भक्तों की भारी भीड़ देखने को मिलती है।
  • समय: मंदिर आमतौर पर सुबह से शाम तक दर्शन के लिए खुला रहता है।
  • लोकेशन: बोल बम चौक, काशीनगर रोड, ज्ञान अंजली विद्या मंदिर के पास, काशी नगर, कोरबा (495677).

श्री श्री 108 महामृत्युंजय मंदिर

श्री श्री 108 महामृत्युंजय मंदिर छत्तीसगढ़ के कोरबा में नगर निगम आवासीय परिसर में स्थित एक प्रमुख धार्मिक स्थल है। यह मंदिर भगवान शिव के महामृत्युंजय रूप को समर्पित है, जहाँ भक्त विशेष पूजा-अर्चना और अनुष्ठान के लिए आते हैं।

कोरबा में मुख्य रूप से महामृत्युंजय जाप और रुद्राभिषेक जैसे अनुष्ठान स्थानीय पंडितों के मार्गदर्शन में संपन्न होते हैं।

लोकेशन: MIG-II/24, साडा (SADA) कॉलोनी, नगर निगम आवासीय परिसर, एम.पी. नगर, निहारika, कोरबा

श्री कपिलेश्वर नाथ महादेव मंदिर

छत्तीसगढ़ के बालोद शहर के नयापारा वार्ड में कपिलेश्वर मंदिर समूह है। इस मंदिर समूह में भगवान शिव, देवी दुर्गा, भगवान गणेश, भगवान कृष्ण, देवी संतोषी और राम जानकी को समर्पित छः मंदिर है। कपिलेश्वर मंदिर समूह बालोद छत्तीसगढ़ – 13 वी -14 वी सदी में नागवंशी शासन काल में निर्मित है। इन मंदिरों का निर्माण पीड़ा देवल शैली में हुआ है।

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भगवान शंकर को समर्पित कपिलेश्वर मंदिर इनमें बसे बड़ा मंदिर है, जिसके वजह से इन मंदिरो के समूह को कपिलेश्वर मंदिर समूह कहा जाता है। यह पूर्वाभिमुख मंदिर है। मंदिर के दोनों तरफ भगवान गणेश की 6 फीट की प्रतिमायें स्थापित है। मंदिर के द्वारशाखा के दायें और बायें तरफ गंगा यमुना और द्वारपाल की प्रतिमायें स्थापित है। 

दुसरा मंदिर भगवान गणेश को समर्पित है। इस मंदिर के गर्भगृह में भगवान गणेश की 6 फीट की प्रतिमा स्थापित है। मंदिर का शिखर पीड़ा देवल प्रकार में निर्मित है। छत्तीसगढ़ में भगवान गणेश की अनेकों प्रतिमायें मिलती है किन्तु अधिकांश प्रतिमायें खुले में या किसी मंदिर के मंडप में स्थापित प्राप्त होती है किन्तु ऐसे मंदिर बेहद की कम प्राप्त होते है। 

  • लोकेशन: जंगल कॉलोनी, राम नगर, रवि शंकर नगर, कोरबा (495677).

सुभाष नगर शिव मंदिर

कोरबा जिले में हसदेव नदी के किनारे स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर दो भागों में बना है. रानी महल के ठीक पीछे, एक ही परिसर में दो छोटे-छोटे मंदिर हैं. एक में पांच मुख वाले शिवलिंग स्थापित हैं, तो दूसरे में जलाधारी शिव विराजमान हैं.महाशिवरात्रि के पावन अवसर पर हर शिवभक्त अपने आराध्य देव महादेव की आराधना में लीन हो जाते हैं. आपने कई प्रसिद्ध और अद्वितीय शिवालयों के बारे में सुना होगा

लोकेशन: SECL मेन रोड, सुभाष नगर, कोरबा (495677).

चेक पोस्ट शिव मंदिर

चेक पोस्ट शिव मंदिर कोरबा के प्रमुख और आस्था से जुड़े हुए मंदिरों में से एक है। यह मंदिर शहर के मुख्य चेक पोस्ट क्षेत्र (सेक्टर एरिया) के पास स्थित है।

इस मंदिर के मुख्य आकर्षण:

  • स्थान: यह कोरबा के सुगम और व्यस्त इलाकों में से एक चेक पोस्ट में स्थित है।
  • दर्शन का समय: मंदिर सुबह जल्दी से लेकर देर रात तक भक्तों के दर्शन के लिए खुला रहता है।

लोकेशन: चेक पोस्ट एरिया (9PMG+33G), कोरबा (495684).

3.कोरबा के प्रसिद्ध शिव मंदिर: आस्था और आध्यात्म का संगम

कोरबा जिले में भगवान शिव के कई प्रसिद्ध मंदिर स्थित हैं, जहाँ वर्षभर श्रद्धालुओं का आना-जाना लगा रहता है। विशेष रूप से सावन माह और महाशिवरात्रि के दौरान इन मंदिरों में भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। इनमें एनटीपीसी टाउनशिप शिव मंदिर, शिव दुर्गा मंदिर (एचटीपीएस), शिव मंदिर देवरी और श्री भाऊ शिव मंदिर प्रमुख हैं।

एनटीपीसी टाउनशिप शिव मंदिर

एनटीपीसी टाउनशिप स्थित यह शिव मंदिर अपनी शांत और स्वच्छ वातावरण के लिए प्रसिद्ध है। मंदिर परिसर हरियाली से घिरा हुआ है, जिससे यहाँ आने वाले श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक शांति का अनुभव होता है। सावन के दौरान विशेष पूजा-अर्चना और रुद्राभिषेक का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ दूर-दराज से आने वाले भक्त भी यहाँ दर्शन के लिए पहुंचते हैं।

  • लोकेशन: NTPC टाउनशिप परिसर, जमनीपाली, कोरबा (495450).

शिव दुर्गा मंदिर (HTPS)

हसदेव ताप विद्युत गृह (HTPS) परिसर के निकट स्थित शिव दुर्गा मंदिर धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केंद्र है। मंदिर में भगवान शिव के साथ माता दुर्गा की भी भव्य प्रतिमा स्थापित है। नवरात्रि और महाशिवरात्रि के अवसर पर यहाँ विशेष कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। मंदिर का शांत वातावरण ध्यान और पूजा के लिए उपयुक्त माना जाता है।

  • लोकेशन: एचटीपीएस टाउनशिप (HTPS Township), दर्री, कोरबा (495450).

शिव मंदिर देवरी

देवरी क्षेत्र में स्थित यह प्राचीन शिव मंदिर स्थानीय श्रद्धालुओं के बीच विशेष महत्व रखता है। मान्यता है कि यहाँ सच्चे मन से की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं। सावन के प्रत्येक सोमवार को बड़ी संख्या में भक्त जलाभिषेक करने आते हैं। मंदिर के आसपास का प्राकृतिक वातावरण इसकी सुंदरता को और बढ़ाता है।

  • लोकेशन: ग्राम देवरी, मोंगरा क्षेत्र, दीपिका/कटघोरा रोड के पास.
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श्री भाऊ शिव मंदिर

श्री भाऊ शिव मंदिर कोरबा के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक माना जाता है। यह मंदिर अपनी भव्य शिवलिंग और धार्मिक आयोजनों के लिए प्रसिद्ध है। महाशिवरात्रि, श्रावण मास और अन्य पर्वों पर यहाँ विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर में आने वाले श्रद्धालु आध्यात्मिक ऊर्जा और मन की शांति का अनुभव करते हैं।

  • लोकेशन: मैगजीन रोड, बांकी मोंगरा, जंगल साइड, कोरबा (495447).

सावन में कोरबा यात्रा के लिए जरूरी टिप्स
  • रेनकोट या छाता साथ रखें।
  • फिसलन वाले स्थानों पर सावधानी बरतें।
  • ट्रेकिंग के लिए अच्छे जूते पहनें।
  • मोबाइल और कैमरे को वाटरप्रूफ कवर में रखें।
  • स्थानीय प्रशासन द्वारा जारी सुरक्षा निर्देशों का पालन करें।
  • झरनों और नदी किनारों पर अनावश्यक जोखिम न लें।
मेरा यात्रा अनुभव

सावन के दौरान कोरबा की यात्रा एक यादगार अनुभव हो सकती है। जब बादलों से ढकी पहाड़ियां, हरियाली से भरपूर जंगल और झरनों का मधुर स्वर एक साथ दिखाई देता है, तो ऐसा लगता है मानो प्रकृति ने अपनी पूरी सुंदरता यहां बिखेर दी हो। सतरंगा का शांत जलाशय, केंदई और देवपहरी के झरने तथा सर्वमंगला मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण यात्रियों को एक अलग ही दुनिया में ले जाता है।
यदि आप 2026 में मानसून या सावन के दौरान छत्तीसगढ़ में किसी खूबसूरत और अपेक्षाकृत कम भीड़भाड़ वाले पर्यटन स्थल की तलाश कर रहे हैं, तो कोरबा निश्चित रूप से आपकी सूची में होना चाहिए।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)

1. सावन में कोरबा घूमने का सबसे अच्छा स्थान कौन सा है?

केंदई जलप्रपात, सतरंगा और चैतुरगढ़ सबसे लोकप्रिय स्थानों में शामिल हैं।

2. क्या सावन में कोरबा घूमना सुरक्षित है?

हाँ, लेकिन बारिश के दौरान झरनों और पहाड़ी क्षेत्रों में सावधानी बरतनी चाहिए।

3. कोरबा घूमने के लिए कितने दिन पर्याप्त हैं?

2 से 3 दिनों में प्रमुख पर्यटन स्थलों का भ्रमण किया जा सकता है।

4. क्या सतरंगा में बोटिंग की सुविधा उपलब्ध है?

पर्यटन सीजन और स्थानीय व्यवस्था के अनुसार बोटिंग की सुविधा उपलब्ध हो सकती है।

5. परिवार के साथ घूमने के लिए कौन सा स्थान बेहतर है?

सतरंगा, सर्वमंगला मंदिर और हसदेव बांगो बांध परिवार के साथ घूमने के लिए अच्छे विकल्प हैं।

निष्कर्ष

सावन के महीने में कोरबा प्रकृति, रोमांच और आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत करता है। झरनों की गूंज, हरियाली से भरे जंगल, शांत जलाशय और प्राचीन मंदिर इस जिले को मानसून पर्यटन के लिए खास बनाते हैं। यदि आप 2026 में एक यादगार मानसून ट्रिप की योजना बना रहे हैं, तो कोरबा के ये पर्यटन स्थल आपकी यात्रा को अविस्मरणीय बना सकते हैं

Anju Ratre