Naila Durga Pandal 2026 Janjgir-Champa, Chhattisgarh

नैला जांजगीर छत्तीसगढ़ राज्य के जांजगीर चंपा जिले का एक प्रमुख नगर पालिका नगर है। नैला और जांजगीर मूल रूप से दो अलग-अलग शहर हैं वैसे तो पूरे देश में नवरात्रि पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है, लेकिन इस बार छत्तीसगढ़ के जांजगीर नैला में श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. यहां बना दुर्गा पंडाल न सिर्फ श्रद्धा का केंद्र है, बल्कि अपनी भव्यता के कारण लोगों को आकर्षित भी कर रहा है.

जांजगीर के नैला में इस बार दुर्गा उत्सव भव्य तरीके से मनाया जा रहा है. अमेरिका के स्वामीनारायण अक्षर धाम मंदिर की तर्ज पर पंडाल बनाई गई है. पंडाल जहां 140 फीट ऊंचा है, वहीं 35 फीट की दुर्गा प्रतिमा विराजित की गई है. सजावट के साथ लाइटिंग के लिए भी विशेष तैयारी की गई है. आज नवरात्रि पर्व के पांचवे दिन पंडाल को देखने तथा माता का दर्शन करने दूर दूर से लोग पहुंच।

जांजगीर चंपा का दुर्गा पंडाल – छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले में इस साल धूमधाम से दुर्गा उत्सव मनाया जा रहा है. नैला दुर्गा उत्सव समिति ने दुर्गा पंडाल को दिल्ली के अक्षरधाम मंदिर की तरह तैयार किया है. दुर्गा पंडाल की ऊंचाई 110 फीट रखी गई है. नैला दुर्गा पंडाल को छत्तीसगढ़ में सबसे ऊंचा बताया जा रहा है.

मुख्य आकर्षण का केंद्र दुर्गा मां के लिए बनाए गए स्वर्ण कमल और चांदी की छत्र है. माता की 35 फीट ऊंची प्रतिमा मिट्टी से तैयार की गई है. दुर्गा मां की प्रतिमा हीरे मोती और रत्नों से जड़ित होगी. नैला दुर्गा उत्सव समिति ने करीब 2 करोड़ रुपए खर्च कर भव्य तैयारी की है. आपको बता दें कि कोरोना महामारी के कारण पिछले दो वर्षों से दुर्गा उत्सव फीका था.

4 किलो सोने से तैयार स्वर्ण कमल और चांदी की छत्र

कोरोना के मामलों में आई गिरावट के बाद प्रशासन ने पाबंदी हटा ली है.1981 से चली आ रही परंपरा को यादगार बनाने के लिए दुर्गा उत्सव समिति ने विशाल पंडाल तैयार किया है. हर साल पंचमी को दुर्गा मां विराजमान होती है लेकिन इस बार तृत्या पर दुर्गा मां नैला आ रही है.

दुर्गा उत्सव समिति के अध्यक्ष राजेश पालीवाल ने बताया कि 4 किलो सोने से तैयार स्वर्ण कमल पर माता विराजमान होंगी. इसके अलावा सिर पर बनाई गई चांदी की छत्र का व्यास करीब 20 फीट और 40 फीट व्यास वाला कमल फूल बनाया गया है.

आयोजन समिति ने बताया खास ?

दुर्गा पूजा को लेकर आयोजन समिति ने प्रत्येक दिन आने वाले श्रद्धालुओं के लिए किए गए इंतजाम के विषय में जानकारी दी. प्रेसवार्ता में सदस्यों ने बताया कि समिति ने इस पंडाल को अमेरिका के न्यू जर्सी स्थित स्वामी नारायण अक्षर धाम के तर्ज पर बनाने का फैसला किया है. इसे कोलकाता के कारीगरों द्वारा बनाया जा रहा है. पंडाल को बांस और सफ़ेद कपड़ों के साथ थर्माकोल से आकर्षक तरीके से तैयार किया जा रहा है.

पंडाल और प्रतिमा की जानकारी

नैला में 2026 की नवरात्रि को लेकर पंडाल की ऊंचाई 110 फ़ीट और चौडाई 200 फ़ीट रहेगी. वहीं माता रानी की 35 फ़ीट ऊँची प्रतिमा का निर्माण किया जा रहा है. प्रतिमा को सजाने के लिए आर्टिफिशियल ज्वेलरी के साथ ही असली हीरा-मोती और सोना-चांदी के आभूषण का इस्तेमाल होगा. वहीं पंडाल के अंदर तरफ सोने के रंग से सजाया जा रहा है.

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माँ दुर्गा की प्रतिमा को बनाने के लिए भठगांव से 20 मूर्तिकार दो माह से जुटे हुए हैं, प्रतिमा को बांस के फ्रेम से बनाकर फिर मिट्टी से तैयार किया जा रहा है. वहीं रायगढ़ के कलाकारों द्वारा पंडाल को स्वर्ण रंग से सजाया जा रहा है

40 सालों से जारी है यह परंपरा: रेलवे स्टेशन क्षेत्र में पिछले 40 वर्षों से दुर्गा उत्सव समिति यह आयोजन कर रही है. पहले भी कोलकाता के कलाकारों से पंडाल सजवाया जाता था, लेकिन कुछ सालों से देश-विदेश के प्रसिद्ध मंदिरों की थीम पर पंडाल तैयार किया जाता है.

जांजगीर-चंपा जिले का इतिहास

जांजगीर-चंपा जिले की स्थापना 25 मई 1998 को हुई थी। जांजगीर-चंपा जिला छत्तीसगढ़ के मध्य में स्थित है, इसलिए इसे छत्तीसगढ़ का हृदय माना जाता है। जांजगीर-चंपा जिले का मुख्यालय जांजगीर है, जो कुलचुरी वंश के महाराजा जाजवाल्य देव की नगरी है। जांजगीर-चंपा जिला छत्तीसगढ़ राज्य में अनाज का एक प्रमुख उत्पादक है।

जांजगीर जिले का विष्णु मंदिर इस जिले के स्वर्णिम अतीत का प्रतिबिंब है। विष्णु मंदिर वैष्णव समुदाय की प्राचीन कलात्मक कृति है। हसदेओबांगो परियोजना को जांजगीर-चंपा जिले के लिए जीवनदायिनी नहर माना जाता है।

जांजगीर-चंपा कुलचुरी वंश के महाराजा जाज्वल्य की नगरी है। जिले में रहने वाले अधिकांश लोग आसपास के गांवों से आकर यहां बसे हैं। जांजगीर-चंपा जिले के स्थानों के नाम यहां की जातियों से संबंधित हैं, जैसे कहरा पारा, खाले पारा, भाटापारा आदि। जिले में शुरू की गई हसदेव बंगो परियोजना गांवों के लिए एक बड़ा सहारा साबित हो रही है,

क्योंकि जांजगीर-चंपा के एक चौथाई हिस्से में सिंचाई की सुविधा उपलब्ध होगी। यह जिला एक महत्वपूर्ण कृषि केंद्र है और ताजे कृषि उत्पादों और चूना पत्थर के लिए भी प्रसिद्ध है। प्राचीन संस्कृति के लिए प्रसिद्ध जांजगीर-चंपा में समृद्ध संस्कृति की झलक मिलती है, जो शहर के इतिहास को दर्शाती है। एक रोचक तथ्य यह है

नैला जांजगीर में परिवहन

नैला जांगीर कस्बे में एक बेहतरीन परिवहन व्यवस्था है। स्थानीय परिवहन की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त संख्या में ऑटो रिक्शा उपलब्ध हैं। इनकी बदौलत यहां के यात्रियों को कस्बे के किसी भी हिस्से से ऑटो रिक्शा पाने के लिए ज़्यादा मशक्कत नहीं करनी पड़ती। कनेक्टिविटी की बात करें तो नैला जांगीर कस्बे की कनेक्टिविटी शानदार है।

इसका मुख्य श्रेय नैला रेलवे स्टेशन (जिसे जांगीर नैला रेलवे स्टेशन भी कहा जाता है) को जाता है। कई दूर-दराज के शहरों से कनेक्टिविटी के कारण नैला रेलवे स्टेशन छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे महत्वपूर्ण रेलवे स्टेशनों में से एक है। इनमें से कुछ प्रमुख शहर मुंबई, दिल्ली, शालीमार (पश्चिम बंगाल), टाटा नगर और तिरुवनंतपुरम हैं।

इसके अलावा, यह स्टेशन छत्तीसगढ़ राज्य के सभी महत्वपूर्ण शहरों से भी जुड़ा हुआ है। अंत में, राष्ट्रीय राजमार्ग संख्या 200 भी जांगीर कस्बे से होकर गुजरता है। यह राष्ट्रीय राजमार्ग छत्तीसगढ़ राज्य को ओडिशा राज्य से जोड़ता है।

जांजगीर-चंपा के आसपास घुमने की जगह

विष्णु मंदिर

यह ऐतिहासिक और अत्यंत प्रसिद्ध मंदिर जांगीर कस्बे के बहुत पास स्थित है। 12वीं शताब्दी का यह मंदिर अपनी अनूठी और विशिष्ट वास्तुकला के लिए जाना जाता है, जो इसे देखने लायक बनाता है। इसके अलावा, अन्य ऐतिहासिक स्मारकों के विपरीत, इस मंदिर का रखरखाव बहुत अच्छी तरह से किया गया है।

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इसलिए सदियों पुराना होने के बावजूद, आज भी आप इसकी सुंदरता और वास्तुकला की विशिष्टता को पूरी भव्यता के साथ देख सकते हैं। विष्णु मंदिर के अलावा, नैला जांगीर कस्बे के पास कुछ अन्य दर्शनीय मंदिर भी हैं। इनमें अद्भर देवी मंदिर, मदनपुरगढ़ मंदिर (देवी मंदिर) और पीथमपुर (शिव मंदिर) शामिल हैं।

कुदरी बैराज जांजगीर

चांपा जिला मुख्यालय से लगभग 10 किमी की दूरी में हसदेव नदी पर स्थित मनोरम पर्यटन स्थल है. यहां हसदेव नदी के किनारे पेड़ पौधे से बहुत शांति और साफ वातावरण के कारण लोग यहां पिकनिक मनाने आते है, यह बहुत ही प्रसिद्ध पिकनिक स्पॉट भी है, पर्यटन को ध्यान में रखते हुए यहां जिला प्रशासन द्वारा बोटिंग की सुविधा मिलने लगी है. यहां पर सैर करने के लिए एक खूबसूरत बगीचा भी बनाया गया है जहां से हसदेव नदी का सुन्दर नजारा दिखाई पड़ता है.

नगरदा वाटरफॉल

जिले की सीमाओं पर स्थित नगरदा वाटरफॉल प्रकृति प्रेमियों के लिए खास आकर्षण का क्रेंद है. गुडहा पहाड़ी पर बसे इस झरने में तीन अलग-अलग धाराएं देखने को मिलती हैं, जो इसे और भी मनमोहक बनाती हैं. गर्मी से यहां नहाने और बारिश के मौसम में इसके अद्भुत प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग आते हैं. झरने के पास भगवान शिव का एक मंदिर भी मौजद है.

अड़भार

मंदिर का ज्योति कलश नवरात्रि के दौरान जला रहता है, जिससे इसकी सुंदरता और भी बढ़ जाती है। छत्तीसगढ़ का महत्वपूर्ण तीर्थस्थल अड़भार अष्टभुजी एक अति प्रचीन धार्मिक स्थान है। छत्तीसगढ़ के हर हिस्से से अड़भार अष्टभुजीय आसानी से पहुंचा जा सकता है। 

देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट

इसके अलावा, देवरी-चिचोली पिकनिक स्पॉट भी पूरे साल पर्यटकों से भरा रहता है. जांजगीर से 25 किलोमीटर दूर स्थित यह स्थान हसदेव नदी के किनारे बसे बड़े-बड़े पत्थरों और आकर्षक लोकेशनों की वजह से फोटोशूट के लिए खासा मशहूर है. यहां स्थानीय लोगों के पास ही पड़ोसी जिलों से भी पर्यटक घूमने और पिकनिक मनाने आते हैं. सेल्फी प्वाइंट भी इस जगह की खास पहचान बन चुके हैं. 

लक्ष्मणेश्वर मंदिर

यह हिन्दू तीर्थ यात्रियों के लिये यह एक पवित्र स्थान है। हिन्दू पौराणिक और स्थानीय कथाओं के अनुसार यहॉ भगवान राम के अनुज लक्ष्मण जी ने भगवान शिव का मंदिर बनवाया था।

दल्हा पहाड़

अकलतरा ब्लॉक के अंतर्गत प्रसिद्ध दल्हा पहाड़ एडवेंचर और नेचर से प्यार करने वालों के लिए शानदार जगह है. लगभग 700 मीटर ऊंचे इस पहाड़ी की चोटी तक पहुंचने के लिए करीब 4 किलोमीटर की चढ़ाई तय करनी पड़ती है. ऊपरी हिस्से पर पहुंचकर चारों ओर का प्राकृतिक दृश्य इतना आकर्षक लगता है कि पर्यटकों का सफर यादगार बन जाता है. यहां पिकनिक के साथ ट्रेकिंग का भी लोगों में खूब उत्साह रहता है. 

कोटमी सोनार

छत्तीसगढ़ के जांजगीर चांपा जिले के कोटमी सोनार में है देश का दूसरा व प्रदेश का एकमात्र क्राकोडायल पार्क में यहां जिले के साथ साथ पूरे छत्तीसगढ़ से और अन्य पड़ोसी राज्यों से भी पर्यटक पहुंचते है. वही गर्मी की छुट्टी में कोटमी सोनार पहुंचकर मगरमच्छ को नजदीक से देखने का आनंद उठाएं, इस मगरमच्छ पार्क में 400 से अधिक की संख्या में मगरमच्छ है.

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चंद्रहासिनी देवी मंदिर

यह एक पवित्र स्थान है व पर्यटन स्थल के रूप में दिन ब दिन अपनी ख्याति बना रहा है। महानदी के तट पर चन्द्रहासिनी देवी माता का एक अद्भुत मंदिर है। साथ ही यह एक प्रसिद्ध पर्यटन स्थल है यहॉ अन्य राज्यों जैसे ओडिसा से भी लोग आते है।

शिवरीनारायण धाम

जिला मुख्यालय से 40 और बिलासपुर से 62 किलोमीटर की दूर पर स्थित शिवरीनारायण धाम को छत्तीसगढ़ का गुप्त प्रयाग कहा जाता है. महानदी, शिवनाथ और जोक नदी के त्रिवेणी संगण से घिरा यह स्थान अपनी अनोखी पौराणिक और प्राकृतिक महत्ता के लिए जाना जाता है. यहां महानीद में नौका विहार का आनंद लिया जा सकता है, जबकि विशाल नदी तट पिकनिक के लिए उपयुक्त है. साथ ही नदी किनारे विकसित मिनी अमेजन नामक छोटा जंगल भी पर्यटन आकर्षण का नया केंद्र बन रहा है. 

जांजगीर चांपा जाने का सबसे अच्छा समय

समय के बहते ताने-बाने की कोमल गोद में, जहाँ नदियों की शांत कलकल ग्रामीण आकर्षण की मधुर लय से मिलती है, जांजगीर-चंपा विरासत, आध्यात्मिकता और सादगी का एक शांत अभयारण्य बनकर उभरता है। प्राचीन मंदिरों, शांत घाटों और शाश्वत परंपराओं से सुशोभित यह शांत भूमि यात्रियों को ठहरने, सांस लेने और इसकी सहज सुंदरता में खो जाने का निमंत्रण देती है।

जांजगीर-चंपा में अक्टूबर से फरवरी तक सुहावना मौसम रहता है, जो इसके ऐतिहासिक स्थलों और प्राकृतिक दृश्यों को देखने के लिए सबसे उपयुक्त समय है। जांजगीर-चंपा के सार को अनुभव करने के लिए आदर्श अवधि 1-2 दिन है, जिससे इसकी सांस्कृतिक गहराई और नदी किनारे की शांति का आनंद लेने के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

जांजगीर चंपा कैसे पहुंचे

जांजगीर चंपा जिला मुख्य रोड मार्ग में स्थित है यहाँ तक पहुचने के लिए रेलमार्ग,सड़क मार्ग द्वारा भी पंहुचा जा सकता है स्वयं परिवहन द्वारा भी आसानी से पंहुचा जा सकता है

कोरबा से जांजगीर चंपा की दुरी 37 से 51 किलोमीटर है

चंपा से जांजगीर की दुरी 10 किलोमीटर है

बिलासपुर से 39 से 42 किलोमीटर है

Anju Ratre