कोरबा का प्रसिद्ध दर्शनीय मां मड़वारानी मन्दिर

माँ मड़वारानी मंदिर, छत्तीसगढ ऱाज्य के कोरबा जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर है यहाँ के मूल निवासियों के द्वारा माँ मड़वारानी की आराधना की जाती है और उनके श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं और यह माना जाता है की माँ मड़वारानी स्वयं प्रकट होकर आस-पास के गावों की रक्षा करती हैं | माँ मड़वारानी मंदिर, मड़वारानी पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित है | माँ मड़वारानी का दर्शन हर श्रद्धालु को अवश्य करनी चाहिए |

कोरबा में मां मड़वारानी का प्रसिद्ध मंदिर है. मान्यता है कि मां मड़वारानी अपनी शादी के मंडप (मड़वा) को छोड़कर आ गई थीं और पेड़ के नीचे विराजमान हो गईं. इस मंदिर में मां कुंवारी स्वरूप में विद्यमान हैं देश भर में कई धार्मिक स्थल हैं, जहां से अनेकों मान्यताएं निकल कर सामने आती हैं. ठीक इसी प्रकार छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में भी देवी मां का एक प्रसिद्ध मंदिर है, जहां सच्चे मन से मांगी गई हर मन्नत पूरी होती है.

 छोटे से ब्लॉक में आपको मड़वारानी मंदिर के बारे में  बताऊंगी जहां पर आप फैमिली और दोस्तों के साथ जा सकते हैं यहां पिकनिक के लिए बहुत सुन्दर पर्यटन स्थल है जहां आप आपने पूरे परिवार के साथ जा कर आनंद का अनुभव कर सकते हैं 

जिला मुख्यालय से 22 किलोमीटर दूर मड़वारानी मंदिर कोरबा से चांपा रोड पर स्थित है पहाड़ी की चोटी पर माता मड़वारानी का मंदिर है नवरात्रि के दिनों में इस मंदिर के भीड़ उमड जाती है प्रत्येक वर्ष के नवरात्री सीजन के दौरान यहां मेला लगता हैं 

परिचय

मां मड़वारानी मंदिर छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में स्थित है यहां के स्थानीय निवासियों के श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक है और एक प्रमुख दर्शनीय स्थल है मंडप को स्थानीय भाषा में “मड़वा” कहा जाता है मां मड़वारानी के मंडप से आने के कारण गांव और पर्वत को मड़वारानी के नाम से जाना जाता है स्थान जिला मुख्यालय कोरबा से 18 किलोमीटर एवं जांजगीर जिले से लगभग 16 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है

        मड़वारानी रेलवे स्टेशन के लिए लोकल ट्रेन की सुविधा है इसके अलावा कोरबा एवं चांपा से मड़वारानी के लिए बस की सुविधा भी उपलब्ध हैं 

देवी की मान्यता

माँ मड़वारानी की कहानी की ऐतिहासिक है और ऐसा बुजुर्गों द्वारा आँखों देखी मानी जाती है | ऐसा माना जाता है क़ि माँ मड़वारानी अपने शादी के मंडप (मड़वा) को छोड़ कर आ गयी थी | इसी दौरान बरपाली-मड़वारानी रोड में उनके शरीर से हल्दी एक बड़े पत्थर पर गिरी और वह पत्थर पीला हो गया |

मां मड़वारानी मंदिर पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित हैं पहले कहानी मड़वारानी मां जब अपने शादी के मंडप को छोड़कर आए तो बरपाली से मडवारानी  के रास्ते पर उनके शरीर से टकरा कर हल्दी एक बड़े पत्थर पर लग गई और वहां पत्थर पीला हो गया दूसरी प्रसिद्ध कहानियां हैं कि मां मड़वारानी भगवान शिव से कनकी में मिली एवं मड़वारानी पर्वत पर आए मां मड़वारानी संस्कृत में “मडवी देवी”के नाम से भी जानी जाती

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माँ मड़वारानी के मंडप से आने के कारण गाँव और पर्वत को मड़वारानी के नाम से जाना जाने लगा | दूसरी प्रसिद्ध कहानी यह है कि माँ मड़वारानी भगवान शिव से कनकी मे मिली एवं मड़वारानी पर्वत पर आई | माँ मड़वारानी संस्कृत में “मांडवी देवी” के नाम से जानी जाती है | यह माना जाता है

क़ि कुछ ग्राम वासियों द्वारा देखा गया कि कलमी वृक्ष एवं उसके पत्तियों में हर नवरात्रि को जवा उग जाता है और एक सर्प उसके आस पास विचरण करता है और आज भी कभी-कभी दिखाई पड़ता है | ऐसा माना जाता है कि एक दूसरे कलमी पेड़ में मीठे पानी का श्रोत था जो हमेशा बहता रहता था | पर एक दिन एक ग्रामीण पानी लेते समय अपना बर्तन खो दिया और उसने पेड़ को काटकर देखा पर उसे अपना बर्तन नहीं मिला 

मंदिर का इतिहास और मान्यताएं : मड़वारानी का इतिहास लगभग 4 पीढ़ी पुराना है. वर्तमान में यहां सुरेंद्र कंवर मुख्य पुजारी हैं. जो बताते हैं कि उनकी चौथी पीढ़ी मां मड़वारानी की सेवा कर रही है. छत्तीसगढ़ एक ऐसा राज्य है, जहां देवी दुर्गा, पार्वती की तरह ही स्थानीय देवियों को भी उतनी ही श्रद्धा से पूजा जाता है. स्थानीय देवियों का यहां अधिक महत्व है.

मां मड़वारानी भी छत्तीसगढ़ की एक स्थानीय देवी के तौर पर वर्षों से पूजी जाती हैं. इस विषय में जो सबसे प्रचलित मान्यता है कि जब मां मड़वारानी की शादी तय हुई तब वह शादी नहीं करना चाहती थीं. इसलिए वह मंडप छोड़कर किसी को बिना कुछ बताए चली गईं.

कैसे पड़ा देवी का नाम : छत्तीसगढ़ की स्थानीय भाषा में मंडप को मड़वा कहा जाता है. इसी वजह से देवी का नाम मड़वारानी पड़ गया.मंडप छोड़कर वह बरपाली के इसी पहाड़ पर आई. जिसे अब मड़वारानी कहा जाता है. उन्होंने अपने तन पर लगी हल्दी को भी इसी गांव के आसपास धोया था. मान्यता तो यह भी है कि हल्दी के पीलापन के साक्ष्य अब भी गांव में मौजूद हैं.

हालांकि वह अब काफी धुंधले पड़ चुके हैं. मंदिर के पुजारी सुरेंद्र कंवर कहते हैं कि एक और मान्यता जो सबसे ज्यादा प्रचलित है. वह जिले के ही कनकेश्वर धाम से जुड़ी हुई है. कंवर कहते हैं कि मां मड़वारानी जब शादी का मंडप छोड़कर पहाड़ पर आ गयीं थीं. तब स्वयं भगवान शिव उन्हें मनाने पहुंचे थे, लेकिन पूरी रात बीत गई मां शादी के लिए नहीं मानी. तब भगवान शिव कनकी में जाकर बस गए, तभी से कनकी में कनकेश्वर धाम बन गया और बरपाली का यह पहाड़ मां मड़वारानी के नाम से प्रसिद्ध हुआ

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मड़वारानी के आसपास घूमने की जगहें

कोसगाईगढ़ – कोसगाइगढ़, कोरबा-कटघोरा रोड से 25 किलोमीटर दूर पुटका पहाड़ की पहाड़ियों पर स्थित एक गाँव है। इसका निर्माण राजा द्वारा करवाया गया था। प्राकृतिक दीवारें इसकी रक्षा करती हैं, इसलिए केवल कुछ हिस्सों में ही निर्माण कर्ताओं ने दीवारों के निर्माण की आवश्यकता महसूस की।

समुद्र तल से 1570 फीट की ऊंचाई पर स्थित इस स्थान से कोरबा जिले का एक बड़ा हिस्सा दिखाई देता है। किले के मुख्य प्रवेश द्वार पर एक सुरंग जैसा मार्ग है, जहाँ से केवल एक व्यक्ति ही गुजर सकता है। युद्ध के दौरान, राजा के सैनिक किले से बड़े-बड़े पत्थर लुढ़काकर दुश्मन को रोकते थे। पहाड़ी के चारों ओर प्राचीन संरचनाओं के अवशेष बिखरे हुए हैं। किला घने जंगल में छिपा हुआ है, जो भालू, तेंदुआ आदि जैसे जंगली जानवरों का घर है।

सर्वमंगला मंदिर – सर्वमंगला कोरबा जिले के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है। इस मंदिर की देवी दुर्गा है। यह मंदिर कोरेश के जमींदार में से एक राजेश्वर दयाल के पूर्वजों द्वारा बनाया गया था। मंदिर त्रिलोकिननाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलाश भवन से घिरा हुआ है। वहाँ भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाता है और दूसरी तरफ निकलता है। रानी धनराज कुंवर देवी को मंदिर में अपनी दैनिक यात्रा के लिए इस गुफा के लिए इस्तेमाल किया गया था।

देवपहाड़ी – देवपहाड़ी कोरबा से 58 किलोमीटर उत्तर पूर्व में चोरनाई नदी के किनारे स्थित है। देवपहाड़ी जलप्रपात पहाड़ों से होकर बहता हुआ, घुमावदार और तेज बहाव के साथ पहाड़ियों से नीचे जमीन पर गिरता है। देव का अर्थ है भगवान और पहाड़ी का अर्थ है पर्वत देवताओं के पर्वतों से बहता है। ये जलप्रपात भव्य और विशाल हैं

और घूमने के लिए प्रसिद्ध स्थानों में से एक हैं। आप अपने दोस्तों और परिवार के साथ जलप्रपात देखने और पिकनिक मनाने जा सकते हैं। ये जलप्रपात आज भी सुंदर और साफ-सुथरे हैं। तेज धूप वाले दिन जलप्रपात से ठंडी और ताजी फुहार का आनंद लेना एक सुखद अनुभव होता है। 

केंदई – केंदई गांव कोरबा जिला मुख्यालय से 85 किलोमीटर की दूरी पर बिलासपुर-अंबिकापुर राज्य राजमार्ग संख्या 5 पर स्थित है। यह जिले के खूबसूरत पर्यटन स्थलों में से एक है। यहां 75 फीट ऊंचा एक मनमोहक झरना है।

मुक्तामणि धाम (कुदुरमल) – यह कबीरपंथियों का एक बेहद पवित्र ऐतिहासिक तीर्थ स्थल है। यहाँ संत कबीर के प्रमुख शिष्य की लगभग 500 वर्ष पुरानी समाधि स्थित है।

दमाऊ धारा – यह स्थान पर्यटकों के लिए आकर्षण का केन्द्र हैं यहॉ एक ओर प्राकृतिक पानी का जलप्रपात, गुफाए रामजानकी मंदिर, राधाकृष्ण मंदिर, ऋषभ देव मंदिर इत्यादि है। इसके पास ही अन्य पर्यटन स्थलों पंचवटी, सीतामणी आदि आकर्षित करने वाले पर्यटन स्थल है।

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श्री हनुमान मंदिर – माँ मड़वारानी मंदिर पहाड़ ऊपर जाने वाले मार्ग में हनुमान जी की उपस्थति का एहसास सहस ही हो जाता है | श्री हनुमान मंदिर के प्रांगण में श्रद्धालुजनों के लिए स्वल्पाहार एवं आहार क साथ आराम की व्यवस्था है |

पहुँचने के लिए कैसे करें

ट्रेन से – कोरबा रेलवे स्टेशन 30 किलोमीटर दूर है और चंपा रेलवे स्टेशन 35 किलोमीटर दूर है। मड़वारानी रेलवे से 1 किलोमीटर की दुरी पर है

सड़क द्वारा – कोरबा बस स्टेशन 30 किलोमीटर दूर है और चंपा बस स्टेशन 35 किलोमीटर दूर है। बरपाली से 3 किलोमीटर की दुरी पर स्थित है

मड़वारानी मंदिर की मेरा यात्रा अनुभव

मड़वारानी मंदिर मैं कई बार जा चुकी हूं,लेकिन हर बार यहां आने का अनुभव कुछ अलग ही लगता है। पहाड़ पर चढ़ते समय चारों तरफ दिखाई देने वाले हरे-भरे पेड़ और शांत वातावरण मन को अच्छा लगता है। सबसे खास बात तो तब महसूस होती है, जब पहाड़ के ऊपर पहुंचकर नीचे का अनोखा दृश्य दिखाई देता है।

यह मंदिर धार्मिक स्थल है जहा जा कर मन को शांति का अनुभव होता है जैसे ही मंदिर के नजदीक पहुचने लगते है सब धीरे धीरे सांसे थमने लगता है और वहां पहुँच कर एक अलग से ख़ुशी का अनुभव होने लगता है पहाड़ के ऊपर से जब नीचे को निहारने लगो तो वहा के व्यू को बस देखते रहने का मन करता रहता है मंदिर के अन्दर जाने के बाद चारो तरफ कलश और दिया जलते हुए नजर आता है

नवरात्रि में मड़वारानी मंदिर के दर्शन के लिए बहुत दूर दूर से आते है और दर्शन करते है ये स्थान बहुत ही लोकप्रिय है और सभी के मन को शांति का अनुभव होता है

Anju Ratre