पुष्कर मेला राजस्थान : विश्व का सबसे बड़ा ऊंटों का मेला 2025

पुष्कर मेला राजस्थान 2025 :- पुष्कर मेला विश्व का सबसे बड़ा ऊंट और पशुधन उत्सव है, जो अक्टूबर-नवंबर में एक सप्ताह तक चलता है. इसमें मटका फोड़, मूंछ प्रतियोगिताएं और क्रिकेट मैच होते हैं. यह मेला सांस्कृतिक और धार्मिक समागम का केंद्र है.

पुष्कर मेला 2025 का आयोजन 30 अक्टूबर से 5 नवंबर 2025 तक चलेगा।
इसका उद्घाटन मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी द्वारा केशव प्रयाग में किया गया। पुष्कर मेला जिसे पुष्कर ऊंट उत्सव के नाम से भी जाना जाता है, राजस्थान के पुष्कर शहर में प्रतिवर्ष अक्टूबर और नवंबर (कार्तिक माह) के दौरान आयोजित होने वाला एक सप्ताह भर चलने वाला विश्व प्रसिद्ध उत्सव है. यह मेला दुनिया के सबसे बड़े ऊंट और पशुधन मेलों में से एक है और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण का केंद्र है.

1 कहां लगा है पुष्कर मेला 2025

भारत-तिब्बत सीमा के पास स्थित माणा गांव समुद्रतल से करीब 3200 मीटर की ऊंचाई पर बसा है। बद्रीनाथ धाम से केवल 3 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह गांव ऐतिहासिक और धार्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है। माना जाता है कि यह महाभारत कालीन स्थल है, जहां से पांडव स्वर्ग के लिए लिए गए थे। यह गांव कई प्राकृतिक गुफाओं और धार्मिक स्थलों के लिए भी प्रसिद्ध है, जैसे व्यास गुफा, गणेश गुफा, भीम पुल, और सरस्वती नदी का उद्गम स्थल।

कुंभ मेला 2025

कुंभ मेला 2025

2 पुष्कर कुंभ 2025 का महत्व

पुष्कर कुंभ का आयोजन द्वादशवर्षीय चक्र में होता है और यह देश के पांच पुष्कर क्षेत्रों में से एक माणा गांव में आयोजित किया जाता है। यह कुंभ न केवल आध्यात्मिक उन्नयन का अवसर होता है, बल्कि यहां साधु-संतों, योगियों, और तीर्थयात्रियों का विशाल जमावड़ा भी देखने को मिलता है। कुंभ के दौरान विशेष स्नान पर्व, हवन, पूजन, धार्मिक प्रवचन और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित होते हैं। यह मेला परंपरा और भक्ति के रंगों से सराबोर होता है।

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2.1 माणा की यात्रा कैसे करें

अगर आप पुष्कर कुंभ मेला जाना चाहते हैं तो माणा गांव के लिए निकटतम रेलवे स्टेशन ऋषिकेश है, जो कि 300 किमी की दूरी पर है। हवाई मार्ग के जरिए आप देहरादून एयरपोर्ट पहुंचकर यहां से 315 किमी सड़क मार्ग यात्रा कर सकते हैं। ऋषिकेश से बद्रीनाथ तक बस या टैक्सी सेवा उपलब्ध है, वहां से माणा गांव की दूरी मात्र 3 किमी है।

2.2 पुष्कर मेले के पीछे की पौराणिक कथा
ऐसा माना जाता है कि सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा ने कार्तिक माह की एकादशी से पूर्णिमा तक 5 दिनों तक पुष्कर में यज्ञ किया था। इस काल में 33 करोड़ देव, देवियाँ भी पृथ्वी पर उपस्थित थे। इसी कारण से कार्तिक मास की एकादशी से पूर्णिमा तक 5 दिनों का पुष्कर में विशेष महत्व है। ऐसा कहा जाता है कि इस महीने में सभी देवता पुष्कर में निवास करते हैं। इन्हीं मान्यताओं के चलते पुष्कर मेले का आयोजन किया जाता है। पुराने समय में संसाधनों की कमी के कारण श्रद्धालु अपने साथ जानवर भी लाते थे। धीरे-धीरे इसे पशु मेले के रूप में जाना जाने लगा।”

पुष्कर मेला

3 पुष्कर मेला की शान बढ़ती है ये बाते

1.15 करोड़ का घोड़ा ‘शाहबाज’ बना चर्चा में
शाहबाज मारवाड़ी नस्ल का घोड़ा है, जिसे चंडीगढ़ के पशु प्रजनक गैरी गिल लेकर मेले में पहुंचे हैं। दो साल छह महीने के इस घोड़े की कीमत उन्होंने 15 करोड़ रुपये आंकी है। शाहबाज ने अब तक कई राष्ट्रीय स्तर के शो जीते हैं और इसके प्रजनन शुल्क (कविंग फीस) 2 लाख रुपये रखी गई है। उन्होंने बताया कि इसे 9 करोड़ रुपये तक के ऑफर मिल चुके हैं।

2.23 करोड़ की भैंस ‘अनमोल’ मेले को बनाया खास
पंजाब के पामिंदर गिल की 1,500 किलो वजनी भैंस अनमोल भी इस बार मेले की शान बनी हुई है। इसकी कीमत 23 करोड़ रुपये बताई जा रही है। गिल का कहना है कि वे अपनी भैंस को विशेष देखभाल के साथ रखते हैं। अनमोल को रोजाना दूध, देसी घी और सूखे मेवे खिलाए जाते हैं।

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3.1 अन्य जानवरों में भी बड़ी दिलचस्पी
उज्जैन से आई 25 लाख रुपये की भैंस राणा और 11 करोड़ रुपये तक ऑफर पा चुका घोड़ा बादल भी आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं। वहीं जयपुर के अभिनव तिवारी अपनी मात्र 16 इंच ऊंची गाय लेकर पहुंचे हैं, जिसे मेले की सबसे छोटी गाय माना जा रहा है।

3.2 हजारों जानवरों का पंजीकरण
पशुपालन विभाग के अनुसार, इस वर्ष मेले में करीब 4,300 जानवरों का पंजीकरण हुआ है, जिनमें 3,028 घोड़े और 1,306 ऊंट शामिल हैं। सुरक्षा के लिए 2,000 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं और हर जानवर की स्वास्थ्य जांच एवं डिजिटल रिकॉर्डिंग की विशेष व्यवस्था की गई है।

स्थान विशेष: केशव प्रयाग और माणा गांव:

  • केशव प्रयाग:
    अलकनंदा और सरस्वती नदियों के संगम पर स्थित एक पवित्र तीर्थ।
  • माणा गांव:
    भारत का अंतिम गांव (Indo-Tibetan सीमा पर), जो महर्षि वेदव्यास की तपस्थली रहा है।
4 पुष्कर मेले की मुख्य विशेषताएं
पुष्कर मेला

पुष्कर 2025 के ऊँट मेले का हर दिन मज़ेदार और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से भरपूर है, लेकिन हर दिन की अपनी एक खासियत है जो आपके अनुभव को और भी बेहतर बना देगी। राजस्थान की संस्कृति की असली खूबसूरती इस मेले के हर हिस्से में साफ़ झलकती है, इसलिए ज़रूरी है कि आप हर दिन होने वाले सभी कार्यक्रमों की मुख्य विशेषताओं को नोट कर लें ताकि आप कुछ भी मिस न करें।

दिन 1: 25000 से अधिक ऊंटों द्वारा हार्मनी मैराथन, हॉट एयर बैलून उड़ानें और एक प्रसिद्ध बैंड (अधिमानतः भारतीय महासागर) दिन को समाप्त करने के लिए बजाएगा। इस मेले में हजारों खूबसूरत कपड़े पहने ऊंट नृत्य और परेड से लेकर किसानों और नीलामी तक के केंद्र बिंदु हैं।
दिन 2: राज्य भर के मवेशी मालिक अपने खूबसूरत मवेशियों, गायों, घोड़ों, बकरियों और भेड़ों को व्यापार के लिए रंग-बिरंगे कपड़ों में लाते हैं।
दिन 3: अद्भुत सांस्कृतिक प्रदर्शन, जैसे लोक नृत्य, कलाबाजी, मटका फोड़ प्रतियोगिताएं और दूल्हा-दुल्हन प्रतियोगिताएं।
दिन 4: मैदान पर मूंछ प्रतियोगिताएं, जहां लंबी और घनी मूंछें राजस्थानी पुरुषों के लिए गर्व की बात हैं।
दिन 5: पुष्कर मेले के रंगीन स्टालों से स्मृति चिन्ह के रूप में स्थानीय उत्पाद खरीदें।
दिन 6: धार्मिक गतिविधियों में शामिल हों, जैसे पवित्र पुष्कर सरोवर में स्नान, महाआरती में भाग लेना, और दीपदान व पुष्कर अभिषेक जैसे अन्य अनुष्ठान।
दिन 7: एडवेंचर ज़ोन में साहसिक गतिविधियों में जादू के शो, पगड़ी बाँधना, तिलक प्रतियोगिता, रस्साकशी, लाइव संगीत, हिंडोला सवारी और अन्य रोचक गतिविधियाँ शामिल हैं।
दिन 8: विशाल सांस्कृतिक कार्यक्रम और समापन समारोह, मटका दौड़, ऊँट दौड़ और कला जत्था।

5 इस वर्ष पुष्कर मेले में आने के शीर्ष 5 कारण इस प्रकार हैं:

1 – हॉट एयर बैलून – मेले का मनमोहक नज़ारा:
पुष्कर मेले का रंग-बिरंगा नज़ारा आसमान से और भी लुभावना लगता है। हॉट एयर बैलून की सवारी से पूरे मेला क्षेत्र का अद्भुत विहंगम दृश्य दिखाई देता है—एक अविस्मरणीय अनुभव और बेहतरीन फ़ोटोग्राफ़ी का मौका।

2 – दुनिया का सबसे बड़ा पशुधन मेला:
भारत के गौरव का हिस्सा बनें! हज़ारों चरवाहे और खानाबदोश पुष्कर झील के आसपास ऊँटों, घोड़ों और मवेशियों का व्यापार करने के लिए इकट्ठा होते हैं। यह परंपरा, व्यापार और संस्कृति का एक जीवंत संगम है, जो एक महाकाव्य स्तर पर है।

3 – फ्यूज़न बैंड परफॉर्मेंस – रेगिस्तान और संगीत!:
विश्व-प्रसिद्ध फ्यूज़न बैंड्स के दिल को छू लेने वाले प्रदर्शनों का आनंद लें—बिल्कुल मुफ़्त! साल में एक बार होने वाले इस उत्सव में संगीत की लय और रेगिस्तान का जादू आपको मंत्रमुग्ध कर देगा।

4 – विचित्र प्रतियोगिताएं!:
सबसे लंबी मूंछों की प्रतियोगिता जैसी अनोखी और विश्व प्रसिद्ध प्रतियोगिताओं के साक्षी बनें, जहां गर्वित राजस्थानी पुरुष अपनी प्रभावशाली लंबी और अच्छी तरह से संवारी हुई मूंछें दिखाते हैं – कुछ तो रस्सी जितनी लंबी होती हैं!

5 – ऊँट और रेगिस्तान – एक बेहतरीन सवारी!:
राजस्थान के शानदार रेगिस्तान आपका इंतज़ार कर रहे हैं! ऊँटों की अदला-बदली सिर्फ़ देखें ही नहीं, बल्कि उनकी सवारी भी करें। पुष्कर की सुनहरी रेत पर ऊँट सफ़ारी ज़रूर आज़माएँ, जो आपको रेगिस्तान के रोमांच का असली अनुभव देगी।

पुष्कर मेले के प्रमुख आकर्षण (Highlights of Pushkar Fair 2025)

ऊंट मेला – मेले की असली पहचान

पुष्कर मेला अपने ऊंट मेले के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। यही कारण है कि इसका दूसरा नाम ऊंट मेला पड़ गया है। यहां आने वाले हजारों ऊंटों को रंगीन कपड़ों, आभूषणों और मेहंदी से सजाया जाता है। ऊंटों की रेस, खरीद-बिक्री और सजावट प्रतियोगिताएं इस मेले की सबसे बड़ी खासियत हैं।

लोक संगीत और नृत्य का संगम

राजस्थान की लोक परंपरा और संगीत इस मेले की आत्मा हैं। लोक कलाकारों की धुन और नृत्य प्रस्तुतियों पर न सिर्फ स्थानीय लोग बल्कि विदेशी पर्यटक भी झूम उठते हैं। यहां हर शाम लोकगीतों और घूमर नृत्य से पूरा वातावरण जीवंत हो उठता है।

हैंडीक्राफ्ट और लोक बाजार

शॉपिंग के शौकीनों के लिए पुष्कर मेला किसी स्वर्ग से कम नहीं है। यहां आप हैंडीक्राफ्ट बाजार में रंग-बिरंगे कपड़े, पारंपरिक चूड़ियां, जूतियां, गहने और सजावटी वस्तुएं खरीद सकते हैं। आप यहां से असली पारंपरिक राजस्थानी स्मृतिचिन्ह (souvenirs) भी अपने साथ ले जा सकते हैं।

कैंपिंग और टेंट स्टे

पुष्कर मेले की अवधि में रेगिस्तान के किनारे टेंट सिटी बसाई जाती है। जहां पर्यटक पारंपरिक राजस्थानी मेहमाननवाजी, लोक संगीत और बोनफायर नाइट्स का आनंद लेते हैं। मेले के दौरान स्टे करने वाले पर्यटकों का यह अनुभव पुष्कर यात्रा को और भी खास बना देता है।

कैसे पहुंचें पुष्कर ?

अगर आप हवाई मार्ग से जाना चाहते हैं तो जयपुर एयरपोर्ट तक आ सकते हैं। इससे आगे 140 किलोमीटर की दूरी बस या टैक्सी से कर सकते हैं। ट्रेन से आना चाहते हैं तो कई ट्रेनें अजमेर तक चलती हैं और अजमेर से पुष्कर सिर्फ 11 किलोमीटर

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