डोंगरगढ़ छत्तीसगढ़ राज्य के राजननंदगांव और जिले का नगर पालिका है मां बम्लेश्वरी मंदिर के लिए प्रसिद्ध हैं राजनंदगांव जिले में एक प्रमुख तीर्थ स्थल है शहर राजनंदगांव से 35 किमी पश्चिम में स्थित हैं दुर्ग से 67 पश्चिम किलो मीटर पर और भंडार से 132 किलो मीटर पूर्व में राष्ट्रीय राजमार्ग 6 पर स्थित है छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले के डोंगरगढ़ स्थित मां बम्लेश्वरी का दरबार चैत्र नवरात्र में खूब सजा हुआ है। पहाड़ी, मंदिर और माता के दरबार में आकर्षक रोशनी की गई है। कोरोना के कारण पिछले दो साल तक मां के दर्शन से वंचित श्रद्धालुओं में खासा उत्साह है। इस बार वे आसानी से माता के दर्शन कर सकेंगे। उनके उत्साह को देखते हुए ही रेलवे ने भी डोंगरगढ़ रेलवे स्टेशन पर 15 यात्री गाड़ियों के ठहराव की घोषणा की है।
मां बम्लेश्वरी का दरबार 1600 मीटर ऊंची पहाड़ी पर है। श्रद्धालुओं को यहां तक पहुंचने के लिए 1100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ेगी। हालांकि यहां रोपवे की भी व्यवस्था है। इसके अलावा आनलाइन दर्शन की भी सुविधा उपलब्ध करवाने की व्यवस्था की गई है। पहाड़ी पर स्थित मां बम्लेश्वरी का मुख्य मंदिर है। उन्हें बड़ी बम्लेश्वरी के रूप में जाना जाता है।
डोगर का मतलब है ‘पहाड़’और गढ़ का मतलब है किला बम्लेश्वरी देवी का मंदिर 1,600 किलो मीटर के ऊची चोटी पर बना हुआ लोक प्रिय एव ऐतिहासिक स्थल है आस पास के इलाकों में एक और छोटा सा मंदिर है जिसे बम्लेश्वरी देवी के नाम से मशहूर हैं जहां नवरात्रि के दिनो मे उमड़ी हुई भीड़ देखने को मिलता है नवरात्रि के दौरान यहां भक्त जनों का इकट्टा हुआ भीड़ देखा गया हैं
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मंदिर का इतिहास
मां बम्लेश्वरी शक्तिपीठ का इतिहास करीब 2000 वर्ष पुराना है। डोंगरगढ़ का इतिहास मध्य प्रदेश के उज्जैन से जुड़ा है। इसे वैभवशाली कामाख्या नगरी के रूप में जाना जाता था। मां बम्लेश्वरी को मध्य प्रदेश के उज्जयनी के प्रतापी राजा विक्रमादित्य की कुलदेवी भी कहा जाता है। इतिहासकारों ने इस क्षेत्र को कल्चूरी काल का पाया है। मंदिर की अधिष्ठात्री देवी मां बगलामुखी हैं। उन्हें मां दुर्गा का स्वरूप माना जाता है। उन्हें यहां मां बम्लेश्वरी के रूप में पूजा जाता है।
माता का इतिहास :-
डोंगरगढ़ शहर पहले कामावती नगरी के नाम से जाना जाता राजा कामसेन अपने तपोबल से मां बगलामुखी को प्रसन्न कर पहाड़ों में विराज मान होने की विनती की और मां बगलामुखी मां बम्लेश्वरी के स्वरूप में भक्तों के कल्याण हेतु पहाड़ों पर विराज मान हो गई । अत्यधिक जंगल एवम् दुर्गम रास्ता होने के कारण भक्तों को दर्शन लाभ प्राप्त ना होते देख राजा कामसेन दुखी हो पुनः मां से विनती करते हुए पहाड़ों के नीचे विराजमान होने के लिए आग्रह किया। मां बम्लेश्वरी राजा कामसेन की भक्ति और प्रजा के प्रति चिन्ता को देख प्रसन्न हो पहाड़ों से नीचे छोटी मां बम्लेश्वरी एवम् मंझली मां रणचंडी के स्वरूप में जागृत अवस्था में विराजमान हुई।
भक्तों का करतीं हैं कल्याण:
लोगों का ऐसा मानना हैं की जो भक्त उपर पहाड़ों में स्थित मां बम्लेश्वरी माता के दर्शन नही कर पाते वह भक्त छोटी मां बम्लेश्वरी वा मंझली मां रणचंडी माता के दर्शन कर लाभ प्राप्त करते हैं। पहाड़ों में विराजमान मां बड़ी बम्लेश्वरी अपने दो बहनों के साथ कामावती नगरी जिसे आज डोंगरगढ़ के नाम से जाना जाता है । आज भी जागृत अवस्था में सभी भक्तों के कल्याण करते आ रही हैं। जिसका प्रमाण मां के दरबार में दिन बा दिन भक्तों की भीड़ से पता चलता है। वही दूसरी ओर कुछ इतिहासकारों का यह भी कहना है की मां बम्लेश्वरी का इतिहास उज्जैन से भी जुड़ा हुआ हैं । राजा विक्रमादित्य भी यहां पहले शासक रह चुके हैं राजा विक्रमादित्य भी मां बगलामुखी के बड़े उपासक रहे हैं।
मां बम्लेश्वरी की महत्ता :-
मां के दरबार में सच्चे मन से जो भी मांगा है उनकी सभी मनोकामनाएं पूरी हुई हैं। यही कारण हैं की देश विदेश से भी लोग डोंगरगढ़ मां बम्लेश्वरी देवी के दर्शन को आते हैं। लोगो का कहना हैं की जिन्हे बच्चें नही होते या जिनके जीवन में कोई भी परेशानी आती हैं तो लोग पूरे सच्चे मन से माता के दरबार में मन्नते मांगते हैं वो पूरी होती हैं । अलग अलग लोग अलग अलग आस्था हैं कुछ लोग मन्नते पूरी होने पर अपने निवास स्थान से पैदल चल कर मां के दर्शन को आते हैं तो कई लोग घुटनों के बल से ऊपर पहाड़ों में विराजमान मां के दर्शन हेतु जाते हैं । तो कई लोग जस गीत गाते बाजे गाजे के साथ आते हैं लोगों का मानना हैं की सच्चे मन से मां से मांगो तो सारी इच्छाएं पूरी होती है। कुछ लोग अपनी मनोकामना पूरी होने पर ज्योति कलश की स्थापना भी करवाते हैं।धर्म नगरी डोंगरगढ़ में प्रत्येक वर्ष चैत्र और क्वार नवरात्र का पर्व मनाया जाता हैं । दोनों नवरात्र में मां के दरबार में ज्योति कलश प्रज्वलित किया जाता है।
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इतिहास और कहां है मंदिर
मां बम्लेश्वरी देवी मंदिर का इतिहास बेहद ही प्राचीन है। इस मंदिर को लेकर कोई स्पस्ट नहीं है कि कब इसका निर्माण हुआ था लेकिन, कई जानकारों का मानना है कि इस मंदिर का निर्माण लगभग 2 हज़ार साल पहले किया गया था। इसे लेकर स्थानीय लोगों का कहना है कि इस मंदिर का निर्माण उज्जैन के राजा विक्रमादित्य द्वारा कराया गया था। हालांकि, इसका भी कोई मूल प्रमाण नहीं है। आपको बता दें कि ये मंदिर छत्तीसगढ़ के डोंगरगढ़ में है। यह मंदिर लगभग एक हज़ार से भी अधिक फीट की ऊंचाई पर मौजूद है।
मंदिर परिसर में सुविधा की सारी व्यवस्था:
पूरे नवरात्रि पर्व पर मां बम्लेश्वरी ट्रस्ट समिति के द्वारा दर्शनर्थियों को माता के दर्शन एवम् प्रज्वलित ज्योति कलश के दर्शन करने सुरक्षित उड़नखटोला की व्यवस्था , दर्शनार्थियों के लिए एयर कंडीशन युक्त वेटिंग हॉल की व्यवस्था एवम् सीढ़ियों से दर्शन करने वाले दर्शनार्थियों के लिए जगह जगह पर ठंडे पानी एवम् आराम करने के लिए व्यवस्था की गई है। पूरे मन्दिर परिसर में ऊपर पहाड़ से लेकर नीचे तक सुरक्षा की दृष्टि से सी सी टी वी कैमरा लगा रखे हैं। नवरात्र के दौरान दर्शनर्थियो की मदद करने ट्रस्ट मंडल जगह जगह पर अपने कर्मचारी तैनात रखते हैं। जिससे किसी भी श्रद्धालुओं को दर्शन करने में कोई तकलीफ़ ना हो माता के दर्शन में आए दर्शनर्थियो के स्वास्थ की सुरक्षा में दवाईयां इत्यादि उपलब्ध कराते हैं। नवरात्री पर्व पर डोंगरगढ़ में प्रशासन द्वारा श्रद्धालुओं के मनोरंजन खान पान के लिए मेला का भी आयोजन किया जाता हैं । जिसमें बच्चों के मनोरंजन के लिए झूला, कपड़े, खाने पीने की सामग्री , मिनाबाजार इत्यादि होता हैं।
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शिवजी एव हनुमान भगवान को समर्पित मंदिर भी यह स्थित हैं
बम्लेश्वरी माता की कहानी
सन 2016 में यहां एक गंभीर दुर्घटना हुई जब रोपवे टूट गई और कई लोगो की मृत्यु हो गई यह शहर धार्मिक साध्रव के लिए जाना जाता हैं यहां हिंदू के अलावा सिख, ईसाई, और जैन का भी कभी आबादी देखने को मिलता है
डोगरगढ़ की दूरी
वायुयान द्वारा
निकटम हवाई अड्डा स्वामी विवेकानन्द हवाई अड्डा , नया रायपुर हैं जो की राजननंद गांव जिला मुख्यालय से मात्रा 72 किलो मीटर की दूरी पर स्थित हैं स्वामी विवेकानंद हवाई अड्डा नया रायपुर में उतर कर रेलवे स्टेशन से सीधे डोगरगढ़ जा सकते हैं इसके साथ ही सड़क मार्ग द्वारा भी राज मार्ग 6 के द्वारा भी डोगरगढ़ पहुंचा जा सकता हैं
सड़क मार्ग द्वारा
सड़क मार्ग द्वारा राजमार्ग के सहायता के साथ क्रमाक 6 का उपयोग करके डोगरगढ़ पहुंचा जा सकता हैं गांवओ रस्ता द्वारा भी डोगरगढ़ पहुंचा जा सकता हैं
ट्रेन द्वारा
अनेक प्रकार के ट्रेन जैसे लोकल ट्रेन , एस्प्रेस, आदि ट्रेन हर घंटे डोगरगढ़ जाने के लिए उपलब्ध है