TRAVEL HERE ➤
LATEST POSTS LOADING...

गिरौधपुरी का जैतस्तंभ क्यो प्रसिद्ध है गिरौदपुरी धाम का इतिहास

TRAVEL HERE   ➤
TLA
By Travel Life Angel Updated: May 13, 2026
f 𝕏 +

गिरौधपुरी का जैतस्तंभ दोस्तों आइए जानते है सतनाम के प्रवर्तक बाबा के सफेद जैतस्तंभ के बारे में जानने के लिए इस ब्लॉग में बने रहिए भारत के दिल में स्थित छत्तीसगढ़ में समृद्ध संस्कृति परंपराए और अद्भुत प्रकृतिक विविधता हैं राज्य में प्राचीन स्मारक, दुलभ, वन्यजीव,झरने, पहाड़ी पठार, गुफाए, बौद्ध स्थल है लेकिन इन सभी पर्यटन स्थल के अलावा एक और नए पर्ययन स्थल का निर्माण किया गया जो वर्तमान में ओर आने वाले समय में भी छत्तीसगढ़ की शान बना रहेगा यह पर्यटन स्थल गिरोदपुरी में है जिसे गिरौदपूरी कहा जाता है आइए जानते है जैतस्तंभ के बारे में

जैतस्तंभ क्या है

जैतस्तंभ सतनामियों के सत्यनाम का प्रतीक जैतस्तंभ  साथ ही  सनातन पंथ की विजय कीति को प्रदर्शित करने  वाली अध्यात्मिक पताका है आमतौर पर सतनाम समुदाय के लोगों द्वारा अपने मोहल्ले, गांव में प्रमुख स्थल पर खंबे में सफेद झंडा लगा दिया जाता है जिसे जैतखाम कहा जाता हैं यहां कई तरह के धार्मिक क्रियाकलाप किए जाते हैं

जैतखाम

जैन शांति एकता और भाईचारा का प्रतीक है गिरौदपुरी में जो जैतस्तंभ बनाया गया है यहां समांतर पर जो जख्म बनाया जाता उससे बिल्कुल अलग है यहां बहुत भाग्य हैं साथ ही इसे बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है गिरौदपुरी जैतस्तंभ  दिल्ली के कुतुब मीनार से भी अधिक है इसकी ऊंचाई 77 मीटर (243) फीट जबकि कुतुबमीनार 72.5 मीटर (237) फीट ऊंची हैं सीढ़ियों से ऊपर और नीचे जाने के लिए एक स्पाइरल सिडनी भी बनाई गई है इसके अलावा लिफ्ट को विशेष रूप से बुजुर्ग, विकलांग, बच्चों ,और महिलाओं, के लिए डिजाइन किया गया जैन शांति एकता और भाईचारा का प्रतीक है गिरौदपुरी में जो जैतखाम बनाया गया है यहां समांतर पर जो जख्म बनाया जाता उससे बिल्कुल अलग है यहां बहुत भाग्य हैं साथ ही इसे बनाने के लिए आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया गया है गिरौदपुरी जैतखाम कि दिल्ली के कुतुब मीनार से भी अधिक है इसकी ऊंचाई 77 मीटर (243) फीट जबकि कुतुबमीनार 72.5 मीटर (237) फीट ऊंची हैं सीढ़ियों से ऊपर और नीचे जाने के लिए एक स्पाइरल सिडनी भी बनाई गई है इसके अलावा लिफ्ट को विशेष रूप से बुजुर्ग, विकलांग, बच्चों ,और महिलाओं, के लिए डिजाइन किया गया

Also read – लोकप्रिय पर्यटन स्थल गिरौदपुरी धाम Popular turist destination Giroudpuri Dham

यह स्तंभ कई किलोमीटर दूर से दिखाई देने लगता है सफेद स्तंभ की वास्तुकला इतनी शानदार है कि लोगों की आंखें चकरा जाती हैं यह वायुदाब और भूकंप प्रतिरोधी हैं और आसानी बिजली से और आप से बचाव के लिए उच्च तकनीकी प्रधान भी किए गए हैं इसके अलावा इसमें सात बालकानीयां भी बनाई गई है, जहां आगंतुक अपने आस पास के खुबसूरत प्राकृतिक परिदृश्य को देख पाएंगे

See also  मथुरा बेस्ट लोकप्रिय धार्मिक स्थल Mathura Best Popular Religious Places

गिरौदपुरी धाम का इतिहास

गिरौदपुरी का आध्यात्म और इतिहास से बहुत गहरा नाता रहा है. यहां देश-विदेश से पर्यटक आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में आते हैं. बाबा गुरु घासीदास ने साधारण किसान परिवार में जन्म लिया था. इनके पिता का नाम मंहगू, माता का नाम अमरौतिन और पत्नी का नाम सफुरा था. जैतखाम के ठीक बगल में आज भी उनके बैठने का स्थान स्थापित है. ऐसा भी कहा जाता है कि आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए उन्होंने औराधरा वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, जो अब तपोभूमि के नाम से प्रचलित है.

गिरौदपुरी धाम

बलौदाबाजार से 40 किमी दूर तथा बिलासपुर से 80 किमी दूर महानदी और जोंक नदियों के संगम से स्थित, गिरौधपुरी धाम छत्तीसगढ़ के सबसे सम्मानित तीर्थ स्थलों में से एक है। इस छोटे से गांव, जिसमें आध्यात्मिकता और ऐतिहासिक हित के गहरे संबंध हैं, छत्तीसगढ़ के सतनामी पंथ, गुरु घासीदास के संस्थापक का जन्मस्थान है। इस क्षेत्र के एक किसान परिवार में पैदा हुए, एक दिन वह छत्तीसगढ़ में एक बहुत सम्मानित व्यक्ति गुरु घासीदास बन गया। तीर्थयात्रियों ने उन्हें ‘सीट’ पर पूजा करने के लिए यहां पहुंचाया, जो जेट खंबा के बगल में स्थित है। कहा जाता है कि उन्होंने औरधारा वृक्ष के नीचे लंबे समय तक तपस्या की है जो अभी भी वहां है। इस पवित्र स्थान को तपोबुमी भी कहा जाता है। चरन कुंड एक पवित्र तालाब और वार्षिक गिरौदपुरी मेला की साइट है। यहां से एक और किलोमीटर प्राचीन अमृत कुंड स्थित है, जिसका पानी मीठा माना जाता है।

जैतखाम एक अद्भुत और खूबसूरत संरचना

इस तरह की डिजाइन जयपुर के जंतर-मंतर और लखनऊ की भूलभूलैया में भी इस्तेमाल की गई है. गिरौदपुरी की छत पर जाने के लिए दो लिफ्ट भी हैं. जैतखाम के चारों ओर खूबसूरत गार्डन हैं. गार्डन को देशी-विदेशी फूलों से सजाया गया है. गार्डन का विस्तार आगरा के ताजमहल और दिल्ली के मुगल गार्डन की तर्ज पर किया जा रहा है. कुतुब मीनार से ज्यादा ऊंचे इस जैतखाम को बनाने की योजना अजीत जोगी की सरकार ने तैयार की थी, पर उसे अमली जामा रमन सिंह सरकार ने पहनाया.

See also  छत्तीसगढ़ के सर्वश्रेष्ठ शीर्ष 10 मंदिर best top 10 temples in chhattisgarh

1756 को जन्मे थे बाबा

सतनाम पंथ के प्रवर्तक बाबा गुरु घासीदास का जन्म गिरौदपुरी में करीब ढाई सौ साल पहले, 18 दिसंबर 1756 को हुआ था. उन्होंने गांव के नजदीक छाता पहाड़ पर कठिन तपस्या की और अपने आध्यात्मिक ज्ञान के जरिए सत्य, अहिंसा, दया, करुणा, परोपकार की शिक्षा देकर सत्य के मार्ग पर चलने का लोगों को संदेश दिया. उनसे पीढ़ियों को प्रेरणा मिलती रहे, इस सोच के साथ जैतखाम का निर्माण कराया गया.

अमृत कुंड और चरण कुंड

गिरौदपुरी से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह का इतिहास बहुत रोचक है. कहा जाता है कि यहां पर पीने के पानी की बहुत किल्लत रहती थी. प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद यह समस्या दूर नहीं हो पा रही थी. तब एक स्थानीय साधु ने लोगों की मदद करने के उद्देश्य से अपनी दैवीय शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक पहाड़ के हिस्से को अपने अंगूठे से छूकर एक गढ्ढे में तब्दील कर दिया. जहां से मीठे पानी की जलधारा फूट पड़ी. फिर जिस कुंड में इस पानी का भंडारण किया जाने लगा, उसे अमृत कुंड का नाम दिया गया. अमृत कुंड से कुछ दूरी पर चरण कुंड भी है. माना जाता है कि यहां गुरु घासीदास बाबा ने अपने चरण धोए थे.

Also read – विश्वकर्मा पूजा 2025 कैसे करे कथा विधि और महत्व

1935 से लगता है मेला

लोगों का कहना है कि समाज की ओर से जगद्गुरू गद्दीनशीन स्वर्गीय अगम दास ने 1935 में माघ-पूर्णिमा के दिन गुरु दर्शन मेले की शुरुआत की थी. कुछ लोगों का मत है कि मेला इससे भी पहले भी लगता था, लेकिन गुरु अगम दास ने इसे जनसहयोग से अधिक व्यवस्थित रूप दिया था. करीब तीन दशक बाद 1966 में समाज प्रमुखों की आम सहमति से गुरु दर्शन मेला हर साल फाल्गुन शुक्ल पंचमी से सप्तमी तक आयोजित होता है.

रायपुर से 145 किलोमीटर की दूरी पर है गिरौदपुरी धाम

गिरौदपुरी धाम बलौदाबाजार जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर और राजधानी से 145 किलोमीटर दूर है. महानदी कछार में स्थित बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का यह छोटा सा गांव 18वीं सदी के महान समाज सुधारक गुरु बाबा घासीदास की जन्मभूमि और तपोभूमि है. गुरु दर्शन मेले के अलावा पूरे साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए इस जगह पर पगडंडियां नहीं, बल्कि साफ-सुथरी चौड़ी और पक्की सड़कें बनाई गई हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु जैतखाम को देखने और बाबा गुरू घासीदास के आशीर्वाद के लिए यहां आते हैं.

See also  Best temple in ratanpur रतनपुर मंदिर

जैतखाम के स्वरूप से समझिए महत्व

1.चबूतरा: प्राचीन समय में चबूतरा मिट्टी का बनता था, लेकिन आधुनिकता के प्रभाव के कारण अब यह ईंट व सीमेंट का बनाया जाता है। चबूतरे के समक्ष ज्योति कलश जलाकर आरती की जाती है।

2. खंभा या खाम: यह 21 हाथ लंबी लकड़ी का गोला होता है। अमूमन इसे सरई लकड़ी से बनाया जाता है। अब अन्य लकड़ियों से भी जैतखाम बनाया जाने लगा है। ऊपर लगी कांसे की टोपी मर्यादा का प्रतीक है। आजकल लकड़ी की जगह सीमेंट और लोहे के जैतखाम भी बनाए जाने लगे हैं।

3. बांस का डंडा: यह 7 हाथ की लंबाई वाला ठोस बांस से बनता है। इसे चिकना बनाया जाता है। इसकी गांठें मानवीय गुण सत्य, करुणा, प्रेम और क्षमा को दर्शाती हैं। साथ ही अपनी तथा दूसरों की सच्ची सेवा और रक्षा करने का पाठ भी पढ़ाती हैं।

4. हुक और कील: यह लोहे या अन्य धातु से बनता है। पहले दो हुक होते थे क्योंकि पहले जैतखाम भी आकार में छोटा होते थे। ये हुक सफेद ध्वज (पालों) के हवा में लहराने और उसकी कंपन को सहन कर लेते थे।

5. सफेद ध्वज: यह सफेद कपड़े का बना होता है जो आयताकार होता है। इसका कपड़ा श्वेत, स्वच्छ और मोटा होता है। पताखा की लंबाई 2/3 और चौड़ाई 1/3 के अनुपात में होती है। श्वेत ध्वज को समाज में पालो के नाम से भी जाना जाता है।

पर्यटन: गिरौदपुरी धाम में सबसे ऊंचा 77 मीटर फिट का जैतखाम  जिसका लोकार्पण गुरु घासीदास जयंती के अवसर पर 2015 में मुख्यमंत्री रमन सिंह के द्वारा किया गया था जैतखाम शानदार और अदभुत है जिसे देख कर आपको अत्यंत आनंद का अनुभव होगा

कैसे पहुंचें?

हवाई जहाज से: निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में है, जो छत्तीसगढ़ के राजधानी है। रायपुर से गिरौदपुरी धाम की दूरी करीब 140 किलोमीटर है।

रेलवे से: रायपुर से गिरौदपुरी के लिए ट्रेन सुविधा उपलब्ध है। रायपुर जंक्शन से गिरौदपुरी तक टैक्सी, बस, या अन्य सार्वजनिक परिवहन सेवाएं उपलब्ध हैं।

बस से: गिरौदपुरी धाम तक सड़क मार्ग से भी पहुँचा जा सकता है। रायपुर और गिरौदपुरी के बीच बस सेवाएं उपलब्ध हैं।

देश विदेश की पर्यटन स्थल के बारे में जानने के लिए हमारे वेबसाइट  www.travelLifeangle.com को follow like & share करे

Leave a Comment