हिंदू धर्म में महाशिवरात्रि का काफी महत्व होता है। इस साल देश भर में महाशिवरात्रि का पर्व 15 फरवरी को मनाया जाएगा। महाशिवरात्रि का पर्व भगवान शिव को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसी दिन भगवान शिव ज्योतिर्लिंग के रूप में प्रकट हुए थे और माता पार्वती के साथ उनका दिव्य विवाह भी इसी तिथि से जुड़ा माना जाता है। महाशिवरात्रि के मौके पर पूरे देश में भक्त भगवान शिव की पूजा की तैयारी कर रहे हैं। भारत में कई प्रसिद्ध शिव मंदिर हैं, लेकिन कुछ ऐसे मंदिर भी हैं जो अपनी खासियत के कारण अलग पहचान रखते हैं।
महाशिवरात्री 2026: सनातन धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक महाशिवरात्री का विशेष महत्व है। इस दिन भक्तजन व्रत रखते हैं और भगवान शिव की विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। सिद्धांत यह है कि सात्विक मन से की गई भक्ति से भगवान शिव अपने भक्तों की भावनाएं पूरी करते हैं। शास्त्रों के अनुसार, कुछ विशेष पूजन सामग्री के बिना महाशिवरात्रि की पूजा अधूरी मानी जाती है।

महाशिवरात्री 2026
महाशिवरात्रि पर आप इन स्थानों की यात्रा कर सकते हैं
1.हरिद्वार और ऋषिकेश
हरिद्वार और ऋषिकेश उन लोगों के लिए आदर्श स्थान हैं जो शांत और आध्यात्मिक रूप से समृद्ध महाशिवरात्रि का अनुभव करना चाहते हैं। ये शहर पवित्र मंदिर, शांत नदी तट और योग एवं ध्यान के अवसर प्रदान करते हैं।
ऋषिकेश के पास स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर और हरिद्वार में स्थित दक्ष महादेव मंदिर लोकप्रिय शिव मंदिरों में शामिल हैं। शाम की गंगा आरती यहाँ का मुख्य आकर्षण है और आगंतुकों पर अमिट छाप छोड़ती है।
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पहुँचने के लिए कैसे करें:
- हवाई मार्ग से: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा (देहरादून) सबसे निकटतम हवाई अड्डा है, जो दोनों शहरों से लगभग 20 से 35 किलोमीटर दूर है।
- ट्रेन द्वारा: हरिद्वार जंक्शन और ऋषिकेश रेलवे स्टेशन प्रमुख शहरों से अच्छी तरह से जुड़े हुए हैं।
- सड़क मार्ग से: दिल्ली, देहरादून और आसपास के पहाड़ी शहरों से सड़क मार्ग से आसानी से पहुँचा जा सकता है।
इनके लिए सर्वोत्तम: शांत तीर्थयात्रा, आध्यात्मिक विश्राम, प्रकृति प्रेमी
2.तुंगनाथ मंदिर, उत्तराखंड
उत्तराखंड के गढ़वाल हिमालय में 12 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर स्थित तुंगनाथ मंदिर दुनिया का सबसे ऊंचा शिव मंदिर माना जाता है। यहां पहुंचने के लिए चोपता से पैदल ट्रेक करना पड़ता है। चारों तरफ बर्फ से ढकी पहाड़ियां और शांत वातावरण इस मंदिर को बेहद खास बनाते हैं। यहां का सुकून भरा माहौल भक्तों को गहरी शांति का अनुभव कराता है, जैसा वे खासतौर पर महाशिवरात्रि के अवसर पर महसूस करना चाहते हैं।

3.पाताल भुवनेश्वर, उत्तराखंड
पाताल भुवनेश्वर भी उत्तराखंड में स्थित एक गुफा मंदिर है। यहां जमीन के नीचे चूना पत्थर की गुफाओं में प्राकृतिक आकृतियां हैं, जिन्हें देवताओं से जोड़ा जाता है। यहां तक पहुंचने के लिए संकरे रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है। गुफा के भीतर एक खास शिवलिंग है, जिसके बारे में स्थानीय लोगों का विश्वास है कि वह हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ रहा है। यहां तक कहा जाता है कि जिस दिन यह शिवलिंग गुफा की छत को छू लेगा, उस दिन दुनिया का अंत हो जाएगा।
4.मतंगेश्वर मंदिर, खजुराहो
खजुराहो का मतंगेश्वर मंदिर भी बहुत प्राचीन है। यहां करीब 8 फीट ऊंचा शिवलिंग है, जिसके बारे में मान्यता है कि इसकी ऊंचाई हर साल थोड़ी बढ़ती है।
5.भूतेश्वर महादेव, छत्तीसगढ़
छत्तीसगढ़ के जंगलों में स्थित भूतेश्वर महादेव को प्राकृतिक रूप से बना बहुत बड़ा शिवलिंग माना जाता है। स्थानीय लोगों का विश्वास है कि यह हर साल थोड़ा-थोड़ा बढ़ता है। ये सभी मंदिर अपनी अनोखी विशेषताओं और गहरी आस्था के कारण खास महत्व रखते हैं।बताते चलें कि आज पूरे देश में महाशिवरात्रि का पर्व धूमधाम से मनाया जा रहा है. कवर्धा के भोरमदेव शिव मंदिर में सुबह से भक्तों की कतार नजर आ रही है. आज शाम तक मंदिर में श्रद्धालुओं का तांता लगा रहेगा. वहीं महाशिवरात्रि पर गरियाबंद के राजिम के बाबा कुलेश्वर महादेव मंदिर में भी भक्तों का जन सैलाब उमड़ पड़ा. बाबा कुलेश्वर महादेव मंदिर विश्व प्रसिद्ध मंदिर है. आज तड़के तीन बजे से महादेव के भक्त मंदिर पहुंचने लगे थे. महाशिवरात्रि को लेकर भक्तों में जबरदस्त उत्साह नजर आ रहा है.

6.गुवाहाटी, असम
अगर आप महाशिवरात्रि के जीवंत रंगों में सराबोर होना चाहते हैं, तो गुवाहाटी जा सकते हैं। गुवाहाटी में ब्रह्मपुत्र नदी के बीचोंबीच स्थित मोर द्वीप पर उमानंदा मंदिर है। यह महाशिवरात्रि उत्सव के प्रमुख केंद्रों में से एक है, जहां दुनिया भर से हजारों श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं। असम में महाशिवरात्रि का एक और लोकप्रिय उत्सव शिवसागर में मनाया जाता है।
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7.सप्तदेव मंदिर कोरबा
कोरबा. देशभर के श्रद्धालु द्वादश ज्योतिर्लिंगों के दर्शनों की यात्रा पर निकलते हैं, वहीं छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में एक ऐसा अद्भुत मंदिर है, जहां भक्तों को एक ही स्थान पर सभी 12 ज्योतिर्लिंगों के दर्शन का सौभाग्य प्राप्त होता है. कोरबा मुख्य मार्ग पर स्थित प्रसिद्ध सप्तदेव मंदिर न केवल कोरबा बल्कि आसपास के जिलों के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र है. इस मंदिर की सबसे विशेष और आकर्षक बात यह है कि यहां सोमनाथ, मल्लिकार्जुन, महाकालेश्वर, ओंकारेश्वर, केदारनाथ, भीमाशंकर, काशी विश्वनाथ, त्र्यंबकेश्वर, वैद्यनाथ, नागेश्वर, रामेश्वरम और घृष्णेश्वर, इन 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों का प्रतिष्ठापन किया गया है. यहां उन सभी भक्तों की मनोकामना पूरी होती है, जो विभिन्न कारणों से दूरदराज के इन तीर्थस्थलों की यात्रा नहीं कर पाते. यहां आकर श्रद्धालु एक ही छत के नीचे सभी ज्योतिर्लिंगों के साक्षात दर्शन करके स्वयं को धन्य अनुभव करते हैं.

सप्तदेव मंदिर में नियमित रूप से प्रातः और सायंकाल पूजा-अर्चना, आरती और विशेष अनुष्ठानों का आयोजन होता है. महाशिवरात्रि के पावन दिन यहां का नजारा ही कुछ और होता है. आज (रविवार) तड़के से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. महाशिवरात्रि पर्व के अवसर पर मंदिर परिसर को भव्य रूप से सजाया गया है. आज के दिन विशाल शोभायात्रा, रुद्राभिषेक, भजन-कीर्तन तथा रात्रि जागरण जैसे कार्यक्रमों का आयोजन होता है, जिसमें हजारों श्रद्धालु शामिल होते हैं. कोरबा के स्थानीय निवासियों के अलावा, बिलासपुर, जांजगीर-चांपा सहित आसपास के जिलों से भी भक्तों की भीड़ उमड़ती है.
8. श्रीशैलम, आंध्र प्रदेश
आंध्र प्रदेश के कुरनूल जिले में स्थित श्रीशैलम एक लोकप्रिय पहाड़ी शहर है। इसके अलावा, यह शिव के ज्योतिर्लिंग सहित कई प्राचीन मंदिरों का घर है। प्रचलित मान्यताओं के अनुसार, यह वही स्थान है जहां भगवान शिव ने पौराणिक तांडव साधना की थी। इस ज्योतिर्लिंग का एक अन्य नाम मल्लिकार्जुन है क्योंकि इसकी पूजा आमतौर पर चमेली के फूलों से की जाती है।
9. रामेश्वरम, तमिलनाडु
यह स्थान रामनाथस्वामी मंदिर, रामेश्वरम का घर है, जो भारत के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है। यह मंदिर रामायण से जुड़ा हुआ है। ऐसा कहा जाता है कि भगवान राम ने देवी सीता को बचाने और रावण का वध करने के बाद अयोध्या लौटने पर यहां भगवान शिव की पूजा की थी। हर साल महाशिवरात्रि पर हजारों श्रद्धालु इस मंदिर में दर्शन के लिए आते हैं। मंदिर में जाने से पहले श्रद्धालु 22 पवित्र कुओं में स्नान करते हैं। इस मंदिर में महाशिवरात्रि उत्सव के मुख्य आकर्षण महा रुद्राभिषेकम, विशेष दर्शन और विशेष संध्या पूजा हैं।

10. कोयंबटूर, तमिलनाडु
इस स्थान पर ईशा योग केंद्र में भगवान शिव की विश्व प्रसिद्ध 112 फीट ऊंची प्रतिमा स्थित है, जो दुनिया की सबसे बड़ी आच्छादित प्रतिमा है। इसलिए, जब आप भारत में महाशिवरात्रि मनाने के लिए सबसे अच्छे स्थानों की तलाश कर रहे हों, तो ईशा फाउंडेशन की महाशिवरात्रि को न भूलें। इस उत्सव के दौरान, यहां रात भर सत्संग, भजन और नृत्य प्रस्तुतियां आयोजित की जाती हैं और इन सभी कार्यक्रमों में स्वयं सद्गुरु उपस्थित रहते हैं। इस विशेष दिन पर, भक्त उपवास रखते हैं और जरूरतमंदों के बीच दान और सद्भावना का प्रसार करते हैं।
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11.सोमनाथ मंदिर
गुजरात में स्थित सोमनाथ मंदिर एक और शक्तिशाली ज्योतिर्लिंग है और भारत के सबसे सुंदर शिव मंदिरों में से एक है। अरब सागर के तट पर स्थित सोमनाथ मंदिर महाशिवरात्रि के दौरान एक अनूठा आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
इस मंदिर में रात भर प्रार्थनाएं, भजन और विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं। समुद्र की लहरों की ध्वनि और भक्तिमय मंत्रों का संयोजन एक शांत और मन को प्रसन्न करने वाला वातावरण बनाता है।
पहुँचने के लिए कैसे करें:
- हवाई मार्ग से: दीव हवाई अड्डा (लगभग 85 किमी दूर) सबसे निकटतम हवाई अड्डा है। यदि राजकोट हवाई अड्डा सीधे आपके शहर से जुड़ा हुआ है, तो यह एक अन्य विकल्प है।
- ट्रेन द्वारा: वेरावल रेलवे स्टेशन सबसे निकटतम रेलवे स्टेशन है, जो मंदिर से कुछ ही किलोमीटर दूर है।
- सड़क मार्ग से: सोमनाथ मंदिर अहमदाबाद, राजकोट और दीव जैसे शहरों से सड़क मार्ग से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है।
12.बैद्यनाथ धाम, देवघर (झारखंड)
देवघर स्थित बैद्यनाथ धाम सबसे पूजनीय ज्योतिर्लिंगों में से एक है और महाशिवरात्रि के दौरान बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए आते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मंदिर में उपचार करने की शक्ति है और यह विशेष रूप से उन लोगों के बीच लोकप्रिय है जो स्वास्थ्य और कल्याण के लिए आशीर्वाद चाहते हैं।
त्यौहार के दौरान पूरा शहर भक्ति, मेलों और सांस्कृतिक गतिविधियों से जीवंत हो उठता है। भीड़भाड़ के बावजूद, आध्यात्मिक वातावरण मजबूत और उत्साहवर्धक बना रहता है।

पहुँचने के लिए कैसे करें:
- हवाई मार्ग से: देवघर हवाई अड्डे की कनेक्टिविटी सीमित है; इसके विकल्प के रूप में पटना या रांची हवाई अड्डों का उपयोग किया जा सकता है।
- ट्रेन द्वारा: देवघर रेलवे स्टेशन और जसडीह जंक्शन शहर को भारत के प्रमुख शहरों से जोड़ते हैं।
- सड़क मार्ग से: पटना, रांची और आसपास के शहरों से नियमित बसें और टैक्सियाँ चलती हैं।
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शिवलिंग की परिक्रमा का नियम क्या है?
शास्त्रों के अनुसार, शिवलिंग की कभी भी पूरी परिक्रमा नहीं की जाती है।शिवलिंग के चारों ओर घूमने के बजाय केवल आधी परिक्रमा करने का विधान है।
शिवलिंग से जहां से अभिषेक का जल बाहर निकलता है, उसे ‘सोमसूत्र’ या ‘निर्मली’ कहा जाता है। धार्मिक मान्यता है कि सोमसूत्र में शिव और शक्ति की प्रचंड ऊर्जा प्रवाहित होती है। इसे लांघने से व्यक्ति के शरीर और ऊर्जा चक्रों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
शिवलिंग की परिक्रमा हमेशा बाईं ओर से शुरू करनी चाहिए। जलाधारी तक जाकर उसे बिना लांघे वापस मुड़ जाना चाहिए और दूसरी तरफ से फिर जलाधारी तक आना चाहिए। इसे ‘चंद्राकार’ या ‘अर्ध-परिक्रमा’ कहा जाता है।
शिवलिंग की परिक्रमा कब और कैसे करें?
हमेशा जलाधारी के बाईं ओर से शुरू करें।
अभिषेक और पूजा संपन्न करने के बाद ही परिक्रमा करें। महाशिवरात्रि पर चारों प्रहर की पूजा के बाद परिक्रमा करना अत्यंत फलदायी माना गया है।
परिक्रमा करते समय मन ही मन ‘ऊं नमः शिवाय’ का जाप करें। ध्यान रहे कि परिक्रमा के दौरान आपके पैर सोमसूत्र को स्पर्श न करें।
महाशिवरात्रि के दिन शिव पुराण के अनुसार 1, 3, 5 या 7 बार आधी परिक्रमा करना शुभ माना जाता है। विषम संख्या में की गई परिक्रमा आध्यात्मिक उन्नति के लिए श्रेष्ठ है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न – महाशिवरात्रि 2026
1. महाशिवरात्रि 2026 कब मनाई जाएगी?
15 फरवरी 2026 की शाम से 16 फरवरी 2026 की शाम तक।
2. क्या महाशिवरात्रि पर उपवास करना अनिवार्य है?
नहीं। उपवास करना वैकल्पिक है और यह आपके स्वास्थ्य के अनुकूल होना चाहिए।
3. क्या नौसिखिए शिवरात्रि पूजा कर सकते हैं?
जी हां। साधारण पूजा पूरी तरह से स्वीकार्य है।
4. शिवरात्रि पूजा करने का सबसे अच्छा समय कौन सा है?
मध्यरात्रि, जिसे निशिता काल के नाम से जाना जाता है।
5. क्या महिलाएं महाशिवरात्रि व्रत रख सकती हैं?
हां, बिना किसी प्रतिबंध के।
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