दुर्गावती टाइगर रिजर्व कहां है? सागर के पास घूमने योग्य Wildlife Places

इस लेख में दुर्गावती टाइगर रिजर्व की प्राकृतिक सुंदरता, वन्यजीवों और पर्यटन महत्व के बारे में जानकारी दी गई है। टाइगर रिजर्व की खासियत, यहां की हरियाली और जंगल सफारी के आकर्षण को सरल शब्दों में प्रस्तुत करने का प्रयास किया है, ताकि पाठकों को मध्य प्रदेश के इस खूबसूरत वन क्षेत्र के बारे में रोचक जानकारी मिल सके।

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व वीरांगना रानी दुर्गावती के नाम पर बना यह अभ्यारण रिजर्व अपनी समृद्ध जैव विविधता के लिए जाना जाता है। इसकी स्थापना 1997 में हुई थी और यह लगभग 550 वर्ग किलोमीटर के क्षेत्र में फैला हुआ है। यह रिजर्व बंगाल टाइगर, भारतीय तेंदुआ और हिरणों की विभिन्न प्रजातियों सहित विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों और जीवों का घर है। वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व वन्यजीव उत्साही और प्रकृति प्रेमियों को प्राकृतिक दुनिया की सुंदरता को देखने का अवसर प्रदान करता है।

दुर्गावती टाइगर रिजर्व मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों के वन क्षेत्र में स्थित है। यह टाइगर रिजर्व विंध्य पर्वतमाला के प्राकृतिक जंगलों में फैला हुआ है और अपनी जैव विविधता, हरियाली तथा वन्यजीवों के लिए प्रसिद्ध माना जाता है।

यह क्षेत्र पहले रानी दुर्गावती अभयारण्य के नाम से जाना जाता था, बाद में इसे टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया। यहां बाघ, तेंदुआ, हिरण, भालू और कई दुर्लभ पक्षियों की प्रजातियां पाई जाती हैं।


दुर्गावती टाइगर रिजर्व की खास बातें

  • मध्य प्रदेश का नया टाइगर रिजर्व
  • घने जंगल और प्राकृतिक पहाड़ियां
  • बाघों के संरक्षण के लिए महत्वपूर्ण क्षेत्र
  • वन्यजीव पर्यटन के लिए उभरता स्थान
  • प्रकृति प्रेमियों और फोटोग्राफरों के लिए आकर्षक जगह
दुर्गावती टाइगर रिजर्व

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व मुख्य रूप से अपनी समृद्ध जैव विविधता, बाघों के पुनर्वास और भारत के तीसरे चीता आवास (Cheetah Habitat) के रूप में विकसित होने के लिए प्रसिद्ध है। यह मध्य प्रदेश का सातवां टाइगर रिजर्व है, जो सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिलों में फैला हुआ है। मध्य प्रदेश सरकार ने वीरांगना दुर्गावती टाईगर रिजर्व के निर्माण का आदेश जारी कर दिया है. यह टाइगर रिज़र्व दमोह, सागर और नरसिंहपुर जिले की सीमा में 400 किलोमीटर से ज्यादा एरिया में फैला होगा. रानी दुर्गावती टाईगर रिजर्व का बफर क्षेत्र 925 वर्ग किलोमीटर का होगा. बताया जाता है कि केन- बेतवा लिंक परियोजना के कारण पन्ना नेशनल पार्क का काफी हिस्सा प्रभावित हो रहा है.

प्रसिद्धि के प्रमुख कारण

  • चीता पुनर्वास केंद्र: कूनो के बाद, यह भारत में चीतों का तीसरा प्रमुख घर बनने जा रहा है, जहाँ चीतों के लिए विशेष सॉफ्ट रिलीज बोमा (बाड़ा) विकसित किया गया है।
  • समृद्ध जैव विविधता: यह क्षेत्र बाघों, तेंदुओं, और विभिन्न प्रकार के हिरणों (चीतल, सांभर) का प्राकृतिक आवास है।
  • ऐतिहासिक और प्राकृतिक महत्व: यह क्षेत्र रानी दुर्गावती के नाम पर रखा गया है, और यहाँ ऐतिहासिक सिंघोरगढ़ किला स्थित है।
  • विशाल संरक्षित क्षेत्र: यह नौरादेही अभ्यारण्य और दुर्गावती वन्यजीव अभयारण्य को मिलाकर बनाया गया है, जो प्रदेश के सबसे बड़े संरक्षित क्षेत्रों में से एक है।
  • पारिस्थितिक गलियारा : यह रिजर्व विभिन्न वन्यजीव आवासों के बीच एक महत्वपूर्ण लिंक के रूप में कार्य करता है।

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मध्य प्रदेश में 6 टाइगर रिजर्व

भारत के अंदर लगभग 53 टाइगर रिजर्व हैं, जिनमें अकेले मध्य प्रदेश के अंदर ही अभी तक 6 टाइगर रिजर्व हैं. पूरे देश के अंदर पाए जाने वाले 3167 बाघों में से 700 से अधिक बाघ केवल मध्य प्रदेश में ही हैं, इसीलिए मध्य प्रदेश को देश के अंदर बाघ संरक्षण का केंद्र भी माना जाता है. मध्य प्रदेश में भोपाल रीजन हमेशा से बाघों की पहली पसंद रहा है. साथ ही साथ रीवा और जबलपुर के वन क्षेत्र भी बाघों को हमेशा आकर्षित करते हैं. इसी के चलते मध्य प्रदेश में टाइगर प्रोजेक्ट को बढ़ाने का कार्य किया जा रहा है.

वन विभाग के सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार 29 जुलाई को वर्ल्ड टाइगर डे से पहले होगी शुरुआत फिर नोटिफिकेशन कभी भी हो सकता है. नौरादेही, रानी दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर प्रस्तावित नए टाइगर रिजर्व का नाम क्या होगा फिलहाल ये तय नहीं है, लेकिन राष्ट्रीय वन्यप्राणी बोर्ड की स्वीकृति के बाद इसे प्रदेश के 7 वें टाइगर रिजर्व के रूप में देश में नई पहचान मिलेगी. केंद्र की स्वीकृति के बाद अब अगले पखवाड़े तक प्रदेश शासन से अधिकृत घोषणा की जा सकती है. अभी पन्ना, बांधवगढ़, कान्हा, पेंच, सतपुड़ा, संजय दुबरी सीधी में टाइगर रिजर्व है.

रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व कब बना था

मध्य प्रदेश में वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व आधिकारिक तौर पर सितंबर 2023 में बनाया गया था। यह सागर जिले के नौरादेही अभयारण्य और दमोह जिले के वीरांगना दुर्गावती अभयारण्य को मिलाकर बनाया गया है, जो राज्य का सातवां और देश का 55 वां टाइगर रिजर्व है।

1975 से शुरुआत

दरअसल साल 1975 में मध्य प्रदेश के सबसे बड़े अभ्यारण का गठन एक छोटे से गांव नौरादेही के नाम पर किया गया था. मुख्य रूप से यहां भेड़ियों को संरक्षित करने के लिए सेंचुरी तैयार की गई थी. लेकिन, 2008 तक यहां पर बाघ पाए जाने के भी प्रमाण मिलते हैं. एक दशक तक बाघ विहीन होने के बाद यहां पर दूसरे टाइगर रिजर्व से बाघिन राधा और बाघ किशन की जोड़ी को लाया गया था. 2018 से 2024 तक 6 साल में इनकी संख्या 2 से बढ़कर 19 पर पहुंच गई. इसमें केवल टेरिटरी के संघर्ष को लेकर हुई एक बाघ की मौत को छोड़ दें तो कभी कोई बुरी खबर सामने नहीं आई. 2300 वर्ग किलोमीटर में फैले रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व में 35 तरह की घास, 250 प्रकार के पक्षी भी हैं. 20 सितंबर 2023 में इसका वीरांगना रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व के रूप में घोषणा की गई थी.

वीरांगना टाइगर रिजर्व

वीरांगना दुर्गावती टाइगर रिजर्व के बारे में मुख्य तथ्य:

  • स्थापना: सितंबर 2023
  • स्थान: मध्य प्रदेश के सागर, दमोह और नरसिंहपुर जिले।
  • क्षेत्रफल: यह लगभग वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है, जो इसे राज्य के सबसे बड़े टाइगर रिजर्व में से एक बनाता है।
  • विशेषता: इसे चीतों (Cheetahs) को बसाने के लिए विशेष रूप से विकसित किया जा रहा है।
  • अन्य जानकारी:
भारत में बाघों को देखने का सबसे अच्छा समय

भारत में बाघों को देखने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। इस दौरान मौसम शुष्क रहता है और वनस्पति कम घनी होती है, जिससे बाघों को देखना आसान हो जाता है। साथ ही, गर्मी भी बहुत अधिक नहीं होती, जिससे पर्यटकों के लिए सफारी पर जाना आरामदायक होता है। अप्रैल से जून के महीने भी बाघों को देखने के लिए अच्छे होते हैं, लेकिन इस दौरान गर्मी बहुत तेज होती है और वनस्पति घनी होती है, जिससे बाघों को देखना मुश्किल हो जाता है।

जुलाई से सितंबर तक चलने वाला मानसून का मौसम बाघों को देखने के लिए अनुकूल नहीं होता। बारिश से वनस्पति घनी हो जाती है और बाघ ऊँची जगहों पर चले जाते हैं। इसके अलावा, बाढ़ और भूस्खलन के खतरे के कारण इस दौरान अधिकांश राष्ट्रीय उद्यान बंद रहते हैं।

महत्वपूर्ण जानकारी:

  • पार्क कब खुला रहता है: आमतौर पर 15/16 अक्टूबर से 30 जून तक।
  • बंद रहने का समय: मानसून के कारण 1 जुलाई से 30 सितंबर तक पार्क बंद रहता है।
  • सफारी बुकिंग: भीड़ से बचने के लिए पहले से योजना बनाना बेहतर है।

मौसम के अनुसार भ्रमण:

  • सर्दी (नवंबर-मार्च): सुहावना मौसम, पक्षियों को देखने और घने जंगलों का आनंद लेने के लिए सबसे अच्छा।
  • गर्मी (अप्रैल-जून): बाघ और अन्य जानवरों को पानी के स्रोतों के पास देखने के लिए बेहतरीन, हालांकि मौसम गर्म रहता है।
रानी दुर्गावती टाइगर रिजर्व कैसे पहुंचें?

यातायात के प्रमुख साधन:

हवाई मार्ग (By Air): निकटतम हवाई अड्डा जबलपुर (Jabalpur) है।

रेल मार्ग (By Train): निकटतम रेलवे स्टेशन दमोह (Damoh) और जबलपुर (Jabalpur) हैं।

सड़क मार्ग (By Road):

  • जबलपुर से: 95 किमी (लगभग 2-3 घंटे)।
  • दमोह से: 70 किमी (लगभग 1.5-2 घंटे)।
  • अन्य शहर: सागर (70 किमी), नरसिंहपुर (110 किमी)।
  • स्थानीय परिवहन: जिला दमोह के अनुसार, जबेरा से लगभग 11 किमी दूर स्थित इस पार्क में सफारी के लिए निजी या किराए की फोर-व्हीलर गाड़ी से आना सबसे अच्छा है

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