गिरौदपूरी हैं बाबा का जन्म स्थान Giraudpuri is the birth place of Baba

छत्तीसगढ़ को महात्माओं की जन्म स्थली कहा जाता है इनमें से 18 वीं सदी में छत्तीसगढ़ के सतनाम धर्म के प्रवर्तक सतगुरु बाबा घासीदास जी का जन्म 1756 में पिता महंगूदास और माता अमरौतिन के घर ग्राम गिरौदपुरी में धाम हुआ था

बलौदा बाजार से 40 किलोमीटर दूर तथा बिलासपुर से 80 किलोमीटर दूर महानदी और जोंक नदियों के संगम से स्थित, गिरौदपूरी धाम छत्तीसगढ़ के सबसे सम्मानित तीर्थ स्थलों में से एक हैं  एक छोटे से गांव जिसमें आध्यात्मिक और ऐतिहासिक हित के गहरे संबंध है छत्तीसगढ़ के सतनामी पंथ,गुरुघासी दास के संस्थापक का जन्म स्थान है इस क्षेत्र के एक किसान परिवार में पैदा हुआ एक दिन वह छत्तीसगढ में एक बहुत सम्मानित व्यक्ति गुरु घासीदास बन गए तीर्थ यात्रियों ने इन्हे सीट पर पूजा करने के लिए यह पहुंचाया,जो जैत स्थंब के बगल में स्थित हैं यहां कहा जाता हैं की गुरु घासीदास ओरा धौरा वृक्ष के नीचे बैठ कर तपस्या किया जो अभी तक वहा है इस पवित्र स्थान को तपोभूमि कहा जाता हैं चारण कुंड एक पवित्र तालाब है जो गिरौदपूरी में स्थित है यहां से एक किलो मीटर की दूरी पर अमृतकुंड हैं जिसका पानी बहुत मीठा होता हैं

जैतखाम

 गिरौदपूरी का मेला – प्रत्येक वर्ष यहां फागुन माह के शुक्ल पक्ष में पंचमी, षष्ठी और सप्तमी को तीन दिवसीय विशाल मेला का आयोजन होता है इस मेले में दूर-दूर से लोग देखने के लिए आते हैं और 3 दिनों तक मेला  का आनंद उठाते हैं गिरौदपुरी मेला में 3 दिनों में ही लोगों की संख्या लाखों के संख्या से पार हो  जाता है लोग सिर्फ बाबा जी के गुरुगद्दी ओर आशिर्वाद ओर दर्शन के लिए पहुंचते हैं

Also read – पुष्कर मेला राजस्थान : विश्व का सबसे बड़ा ऊंटों का मेला 2025

गिरौदपुरी धाम का इतिहास

गिरौदपुरी का आध्यात्म और इतिहास से बहुत गहरा नाता रहा है. यहां देश-विदेश से पर्यटक आध्यात्मिक ज्ञान की खोज में आते हैं. बाबा गुरु घासीदास ने साधारण किसान परिवार में जन्म लिया था. इनके पिता का नाम मंहगू, माता का नाम अमरौतिन और पत्नी का नाम सफुरा था. जैतखाम के ठीक बगल में आज भी उनके बैठने का स्थान स्थापित है. ऐसा भी कहा जाता है कि आत्मज्ञान की प्राप्ति के लिए उन्होंने औराधरा वृक्ष के नीचे तपस्या की थी, जो अब तपोभूमि के नाम से प्रचलित है.

  • पूरे देश से जैतखाम को देखने आते हैं श्रद्धालु

गिरौदपुरी धाम जैतखाम जैसी शानदार संरचना के लिए भी जाना जाता है. इंजीनियरिंग का करिश्मा कही जाने वाली यह 77 मीटर ऊंची संरचना देखने में वाकई अद्भुत लगती है. सतनामी संप्रदाय के शाश्वत प्रतीक के रूप में पूरी दुनिया को लुभाती विश्व की ये सबसे ऊंची मीनार है. जैतखाम इतना आकर्षक है कि दूर-दूर से लोग इसे देखने के लिए आते हैं.

  • अमृत कुंड और चरण कुंड

गिरौदपुरी से महज 1 किलोमीटर की दूरी पर स्थित इस जगह का इतिहास बहुत रोचक है. कहा जाता है कि यहां पर पीने के पानी की बहुत किल्लत रहती थी. प्रशासन के तमाम प्रयासों के बावजूद यह समस्या दूर नहीं हो पा रही थी. तब एक स्थानीय साधु ने लोगों की मदद करने के उद्देश्य से अपनी दैवीय शक्तियों का इस्तेमाल करते हुए एक पहाड़ के हिस्से को अपने अंगूठे से छूकर एक गढ्ढे में तब्दील कर दिया. जहां से मीठे पानी की जलधारा फूट पड़ी. फिर जिस कुंड में इस पानी का भंडारण किया जाने लगा, उसे अमृत कुंड का नाम दिया गया. अमृत कुंड से कुछ दूरी पर चरण कुंड भी है. माना जाता है कि यहां गुरु घासीदास बाबा ने अपने चरण धोए थे.

  • गुरु घासीदास जी की गद्दी –  गिरौदपुर के मुख्यद्वार के सामने पुराना जैतख्म्भ  है। इसी जैतखम्भ से लगा हुई उत्तर दिशा में गुरु घासीदास की गद्दी बनी हुई है।  इस गद्दी के दर्शन हेतु दूर दूर से दर्शनार्थी आते हैं। प्रतिदिन गुरुजी गद्दी पर दीप प्रज्जवलित किया जाता है तथा आरती उतारी जाती है। गुरुगद्दी के दर्शन करने को धर्मानुयायी अपना सौभाग्य समझते हैं।
  • तपस्थली – गिरौदपुरी से पूर्व दिशा में लगभग एक किमी की दूरी पर पहाड़ियों के मध्य नीचे स्थान पर कुण्ड है, जिसे अमृत कुण्ड कहा जाता है। इस अमृत कुण्ड के जल को बरसों रखने पर जल खराब नहीं होता, इस कारण ही इसे अमृत कुण्ड कहा जाता है। पर्यटकों के लिए यह विशेष दर्शनीय है।
  • चरण कुण्ड – गिरौदपुरी  स्थित मेला स्थल पांच गद्दी से लगा हुआ दक्षिण दिशा में एक कुण्ड है, जिसे चरण कुण्ड कहा जाता है।
  • सुफ़रा मठ – गुरु घासीदास के जन्म स्थल से करीब 200 गज की दूरी पर पूर्व दिशा में एक छोटा सा जलाशय है, जिसके समीप उत्तर दिशा में सुफ़रा मठ है। इस मठ के विषय में किंवदन्ती है कि गुरु घासीदास के बड़े पुत्र अमरदास के वन में खो जाने के वियोग में सुफ़रा जी ने समाधि लगा ली थी, जिसे लोगों ने मृत समझकर गुरु घासीदास जी की अनुपस्थिति में उपरोक्त स्थान पर दफ़ना दिया था। उनकी समाधि की अवधि समाप्त होने पर उन्होंने अपनी पत्नी को जीवित किया था। मेला के अवसर इस स्थल का दर्शन करने दूर दूर से पर्यटक आते हैं।

Also read – छत्तीसगढ़ पर्व गुरु घासीदास जयंती 18 दिसंबर गिरौदपुरी धाम

  • पंच कुण्डी – गुरु घासीदास जी की जन्म स्थली गिरौदपुरी में स्थित पहाड़ियों में पांच कुण्ड अलग अलग स्थानों पर विद्यमान हैं, इनमें से एक चरणकुण्ड, अमृतकुण्ड, सूर्यकुण्ड व दो अन्य कुण्ड हैं, जिन्हें पंचकुण्डी कहा जाता है। बाबा जी के दर्शनार्थी मानते हैं कि जब तक इन पांचों कुण्डों का दर्शन नहीं कर लेते, तब तक गुरु की जन्मस्थली दर्शन का पुण्य नहीं मिलता।  इस परम्परा के कारण यहाँ तांता लगा रहता है। पौष पूर्णिमा को यहाँ विशेष मेला भरता है।  पर्यटन के दृष्टिकोण से छत्तीसगढ़ में सतनाम समाज का यह प्रमुख तीर्थ स्थल है।
  • छाता पहाड़- गिरौदपुरी स्थित बाबा घासीदास जी की तपोस्थली से लगभग 8 किमी पूर्व दिशा की ओर महाराज बस्ती में करीब उत्तर पूर्व स्थित पहाड़ी में बहुत बड़ी शिला है, जिसे छाता पहाड़ कहा जाता है। गुरु घासीदास जी इस पर्वत की एक शिला पर बैठकर 6 माह तक समाधि लगाए थे। इस शिला पर चढ़ने के लिए कोई व्यवस्था नहीं है। पूर्व की ओर इमली का पेड़ है, जिसे पकड़कर ऊपर चढ़ना पड़ता है। इस पवित्र स्थल चढ़ने के लिए दर्शनार्थियों की भीड़ लगी रहती है।

  • 1935 से लगता है मेला

लोगों का कहना है कि समाज की ओर से जगद्गुरू गद्दीनशीन स्वर्गीय अगम दास ने 1935 में माघ-पूर्णिमा के दिन गुरु दर्शन मेले की शुरुआत की थी. कुछ लोगों का मत है कि मेला इससे भी पहले भी लगता था, लेकिन गुरु अगम दास ने इसे जनसहयोग से अधिक व्यवस्थित रूप दिया था. करीब तीन दशक बाद 1966 में समाज प्रमुखों की आम सहमति से गुरु दर्शन मेला हर साल फाल्गुन शुक्ल पंचमी से सप्तमी तक आयोजित होता है.

रायपुर से 145 किलोमीटर की दूरी पर है गिरौदपुरी धाम

गिरौदपुरी धाम बलौदाबाजार जिला मुख्यालय से 50 किलोमीटर और राजधानी से 145 किलोमीटर दूर है. महानदी कछार में स्थित बलौदाबाजार-भाटापारा जिले का यह छोटा सा गांव 18वीं सदी के महान समाज सुधारक गुरु बाबा घासीदास की जन्मभूमि और तपोभूमि है. गुरु दर्शन मेले के अलावा पूरे साल आने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए इस जगह पर पगडंडियां नहीं, बल्कि साफ-सुथरी चौड़ी और पक्की सड़कें बनाई गई हैं. हर साल लाखों श्रद्धालु जैतखाम को देखने और बाबा गुरू घासीदास के आशीर्वाद के लिए यहां आते हैं.

Also read – छत्तीसगढ़ में 20 सर्वश्रेष्ठ जगह गर्मी में घूमने के लिए

यात्रा का कार्यक्रम:-

यह यात्रा आमतौर पर 1 से 2 दिनों की होती है, और इसे आपकी आवश्यकताओं के अनुसार अनुकूलित किया जा सकता है। आप अपनी यात्रा में उपरोक्त स्थलों के दर्शन के साथ–साथ स्थानीय संस्कृति और परंपराओं का अनुभव भी कर सकते हैं।

यात्रा में शामिल गतिविधियां:

  • जैतखाम और मंदिरों के दर्शन ।
  • धार्मिक प्रवचनों और प्रार्थनाओं में भाग लेना।
  • स्थानीय संतों और गुरुओं से मिलना।
  • प्राकृतिक सौंदर्य का आनंद लेना।
  • स्थानीय बाजारों और हस्तशिल्प केंद्रों का भ्रमण।

यात्रा का लाभ:-

  • आध्यात्मिक ज्ञान और शांति की प्राप्ति।
  • छत्तीसगढ़ की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत का अनुभव करना।
  • एक शांत और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना।
  • दैनिक जीवन के तनाव से मुक्ति।

यह यात्रा उन लोगों के लिए बिल्कुल सही है जो:- 

  • धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा में रुचि रखते हैं।
  • छत्तीसगढ़ की संस्कृति और इतिहास को जानना चाहते हैं।
  • एक शांत और प्राकृतिक वातावरण में समय बिताना चाहते हैं।
  • दैनिक जीवन के तनाव से मुक्ति चाहते हैं।

यह यात्रा आपके जीवन का एक अविस्मरणीय अनुभव होगी।

पर्यटन और सांस्कृतिक महत्व

  • जैतखाम: गिरौदपुरी धाम में स्थित यह सफेद स्तंभ शांति और एकता का प्रतीक है। इसकी भव्यता और वास्तुकला पर्यटकों को आकर्षित करती है।
  • बारस पूर्णिमा मेला: यह मेला गुरु घासीदास बाबा की जयंती के अवसर पर आयोजित होता है और दूर-दूर से लोग इसमें शामिल होने आते हैं। यह समय सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पूजा-अर्चना, और सामाजिक मिलन का होता है।
  • आध्यात्मिक सेवाएँ और सामाजिक कार्य: गिरौदपुरी धाम में विभिन्न आध्यात्मिक और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें ध्यान, प्रार्थना, शिक्षा, और समाज सेवा शामिल हैं।गिरौदपुरी धाम न केवल एक धार्मिक स्थल है बल्कि यह एक सांस्कृतिक और सामाजिक मिलन का केंद्र भी है, जो विभिन्न समुदायों के लोगों को एक साथ एक जगह जोड़ता हैं।
गिरौदपूरी धाम कैसे पहुंचे

बाय एयर गिरौदपुरी धाम आने के लिए सबसे नजदीक रायपुर  हवाई अड्डा  के बाद सड़क मार्ग से गिरौदपूरी धाम पहुंचा जा सकता हैं

ट्रेन द्वारा – गिरौदपुरी धाम आने के लिए भाटापारा रायपुर बिलासपुर और महासमुंद रेलवे स्टेशन यहां पहुंचने के बाद सड़क मार्ग से गिरौदपुरी धाम पहुंचा जा सकता है

सड़क मार्ग के द्वारा – गिरौदपुरी धाम रायपुर ,महासमुंद,  बलौदा बाजार, भाटापारा, कसडोल से नारायणपुर ,सारंगढ़ ,बसना आदि शहरों से सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है

Leave a Comment