कोरबा जिला छत्तीसगढ़ का एक प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है। यहां केवल उद्योग और कोयला खदानें ही नहीं, बल्कि कई प्राचीन मंदिर भी मौजूद हैं, जो हर साल हजारों श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। यदि आप धार्मिक यात्रा, प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक धरोहर का अनुभव एक साथ करना चाहते हैं, तो कोरबा के मंदिर आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं। 2026 में कोरबा घूमने की योजना बना रहे हैं तो यह गाइड आपके लिए उपयोगी साबित होगी।
korba के मंदिर घूमने का सबसे अच्छा समय
कोरबा शहर में साल भर मौसम सुहावना रहता है। लेकिन इस शहर घूमने का सबसे अच्छा समय अक्टूबर से मार्च तक है। यह मानसून के बाद और सर्दियों का समय होता है, जब मौसम सबसे सुहावना होता है। इसलिए यहां आने वाले पर्यटकों को हर जगह छाता लेकर घूमने की जरूरत नहीं पड़ती और न ही उन्हें चिलचिलाती धूप में भटकना पड़ता है। यह मौसम की किसी भी समस्या के बिना शहर घूमने का सबसे अच्छा समय है।
कोरबा कैसे पहुँचें?
कोरबा शहर में परिवहन की कोई समस्या नहीं है। एक तेजी से विकसित हो रहे शहर के रूप में, कोरबा सड़क, रेल और हवाई नेटवर्क से अच्छी तरह जुड़ा हुआ है। आइए इस कनेक्टिविटी पर विस्तार से नज़र डालें
सड़क मार्ग से: राष्ट्रीय राजमार्ग 111 korba को आसपास के प्रमुख शहरों से जोड़ता है। यहां सड़क परिवहन में निजी बसें, सरकारी बसें और टैक्सियाँ शामिल हैं। आसपास के प्रमुख शहरों और कस्बों के लिए सरकारी बसें आसानी से उपलब्ध हैं। इसके अलावा, स्थानीय परिवहन में मीटर वाली टैक्सियाँ और ऑटो भी शामिल हैं।
पूरे शहर में टैक्सियाँ और ऑटो दूरी के अनुसार मामूली किराया लेते हैं। स्थानीय यात्रा के लिए साझा टैक्सियाँ और ऑटो भी उपलब्ध हैं, जिनमें किराया प्रति सीट के आधार पर होता है।
हवाई मार्ग से: कोरबा शहर का निकटतम हवाई अड्डा रायपुर में स्थित है, जो शहर से लगभग 213 किलोमीटर दूर है।
रेल मार्ग से: कोरबा का अपना रेलवे स्टेशन है। इस स्टेशन से प्रमुख शहरों और राज्यों के लिए नियमित ट्रेनें उपलब्ध हैं। कोरबा स्टेशन हावड़ा-नागपुर-मुंबई लाइन के चंपा-गेवरा रोड पर स्थित है।
कोरबा में कहां ठहरें?
कोरबा शहर में दो सितारा और तीन सितारा होटल काफी संख्या में उपलब्ध हैं। ये होटल यहां आने वाले पर्यटकों के ठहरने के लिए उपयोगी हैं। कोरबा शहर और उसके आसपास कई पर्यटन स्थल होने के कारण, शहर घूमने और देखने में एक दिन से अधिक समय लग जाता है। ऐसे में पर्यटक विभिन्न दर्शनीय स्थलों का भ्रमण करने और शहर को देखने के लिए एक-दो दिन या एक सप्ताह तक होटलों में ठहरते हैं।
पर्यटकों की सुविधा के अनुसार कई बजट होटल भी उपलब्ध हैं। ये होटल मेहमानों को किफायती दरों पर सभी आवश्यक कमरे और खानपान सेवाएं प्रदान करते हैं। पर्यटकों की सुविधा के लिए इनमें से अधिकांश होटल स्टेशन या हवाई अड्डे के पास स्थित हैं। कोरबा के कुछ लोकप्रिय होटलों में होटल सेंटर प्वाइंट और ब्लू डायमंड होटल शामिल हैं।
कोरबा में खरीदारी कहाँ करें?
छत्तीसगढ़ में खरीदारी करना पर्यटकों के लिए एक बेहद सुखद अनुभव है। यहां रहने वाली कुशल जनजातियां तरह-तरह के हस्तशिल्प बेचती हैं, जो पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र हैं। इन हस्तशिल्पों में शोपीस, उपयोगी वस्तुएं या उपहार शामिल हो सकते हैं।
यहां की जनजातियों द्वारा बेचे जाने वाले कुछ हस्तशिल्पों में बांस की कलाकृतियां, पत्थर की मूर्तियां, धातु की वस्तुएं, हाथ से बुने हुए कपड़े और टोकरियां शामिल हैं। ये वस्तुएं स्थानीय बाजारों में बिकती हैं और पर्यटकों को बेहद आकर्षित करती हैं। कोरबा शहर के कुछ प्रमुख स्थानीय खरीदारी बाजारों में मुडापार बाजार, बॉम्बे प्लाजा, एसएस प्लाजा और कई अन्य शामिल हैं।
Top Famous Temples to Visit in Korba, Chhattisgarh 2026
1.सर्वमंगला मंदिर, korba
सर्वमंगला मंदिर कोरबा की पहचान माना जाता है। यह मंदिर मां सर्वमंगला देवी को समर्पित है और पूरे जिले के सबसे प्रसिद्ध धार्मिक स्थलों में शामिल है। मान्यता है कि यहां मां की पूजा करने से मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। नवरात्रि के दौरान यहां लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।सर्वमंगला कोरबा जिले के प्रसिद्ध मंदिर में से एक है।
इस मंदिर की देवी दुर्गा है। यह मंदिर कोरेश के जमींदार में से एक राजेश्वर दयाल के पूर्वजों द्वारा बनाया गया था। मंदिर त्रिलोकिननाथ मंदिर, काली मंदिर और ज्योति कलाश भवन से घिरा हुआ है। वहाँ भी एक गुफा है, जो नदी के नीचे जाता है और दूसरी तरफ निकलता है। रानी धनराज कुंवर देवी को मंदिर में अपनी दैनिक यात्रा के लिए इस गुफा के लिए इस्तेमाल किया गया था।
प्रमुख आकर्षण
- भव्य मंदिर परिसर
- नवरात्रि मेला
- त्रिलोकीनाथ मंदिर
- काली मंदिर
- ज्योति कलश दर्शन
कैसे पहुंचें?
कोरबा रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर
बस स्टैंड से लगभग 4 किलोमीटर
ऑटो और टैक्सी आसानी से उपलब्ध
घूमने का सही समय
अक्टूबर से मार्च
चैत्र और शारदीय नवरात्रि
यात्रा टिप्स
सुबह 6 से 8 बजे के बीच दर्शन करें।
नवरात्रि में लंबी कतारों के लिए तैयार रहें।
2. मड़वारानी मंदिर
मड़वारानी मंदिर korba जिले के सबसे सुंदर पहाड़ी मंदिरों में से एक है। यह मंदिर पहाड़ी के ऊपर स्थित है, जहां से चारों ओर फैली हरियाली और प्राकृतिक दृश्य देखने को मिलते हैं। बरसात के मौसम में यहां का नजारा किसी हिल स्टेशन से कम नहीं लगता।माँ मड़वारानी मंदिर, छत्तीसगढ ऱाज्य के कोरबा जिले में स्थित प्रसिद्ध मंदिर है
एवं यहाँ के मूल निवासियों के द्वारा माँ मड़वारानी की आराधना की जाती है और उनके श्रद्धा एवं आस्था का प्रतीक हैं और यह माना जाता है की माँ मड़वारानी स्वयं प्रकट होकर आस-पास के गावों की रक्षा करती हैं | माँ मड़वारानी मंदिर, मड़वारानी पहाड़ की चोटी पर कलमी पेड़ के नीचे स्थित है| माँ मड़वारानी का दर्शन हर श्रद्धालु को अवश्य करनी चाहिए |

प्रमुख आकर्षण
- पहाड़ी पर स्थित मंदिर
- सुंदर प्राकृतिक दृश्य
- सूर्योदय और सूर्यास्त का दृश्य
- नवरात्रि मेला
कैसे पहुंचें?
कोरबा शहर से लगभग 22 किलोमीटर
निजी वाहन या टैक्सी सबसे अच्छा विकल्प
घूमने का सही समय
जुलाई से फरवरी
यात्रा टिप्स
आरामदायक जूते पहनें।
बारिश में सीढ़ियां फिसलन भरी हो सकती हैं।
3. पाली का प्राचीन शिव मंदिर
पाली का शिव मंदिर लगभग 1000 वर्ष पुराना माना जाता है। इसका निर्माण कलचुरी शासकों द्वारा कराया गया था। मंदिर की दीवारों पर बनी कलाकृतियां और मूर्तियां इतिहास प्रेमियों को आकर्षित करती हैं।
पाली कोरबा जिले में एक तहसील मुख्यालय है। यह जगह कोरबा-बिलासपुर सड़क पर जिला मुख्यालय से लगभग 50 किमी दूर स्थित है। यह माना जाता है कि पाली राजा विक्रमादित्य की पूजा स्थल थी। राजा विक्रमादित्य जो बन्ना राजवंश शासक था यहाँ एक प्राचीन शिव मंदिर है, जो बड़े तालाब के किनारे स्थित है। यहां कई अन्य अवशेष भी देखे जा सकते हैं।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन वास्तुकला
- पत्थरों की नक्काशी
- महाशिवरात्रि उत्सव
- ऐतिहासिक महत्व
कैसे पहुंचें?
कोरबा से लगभग 50 किलोमीटर
सड़क मार्ग से आसानी से पहुंचा जा सकता है
घूमने का सही समय
नवंबर से मार्च
यात्रा टिप्स
कैमरा साथ रखें।
सुबह का समय फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन है।
4. सीतामणी मंदिर
सीतामणी मंदिर रामायण काल से जुड़ी मान्यताओं के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि वनवास के दौरान भगवान राम, माता सीता और लक्ष्मण यहां रुके थे। यहां मौजूद गुफाएं और धार्मिक अवशेष श्रद्धालुओं को आकर्षित करते हैं।
सीता समाहित स्थल (सीतामढ़ी) मंदिर भदोही जिले में स्थित है। यह मंदिर इलाहबाद और वाराणसी के मध्य स्थित जंगीगंज बाज़ार से ११ किलोमीटर गंगा के किनारे स्थित है। मान्यता है कि इस स्थान पर माँ सीता से अपने आप को धरती में समाहित कर लिया था। यहाँ पर हनुमानजी की ११० फीट ऊँची मूर्ति है जिसे विश्व की सबसे बड़ी हनुमान जी की मूर्ति होने का गौरव प्राप्त है।
प्रमुख आकर्षण
- प्राचीन गुफाएं
- धार्मिक मान्यताएं
- शांत वातावरण
- ऐतिहासिक महत्व
कैसे पहुंचें?
कोरबा शहर से लगभग 2 किलोमीटर
घूमने का सही समय
अक्टूबर से फरवरी
यात्रा टिप्स
सुबह और शाम का समय सबसे अच्छा रहता है।
धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखें।
5. चैतुरगढ़ महिषासुर मर्दिनी मंदिर
चैतुरगढ़ को छत्तीसगढ़ का “गढ़ों का गढ़” कहा जाता है। यह मंदिर ऊंची पहाड़ी पर स्थित है और ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए भी आकर्षण का केंद्र है।चैतुरगढ़ (लाफागढ़) कोरबा शहर से करीब 70 किलोमीटर दूर स्थित है।
यह पाली से 25 किलोमीटर उत्तर की ओर 3060 मीटर की ऊंचाई पर पहाड़ी के शीर्ष पर स्थित है, यह राजा पृथ्वीदेव प्रथम द्वारा बनाया गया था। पुरातत्वविदों ने इसे मजबूत प्राकृतिक किलो में शामिल किया गया है, चूंकि यह चारों ओर से मजबूत प्राकृतिक दीवारों से संरक्षित है केवल कुछ स्थानों पर उच्च दीवारों का निर्माण किया गया है।किले के तीन मुख्य प्रवेश द्वार हैं जो मेनका, हुमकारा और सिम्हाद्वार नाम से जाना जाता है।
प्रमुख आकर्षण
- मां महिषासुर मर्दिनी मंदिर
- प्राचीन किला
- ट्रेकिंग अनुभव
- पहाड़ी से सुंदर दृश्य
कैसे पहुंचें?
कोरबा से लगभग 70 किलोमीटर
पाली मार्ग से पहुंच सकते हैं
घूमने का सही समय
सितंबर से फरवरी
यात्रा टिप्स
पानी और हल्का भोजन साथ रखें।
ट्रेकिंग के लिए स्पोर्ट्स शूज पहनें।
6. कोसगईगढ़ देवी मंदिर
कोसगईगढ़ मंदिर धार्मिक और प्राकृतिक पर्यटन का शानदार संगम है। यह स्थान पहाड़ियों और जंगलों के बीच स्थित है, जहां शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव होता है। कोसगाई माता मंदिर (कोसगाईगढ़) कोरबा जिले का एक प्रसिद्ध 16वीं सदी का ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल है यह कोरबा शहर से लगभग 30-42 किलोमीटर दूर कटघोरा ब्लॉक के पास पुटका/कोसगाई पहाड़ पर स्थित है
प्रमुख आकर्षण
- प्राकृतिक वातावरण
- पहाड़ी दृश्य
- देवी मंदिर
घूमने का सही समय
अगस्त से फरवरी
कोरबा मंदिर यात्रा के दौरान क्या देखें?
- मंदिरों के अलावा इन स्थानों को भी अपनी यात्रा में शामिल कर सकते हैं:
- सतरेंगा पर्यटन स्थल
- हसदेव बांगो बांध
- देवपहरी जलप्रपात
- रानी धनराज कुंवर स्मृति उद्यान
- केन्दई जलप्रपात
2 दिन का मंदिर टूर प्लान
पहला दिन
सर्वमंगला मंदिर
सीतामणी मंदिर
स्थानीय बाजार भ्रमण
दूसरा दिन
मदवारानी मंदिर
पाली शिव मंदिर
चैतुरगढ़ मंदिर
कोसगईगढ़ मंदिर
यात्रा के लिए महत्वपूर्ण सुझाव
- सुबह जल्दी यात्रा शुरू करें।
- गर्मियों में टोपी और पानी साथ रखें।
- पहाड़ी मंदिरों में फिसलन से सावधान रहें।
- धार्मिक स्थलों पर मर्यादित वस्त्र पहनें।
- मोबाइल और कैमरा पूरी तरह चार्ज रखें।
- बरसात में अतिरिक्त कपड़े साथ रखें।
कोरबा और उसके आसपास के दर्शनीय स्थल
छत्तीसगढ़ राज्य के उत्तरी भाग में स्थित कोरबा एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है, जो अनेक सुंदर स्थानों से भरा हुआ है। आमतौर पर यहां आने वाले पर्यटक शहर का भरपूर आनंद लेने के लिए कुछ दिनों या एक सप्ताह तक रुकते हैं। आइए शहर के कुछ पर्यटन स्थलों पर एक नज़र डालते हैं।
पाली
पाली, कोरबा शहर से लगभग 58 किलोमीटर दूर स्थित एक छोटा सा गाँव है। दूर-दूर से पर्यटक इस गाँव की सुंदरता, यहाँ की जगमगाती झील और प्राचीन मंदिरों के कारण यहाँ दर्शन करने आते हैं। इस खूबसूरत गाँव में भगवान शिव का एक प्राचीन मंदिर भी है। इन सभी कारणों से कोरबा की यात्रा के दौरान इस गाँव को अवश्य देखना चाहिए।
कांकी
कंकी इस क्षेत्र में स्थित भगवान शिव के मंदिर के लिए प्रसिद्ध है। इसे कंकेश्वर महादेव मंदिर के नाम से भी जाना जाता है। मंदिर में भगवान गणेश और देवी पार्वती की मूर्तियां भी हैं। यह मंदिर देवी-देवताओं की उत्कृष्ट नक्काशीदार मूर्तियों के लिए प्रसिद्ध है। इसके अलावा, पूरे क्षेत्र में सैकड़ों प्राचीन मूर्तियां और शिल्पकलाएं पाई जाती हैं।
लाफागढ़
कोरबा में स्थित लाफागढ़ सबसे महत्वपूर्ण किलों में से एक है। मंदिर के वेदी पर देवी दुर्गा की मूर्ति स्थापित है, जबकि प्रवेश द्वार पर भगवान गणेश की मूर्ति उकेरी गई है। मंदिर में की गई उत्कृष्ट नक्काशी और सजावटी दरवाजे, स्तंभ और मूर्तियां इसे पर्यटकों के बीच एक अनूठा आकर्षण बनाती हैं।
सीतामणि मंदिर और गुफाएँ
सीतामणि मंदिर और गुफाएं कोरबा के प्रमुख पर्यटक आकर्षणों में से एक हैं। इन गुफाओं में मौजूद राम, सीता और लक्ष्मण की मूर्तियां चट्टानों को तराशकर बनाई गई हैं। इन गुफाओं में मिले पदचिह्न देवी सीता के माने जाते हैं। इन गुफाओं के ठीक बगल में एक विशाल राम-सीता मंदिर है। दूर-दूर के शहरों और कस्बों से लोग इन मंदिरों और गुफाओं के दर्शन के लिए आते हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs)
Q1. कोरबा का सबसे प्रसिद्ध मंदिर कौन सा है?
सर्वमंगला मंदिर सबसे प्रसिद्ध मंदिर माना जाता है।
Q2. क्या एक दिन में सभी मंदिर घूम सकते हैं?
नहीं, आराम से घूमने के लिए 2 दिन का समय बेहतर रहेगा।
Q3. परिवार के साथ कौन सा मंदिर सबसे अच्छा है?
सर्वमंगला मंदिर और पाली शिव मंदिर।
Q4. ट्रेकिंग पसंद करने वालों के लिए कौन सा मंदिर अच्छा है?
चैतुरगढ़ महिषासुर मर्दिनी मंदिर।
Q5. कोरबा घूमने का सबसे अच्छा मौसम कौन सा है?
अक्टूबर से मार्च तथा मानसून के बाद का समय सबसे अच्छा माना जाता है।
Q6.कोरबा का पुराना नाम क्या है?
इस जिले का नाम छत्तीसगढ़ के उत्तरी भाग में निवास करने वाली कोरवा जनजाति के नाम पर रखा गया है। कोरबा को पहले गौरीगढ़ के नाम से जाना जाता था। मूल रूप से इस जिले पर हैहैया शासकों का शासन था, लेकिन छत्तीसगढ़ में मराठों के विस्तार के दौरान उन्होंने इस पर विजय प्राप्त कर ली।
Q7. कोरबा किस लिए प्रसिद्ध है?
छत्तीसगढ़ का कोरबा जिला मुख्य रूप से कोयला खदानों, थर्मल पावर प्लांट और बॉक्साइट/एल्युमीनियम उत्पादन (BALCO) के लिए जाना जाता है。 इसे राज्य की ‘ऊर्जा राजधानी’ भी कहा जाता है。
मेरा यात्रा अनुभव
कोरबा के मंदिर केवल पूजा-अर्चना के स्थान नहीं हैं, बल्कि यहां आपको प्रकृति, इतिहास और संस्कृति का अद्भुत संगम देखने को मिलता है।मड़वारानी की पहाड़ी से दिखने वाली हरियाली, चैतुरगढ़ की रोमांचक चढ़ाई, पाली मंदिर की ऐतिहासिक नक्काशी और सर्वमंगला मंदिर की दिव्य आभा हर यात्री को एक अलग अनुभव प्रदान करती है। यदि आप 2026 में कोरबा घूमने का प्लान बना रहे हैं, तो कम से कम 2 से 3 दिन का समय अवश्य निकालें।
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