मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी के किनारे कई छिपे हुए और ऑफबीट पर्यटन स्थल हैं, जो प्राकृतिक सुंदरता, आध्यात्मिकता और इतिहास का अनूठा मिश्रण प्रदान करते हैं। आप इन 15 शानदार ऑफबीट डेस्टिनेशन्स 15 Offbeat Places in Madhya Pradesh You Must Visit की यात्रा कर सकते हैं
भारत के मध्यप्रदेश और गुजरात में बहने वाली नर्मदा नदी देश की प्रमुख नदियों में से एक है। पुराणों में इसका उल्लेख रेवा के नाम से मिलता है। अमरकंटक से निकलकर यह नर्मदापुरम, नेमावर के आगे ओंकारेश्वर होते हुए ये नदी गुजरात में प्रवेश करके खम्भात की खाड़ी में इसका विलय हो जाता है।
नर्मदा नदी से जुड़े महत्वपूर्ण तथ्य
- नर्मदा नदी उद्गम स्थल से निकलने के बाद 1077 किलोमीटर मध्य प्रदेश में, उसके बाद 35 किलोमीटर मध्य प्रदेश-महाराष्ट्र की सीमा और 39 किलोमीटर गुजरात-महाराष्ट्र की सीमा से बहते हुए 161 किलोमीटर गुजरात में बहती है।
- नर्मदा बेसिन का पतला हिस्सा एक रिबन की तरह है जिसकी लंबाई 953 किलोमीटर है, जबकि बेसिन की अधिकतम चौड़ाई 234 किलोमीटर है।
- नर्मदा नदी अमरकंटक पर्वत के शिखर पर समुद्र तल से 1057 मीटर की ऊंचाई से झरने के रूप में निकलती है।
- भारत के नक्शे पर नर्मदा नदी करघनी के समान प्रतीत होती है।
- नर्मदा पृथ्वी की कर्क रेखा के समानान्तर बहती है।
- यह नदी उत्तर भारत और दक्षिण भारत को विभाजित करने वाली रेखा के समान है।
- नर्मदा देश की पांचवीं और पश्चिम की ओर बहने वाली सबसे लंबी नदी है।
- यह भारत की एक मात्र गैर-बर्फ पोषित बारहमासी नदी है
नर्मदा नदी के तट पर प्रमुख ऑफबीट और प्राकृतिक स्थल
1. आंवली घाट (नर्मदापुरम): महाभारत काल से जुड़ा यह स्थान नर्मदापुरम जिले मैं घूमने के लिए सबसे खूबसूरत जिसके बारे मैं बहुत शांत और आध्यात्मिक है, जहाँ धूनी वाले दादाजी का मंदिर है।
आंवली घाट, मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम (होशंगाबाद) जिले में मां नर्मदा के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन, पवित्र और ऐतिहासिक स्थल है। यह महाभारत काल से जुड़ा हुआ है।
आंवली घाट के मुख्य आकर्षण
- पौराणिक महत्व: मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां अपना समय बिताया था। यहाँ आज भी ‘भीमकुंड’ मौजूद है, और ऐसी कथा है कि भीम ने नर्मदा नदी के जल प्रवाह को रोकने के लिए पत्थरों का प्रयोग किया था।
- नदी संगम: इस घाट पर हत्याहरणी हथेड़ नदी और माँ नर्मदा का संगम होता है।
- आध्यात्मिक स्थल: घाट के समीप प्राचीन राम जानकी मंदिर और धड़ा धड़ी आश्रम (धोनी वाले दादा जी का स्थान) स्थित हैं।
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- धार्मिक आयोजन: यहाँ सोमवती अमावस्या, पूर्णिमा और मकर संक्रांति जैसे विशेष अवसरों पर भक्तों का भारी सैलाब उमड़ता है। माना जाता है कि यहाँ स्नान करने से सारे दोष दूर होते हैं और पुण्य लाभ मिलता है।
- सड़क संपर्क: यहाँ आवागमन को सुविधाजनक बनाने के लिए एक बड़ा पुल बनाया गया है, जिससे इस क्षेत्र और राजधानी भोपाल के बीच की दूरी कम हो गई है।
2. बरमान घाट (नरसिंहपुर): यहाँ नर्मदा नदी सात धाराओं में बहती है। यह ब्रह्मा जी की यज्ञ स्थली बरमान घाट जिला नरसिंहपुर, मध्य प्रदेश शासन | भारत मानी जाती है।
बरमान, नरसिंहपुर, सागर, राष्ट्रीय राजमार्ग क्रमांक 26 पर 24 कि.मी. एवं करेली रेल्वे स्टेशन (इटारसी-जबलपुर) से 12 कि.मी. की दूरी पर नर्मदा नदी के तट पर स्थित है । यह परमपिता ब्रम्हा जी की यज्ञ स्थली एवं रानी दुर्गावती का मंदिर हाथी दरवाजा तथा बराह प्रतिमा दर्शनीय हैं । यहां नर्मदा नदी सात धाराओं में बहती है ।
यहां पर मकर संक्राति से बसंत पंचमी तक मेला लगता है । जिसमें जिला प्रशासन की ओर से जन-जागरण हेतु विभिन्न विभागों-कृषि, सहकारिता, शिक्षा, स्वास्थ्य आदि की प्रदर्शनी लगाई जाती है ।
बरमान घाट के मुख्य आकर्षण
- धार्मिक महत्व: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ भगवान ब्रह्मा ने यज्ञ और घोर तपस्या की थी। इसे ‘ब्रह्मांड घाट’ भी कहा जाता है।
- सतधारा: यहाँ माँ नर्मदा सात अलग-अलग धाराओं में बँटकर बहती हैं, जिनमें प्रमुख कुंड शामिल हैं। ऐसा माना जाता है कि पांडवों ने अपने अज्ञातवास का कुछ समय यहाँ बिताया था।
- ऐतिहासिक स्थल: यहाँ रानी दुर्गावती का मंदिर, हाथी दरवाजा और 12वीं सदी की वराह प्रतिमा स्थित है।
- बरमान मेला: प्रतिवर्ष मकर संक्रांति से बसंत पंचमी तक यहाँ भव्य मेले का आयोजन किया जाता है, जिसमें नर्मदा जयंती पर भारी संख्या में श्रद्धालु डुबकी लगाते हैं
3. बांद्राभान (नर्मदापुरम): नर्मदा और तवा नदी का यह संगम स्थल “नर्मदा नदी के किनारे पर्यटन स्थल” अपनी रेतीली सुंदरता और अद्भुत नज़ारों के लिए प्रसिद्ध है।
बांद्राभान के बारे में कई मान्ताएं हैं। एक मान्यता के अनुसार माना जाता है कि प्राचीन समय में किसी राजा को श्राप मिला था कि वह बंदर की तरह दिखेगा। माना जाता है कि श्राप के बाद से ही राजा का रूप वानर जैसा हो गया था। इस श्राप से मुक्ति पाने के लिए राजा नर्मदा और तवा नदी के संगम पर आया और उसने कड़ी तपस्या की।
माना जाता है उसकी तपस्या से के कारण उसे इस श्राप से मुक्ति मिल गई थी। वहीं उसे मोक्ष की प्राप्ति हुई। तब से इस जगह को बांद्राभान कहा जाता है। बांद्राभान का अर्थ होता है बंदर। यही नहीं माना यह भी जाता है कि प्राचीन समय में यहां पांडवों ने निवास किया था
बांद्राभान (नर्मदापुरम) के आसपास घुमने की जगह
सेठानी घाट: नर्मदापुरम (होशंगाबाद) का ऐतिहासिक घाट, जहाँ शाम को होने वाली नर्मदा आरती बहुत लोकप्रिय है।
तवा डैम (तवा रिजर्वायर): बांद्राभान से लगभग 40 किमी दूर, यहाँ बोटिंग और सनसेट का शानदार नज़ारा मिलता है।
आदमगढ़ हिल्स: बांद्राभान के पास स्थित, यह प्रागैतिहासिक शैल चित्रों और गुफाओं के लिए प्रसिद्ध है।
मढ़ई (सतपुड़ा टाइगर रिज़र्व): तवा नदी के किनारे स्थित यह जगह वन्यजीव प्रेमियों और जंगल सफारी के लिए बेहतरीन है।
पचमढ़ी: यहाँ से लगभग 70-80 किमी दूर स्थित यह प्रसिद्ध हिल स्टेशन है, जहाँ आप बी फॉल्स और धूपगढ़ घूम सकते हैं।
4. हंडिया (हरदा): प्राचीन काल से बसा यह क्षेत्र ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व रखता है।
हरदा जिला मुख्यालय से लगभग 21 किलोमीटर उत्तर में एक अत्यन्त प्राचीन स्थान है हंडिया मान्यता है कि हंडिया नर्मदा नदी के मध्यबिन्दु पर स्थित है और नर्मदा परिक्रमा करने वाले भक्तजन यहीं से अपनी तीर्थ यात्रा प्रारम्भ करते है। जनश्रृति के अनुसार इसी स्थान पर पौराणिक ऋषि जमदाग्नि तथा हैहय वंश के सहस्त्रार्जन का मिलन हुआ था।
दिल्ली एवं दक्षिण भारत के मार्ग में नर्मदा तट पर स्थित हंडिया मुगलकाल में प्रशासनिक, धार्मिक, व्यापारिक एवं सामरिक सभी दृष्टियों से एक महत्वपूर्ण स्थान रहा था। कहा जाता है कि बल्क के राजा नाजिर उद्दीन हंडिया आकर फकीर के रूप में बस गए थे, जो हंडिया शाह भंडग के नाम से जाने जाते थे। माण्डू के सुल्तान हुषंगशाह गोरी ने यहाँ एक किले का निर्माण कराया था।
हंडिया का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व:
- ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: मुगल काल (आइने-अकबरी) के दौरान, हंडिया मालवा सूबे की एक प्रमुख प्रशासनिक राजधानी था। बाद में मराठा शासन के दौरान इसे बदलकर हरदा को महत्व दिया गया।
- पौराणिक मान्यता: जनश्रुतियों के अनुसार, इसी स्थान पर पौराणिक ऋषि जमदाग्नि और हैहय वंश के राजा सहस्त्रार्जुन का मिलन हुआ था।
- रिद्धनाथ महादेव मंदिर: नर्मदा के तट पर स्थित इस प्राचीन शिव मंदिर के बारे में मान्यता है कि इसकी स्थापना धन के देवता कुबेर ने की थी।
- तेली की सराय: यहाँ मुग़ल काल की वास्तुकला का बेहतरीन नमूना ‘तेली की सराय’ स्थित है, जो 16वीं-17वीं शताब्दी में बनाई गई थी
5.नेमावर (देवास): यह नर्मदा के नाभि-स्थल के रूप में प्रसिद्ध है, जहाँ का सिद्धनाथ मंदिर अद्भुत है।
मध्यप्रदेश की नर्मदा नदी को यहां की जीवनदायिनी कहा जाता है. नर्मदा नदी को धार्मिक रूप से भी महत्वपूर्ण माना जाता है, इसके किनारे रहने वाले लोगों की शुरुआत इसके दर्शन और स्नान से ही होती है.
मां नर्मदा को भगवान शिव की पुत्री माना जाता है और इसके तट पर स्थित पत्थर शिवलिंग के समान होते हैं. मध्यप्रदेश में ही नर्मदा नदी का नाभि स्थल है, जहां बने एक कुंड में स्नान करने से कई बीमारियों के नाश होने की बात कही जाती है.
सिद्धनाथ मंदिर के बारे में कुछ मुख्य और दिलचस्प बातें:
- वास्तुकला: यह मंदिर उत्कृष्ट नागर और भूमिज शैली का मिश्रण है। इसके बाहरी और भीतरी हिस्सों में बेहद आकर्षक नक्काशी की गई है
- पौराणिक मान्यता: माना जाता है कि इस प्राचीन मंदिर के शिवलिंग की स्थापना सतयुग में सनकादि ऋषियों द्वारा की गई थी
- नाभिकुंड: मंदिर के समीप नर्मदा नदी का नाभिकुंड स्थित है, जहाँ स्नान करने का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है
5. राजघाट (मंडलेश्वर): महेश्वर के पास स्थित यह घाट शांत वातावरण और पुराने महलों के लिए जाना जाता है।
मंडलेश्वर का राजघाट वास्तव में नर्मदा नदी के तट पर स्थित एक छिपा हुआ रत्न है। महेश्वर से मात्र 6-8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित यह स्थान अपनी प्राचीन ऐतिहासिक इमारतों, पुराने महलों और शांत वातावरण के लिए प्रसिद्ध है, जो इसे फोटोग्राफी और शांतिप्रिय लोगों के लिए एक बेहतरीन जगह बनाता है।
मंडलेश्वर के प्रमुख आकर्षण:
- ऐतिहासिक महत्व: मंडलेश्वर (प्राचीन नाम: महिष्मती) को राजा महिष्मान ने बसाया था। राजघाट के पास पुराने किले और राजसी महल आपको इतिहास के पन्नों में ले जाते हैं।
- काशी विश्वनाथ मंदिर: लगभग 250 वर्ष पुराना यह मंदिर प्रथम बाजीराव पेशवा द्वारा बनवाया गया था और यहाँ शिव पंचायत के साथ ही वासुदेवानंद सरस्वती स्वामी महाराज की चरण पादुकाएं भी मौजूद हैं।
6. धरमपुरी (धार): रानी रूपमती के जन्मस्थान के रूप में प्रसिद्ध यह क़स्बा नर्मदा के तट पर बसा है।
मध्य प्रदेश के धार जिले में नर्मदा नदी के किनारे बसा धरमपुरी एक छोटा सा आकर्षक शहर है जो ऐतिहासिक धरोहरों से भरपूर है। इसे नर्मदा की पुत्री रूपमती का जन्मस्थान और निवास स्थान भी कहा जाता है,
जिनका विवाह मांडू के शासक बाज बहादुर से हुआ था। इस शहर की स्थापना सबसे बड़े पांडव युधिष्ठिर ने की थी और यह किंवदंतियों और लोककथाओं से समृद्ध है, जो इसकी प्राचीन सुंदरता और रहस्य को और भी बढ़ाती हैं। यह सदियों पहले यहां निवास करने वाले प्रसिद्ध राजाओं और रानियों के जीवन की घटनाओं का द्वार है।
आप धरमपुरी, धार या अन्य मध्यवर्ती पर्यटक स्थलों के बारे में और क्या जानना चाहते हैं?
- रानी रूपमती महल (मांडव): रानी रूपमती के इतिहास और उनके महल के बारे में जानकारी।
- धार जिले के अन्य पर्यटन स्थल: धार के किले, मांडू के महलों या अन्य धरोहरों के बारे में।
- यात्रा की योजना: यहाँ तक पहुँचने के साधन या ठहरने के विकल्प
7. बड़वानी: यह स्थान ‘बीजासन माता मंदिर’ और राजघाट के खूबसूरत नज़ारों के लिए जाना जाता है।
इंदौर में स्थित बीजासन माता मंदिर अवश्य जाएँ – यह पहाड़ी पर स्थित एक दिव्य मंदिर है जो देवी दुर्गा के स्वरूप को समर्पित है, जो शक्ति, संरक्षण और आस्था का प्रतीक हैं। इंदौर के इस सबसे पवित्र तीर्थस्थल के मनमोहक दृश्यों, आध्यात्मिक शांति और जीवंत ऊर्जा का अनुभव करें।
इंदौर हवाई अड्डे के पास एक छोटी पहाड़ी पर स्थित बिजासन माता मंदिर, शहर के सबसे प्रमुख और पवित्र हिंदू मंदिरों में से एक है। माँ दुर्गा के अवतार, देवी बिजासन को समर्पित यह मंदिर, विशेष रूप से नवरात्रि उत्सव के दौरान, जब भव्य समारोह और मेले आयोजित किए जाते हैं, हजारों भक्तों को आकर्षित करता है।
होल्कर वंश द्वारा 1760 में निर्मित, इस मंदिर का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व बहुत अधिक है। मंदिर की पहाड़ी से इंदौर शहर के मनोरम दृश्य और शांत वातावरण इसे तीर्थयात्रियों और पर्यटकों दोनों के लिए एक पसंदीदा स्थान बनाते हैं।
आसपास के दर्शनीय स्थल
बावनगजा जैन तीर्थ
रामगढ़ किले के आसपास घूमने के लिए सबसे प्रसिद्ध स्थानों में से एक बावनगजा है। यह स्थान विश्वभर के जैन श्रद्धालुओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है।
नागलवाड़ी धाम
नागलवाड़ी धाम बड़वानी जिले का एक प्रसिद्ध धार्मिक स्थल है। यह स्थान भगवान भिलट देव को समर्पित है और निमाड़ क्षेत्र के लोगों की गहरी आस्था का केंद्र माना जाता है।
आवासगढ़ किला
आवासगढ़ किला बड़वानी रियासत के इतिहास से जुड़ा एक महत्वपूर्ण ऐतिहासिक स्थल है। यह किला कभी स्थानीय शासकों का प्रमुख निवास और प्रशासनिक केंद्र हुआ करता था।
राजघाट नर्मदा तट
नर्मदा नदी के किनारे स्थित राजघाट बड़वानी जिले के सबसे शांत और सुंदर स्थलों में से एक है। यहाँ का वातावरण आध्यात्मिक और प्राकृतिक दोनों दृष्टि से अत्यंत मनमोहक है।
8. पुनासा (खंडवा): इंदिरा सागर बांध के निकट स्थित यह जगह प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है।
खंडवा के पर्यटन स्थलों में सबसे शांत स्थानों में से एक, इंदिरा सागर बांध प्रकृति प्रेमियों के लिए अवश्य देखने योग्य स्थान है। नर्मदा नदी पर बना यह जलाशय एक बहुउद्देशीय बांध है और खंडवा जिले में सिंचाई और बिजली उत्पादन के मुख्य जल स्रोतों में से एक है।
इंदिरा सागर बांध खंडवा के पास एक खूबसूरत पिकनिक स्थल है और दोस्तों और परिवार के साथ मौज-मस्ती करने के लिए एक लोकप्रिय जगह है। यहां नौका विहार जैसी कई जल गतिविधियों का आनंद लिया जा सकता है।
साथ ही, इंदिरा सागर बांध मनमोहक दृश्य प्रस्तुत करता है और इसलिए फोटोग्राफी प्रेमियों के लिए एक बेहतरीन जगह है।
बाँध के भीतर और आसपास देखने योग्य स्थान
हनुवंतिया टापू
Hanuwantiya Island इंदिरा सागर जलाशय के किनारे विकसित एक प्रमुख जल पर्यटन स्थल है। यहाँ बोटिंग, क्रूज़, जेट स्की और वाटर स्पोर्ट्स का आनंद लिया जा सकता है। सूर्यास्त के समय यहाँ का दृश्य अत्यंत मनमोहक होता है।
मुख्य बाँध दृश्य बिंदु
मानसून के दौरान जब गेट खोले जाते हैं तो पानी का प्रवाह अद्भुत दृश्य प्रस्तुत करता है। फोटोग्राफी के लिए यह स्थान बेहद लोकप्रिय है।
9. शाहगंज (सीहोर): शांत और प्रकृति की गोद में बसा नर्मदा तटीय क्षेत्र।
सीहोर जिले का शाहगंज नर्मदा नदी के तट पर बसा एक बेहद खूबसूरत और शांत कस्बा है। घने जंगलों और हरियाली से घिरे इस क्षेत्र का शांत वातावरण,कलकल बहती नर्मदा का नज़ारा और यहां के घाट शहर की भागदौड़ से दूर प्रकृति की गोद में सुकून के पल बिताने के लिए एकदम सही हैं।
प्रमुख आकर्षण और गतिविधियां:
- नर्मदा घाट: यहाँ के शांत घाटों पर बैठकर आप सूर्योदय और सूर्यास्त का मनमोहक नज़ारा देख सकते हैं।
- नौका विहार: स्थानीय नाविकों की मदद से नदी में शांत सैर का आनंद लिया जा सकता है।
- प्राकृतिक पर्यटन: बारिश के दिनों और सर्दियों में आसपास का हरा-भरा नजारा फोटोग्राफी और ट्रेकिंग के लिए बहुत शानदार होता है।
तिलवारा घाट (जबलपुर): महात्मा गांधी की अस्थियां विसर्जित होने के कारण ऐतिहासिक रूप से महत्वपूर्ण और शांत घाट।
तिलवारा घाट, जबलपुर पर्यटक तिलवारा घाट की यात्रा इसके शांत नदीतटीय वातावरण और 1948 में महात्मा गांधी की अस्थियों के विसर्जन से जुड़े होने के कारण करते हैं। इसका उपयोग नर्मदा नदी के किनारे धार्मिक अनुष्ठानों और स्थानीय समारोहों के लिए भी किया जाता है।
10. तिलवारा घाट जबलपुर में फोटोग्राफी और दर्शनीय स्थल
जबलपुर स्थित तिलवारा घाट नर्मदा नदी के सबसे आकर्षक घाटों में से एक है, जो अपनी चौड़ी सीढ़ियों, शांत नदी तट के वातावरण और महात्मा गांधी की अस्थियों के विसर्जन से जुड़े ऐतिहासिक महत्व के लिए जाना जाता है। नदी के अनुष्ठान, खुला आसमान और नर्मदा नदी के पार दूर तक फैले मनोरम दृश्य इसे सांस्कृतिक और प्राकृतिक फोटोग्राफी के लिए एक बेहतरीन स्थान बनाते हैं।
- फ़ोटोग्राफ़ी के लिए सबसे अच्छे दृश्य: घाट के ऊपरी सीढ़ियों से तिरछे कोण से देखने पर सबसे अच्छे वाइड-एंगल फ़्रेम मिलते हैं, जहाँ सीढ़ीदार संरचनाएँ पानी की ओर नीचे जाती हैं।
- प्रकाश की स्थिति और समय संबंधी विचार: तिलवारा घाट पर फोटोग्राफी के लिए सूर्योदय का समय सबसे अच्छा होता है, जब पानी पर हल्की रोशनी पड़ती है
- नियम एवं प्रतिबंध: तिलवारा घाट पर आमतौर पर फोटोग्राफी की अनुमति है, लेकिन आगंतुकों को बिना अनुमति के अनुष्ठानों के दौरान व्यक्तियों की तस्वीरें लेने से बचना चाहिए, विशेषकर प्रार्थना, स्नान या समारोहों के दौरान।
- भीड़ और पहुँच संबंधी कारक: घाट पर सुबह-सुबह स्नान के समय, धार्मिक त्योहारों के दौरान और सप्ताहांतों पर सबसे अधिक भीड़ रहती है,
11. दशहरा घाट (मंडला): मंडला जिले में नर्मदा के तीखे मोड़ों और प्राकृतिक दृश्यों को देखने के लिए बेहतरीन जगह।
दशहरा घाट मंडला का एक अत्यंत लोकप्रिय और रमणीय स्थान है। मंडला ज़िला जो कि तीन तरफ से नर्मदा नदी से घिरा हुआ है , यहाँ के प्राकृतिक दृश्यों और तीखे मोड़ों के लिए बेहद प्रसिद्ध है। इसके अलावा ज़िले में सहस्त्रधारा और रपटा घाट जैसे प्राकृतिक नज़ारे भी मौजूद हैं, जो पर्यटकों के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र हैं
मंडला और उसके आसपास अन्य कई प्रमुख दर्शनीय स्थल हैं, जहाँ आप घूम सकते हैं:
- सहस्त्रधारा: मंडला शहर के पास स्थित, यहाँ नर्मदा नदी हज़ारों छोटी धाराओं में बँटकर चट्टानों के बीच से बहती है यह पिकनिक और सुंदर फोटोग्राफी के लिए बेहतरीन जगह है
- कान्हा राष्ट्रीय उद्यान: मंडला और बालाघाट ज़िलों में फैला यह प्रसिद्ध टाइगर रिज़र्व अपनी समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव सफारी के लिए विश्व प्रसिद्ध है
- राम नगर का किला: गोंड राजाओं द्वारा निर्मित यह ऐतिहासिक किला नर्मदा नदी के लूप (मोड़) पर स्थित है
- गर्म पानी कुंड: मुख्य शहर से लगभग 18 किमी दूर स्थित यह स्थान प्राकृतिक रूप से गर्म पानी का कुआं है, जो चर्म रोगों के उपचार के लिए भी जाना जाता है
- मंडला प्लांट फॉसिल्स नेशनल पार्क: यहाँ लाखों साल पुराने पौधों के जीवाश्म (फॉसिल) सुरक्षित रखे गए हैं
12. जूझ (खरगोन): यहाँ का शांत तट और स्थानीय संस्कृति पर्यटकों को आकर्षित करती है।
खरगोन (विशेष रूप से महेश्वर और नर्मदा तट) में पर्यटकों को मंत्रमुग्ध करने वाली समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और प्राकृतिक सुंदरता मौजूद है यहाँ के शांत घाट, ऐतिहासिक किले, और स्थानीय निमाड़ी संस्कृति यात्रियों को एक अनोखा और सुकून भरा अनुभव प्रदान करते हैं
प्रमुख आकर्षण और अनुभव
- अहिल्या फोर्ट और घाट: महेश्वर में नर्मदा नदी के तट पर स्थित यह किला और घाट अपनी वास्तुकला और शांति के लिए प्रसिद्ध हैं। यह पर्यटकों के ध्यान का मुख्य केंद्र है
- सांस्कृतिक विरासत: यहाँ की स्थानीय संस्कृति, हस्तशिल्प (विश्व प्रसिद्ध महेश्वरी साड़ियाँ) और लोक कलाएं पर्यटकों को काफी आकर्षित करती हैं
- धार्मिक स्थल: खरगोन मुख्यालय पर स्थित ‘नवग्रह मंदिर’ और मंडलेश्वर के ऐतिहासिक मंदिर आस्था और वास्तुकला के बेहतरीन उदाहरण हैं
13.मल्हारगढ़ (मंदसौर/निमाड़): नर्मदा की सहायक नदियों के किनारे छिपे हुए प्राचीन मंदिर और किले।
मल्हारगढ़, जिला मंदसौर (मालवा) और पूर्वी निमाड़ (खंडवा) के क्षेत्रों में नर्मदा और चंबल की सहायक नदियों के किनारे छिपे हुए प्राचीन मंदिरों, अद्भुत घाटों और ऐतिहासिक किलों का एक शानदार समूह है इन अछूते पर्यटन स्थलों में गुप्तकालीन अवशेष, प्राकृतिक झरने और सदियों पुराने शिव मंदिर शामिल हैं
छिपे हुए प्रमुख ऐतिहासिक और प्राकृतिक स्थल
- हिंगलाजगढ़ का किला – यह परमार कालीन किला (जिला मुख्यालय से लगभग 165 किमी दूर) भानपुरा तहसील में स्थित है नर्मदा की ओर बहने वाली जलधाराओं के मार्ग में पड़ने वाले इस किले में दुर्लभ मूर्तियां और पुरातात्विक अवशेष मौजूद हैं
- सद्गुरु संत सिंगाजी की समाधि – नर्मदा के बैकवाटर में जलमग्न इस प्राचीन स्थल को एक भव्य टापू पर 130 फीट ऊंचे मंदिर में तब्दील किया गया है नर्मदा के बीचों-बीच स्थित इस स्थान का दृश्य बहुत ही अद्भुत है
- गांधी सागर के जलप्रपात और चंबल तट – मल्हारगढ़ क्षेत्र में चंबल नदी और अन्य सहायक नदियों के बहाव के कारण बने प्राकृतिक जलप्रपात और पुराने देवालय छिपे हुए ऐतिहासिक रत्न हैं
14. कोटेश्वर महादेव मंदिर, लांजी: एक भव्य पर्यटन स्थल
मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले के लांजी तहसील में स्थित कोटेश्वर महादेव मंदिर एक भव्य ऐतिहासिक और आध्यात्मिक स्थल है। यह 12वीं शताब्दी में निर्मित हुआ था और भगवान शिव को समर्पित है। यह प्राचीन मंदिर अपनी उत्कृष्ट वास्तुकला, धार्मिक महत्व और प्राकृतिक सौंदर्य के लिए प्रसिद्ध है। हर वर्ष हजारों श्रद्धालु और पर्यटक इस पवित्र स्थान का दर्शन करने आते हैं।
जिसमें दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। श्रावण मास के दौरान भी विशेष अनुष्ठान आयोजित किए जाते हैं, जिससे मंदिर का आध्यात्मिक वातावरण और भी भक्तिमय हो जाता है।
प्राकृतिक सौंदर्य और पर्यटक आकर्षण
यह मंदिर घने हरे-भरे जंगलों के बीच स्थित है, जो इसे प्रकृति प्रेमियों और साधकों के लिए एक आदर्श स्थल बनाता है। मंदिर के समीप एक प्राचीन जलस्रोत भी स्थित है, जो इसकी सुंदरता को और अधिक बढ़ाता है। यहाँ की शांति और प्राकृतिक दृश्यों का आनंद लेने के लिए यह एक उत्तम स्थान है।
निष्कर्ष:
नर्मदा नदी के घाट केवल भौतिक स्थल ही नहीं हैं वे सदियों पुरानी परंपराओं, आध्यात्मिकता और सांस्कृतिक विरासत के भंडार हैं। इन घाटों की यात्रा भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़ने और नर्मदा नदी की शांति और आध्यात्मिकता का अनुभव करने का एक अनूठा अवसर प्रदान करती है। इस आध्यात्मिक यात्रा पर निकलने और नर्मदा नदी के भव्य घाटों का भ्रमण करने के लिए, नर्मदा नदी का पवित्र जल आपको आत्म-खोज और आध्यात्मिक जागृति की यात्रा पर ले जाए।
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