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places to visit in koriya chhattisgarh कोरिया जिले के शीर्ष पर्यटन स्थल

छत्तीसगढ़ यात्रा के दौरान कोरिया की यात्रा को आसानी से शामिल किया जा सकता है। कोरिया छत्तीसगढ़ के उत्तर-पूर्वी क्षेत्र में स्थित है। यह समुद्र तल से 700 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। दक्षिण कोरिया पूर्वी एशिया में कोरियाई प्रायद्वीप के दक्षिणी भाग में स्थित है और आधिकारिक तौर पर इसे कोरिया गणराज्य के नाम से जाना जाता है। इसका लंबा और उतार-चढ़ाव भरा इतिहास, समृद्ध संस्कृति और गतिशील एवं आधुनिक समाज है। ये स्थान अपनी प्राकृतिक सौन्धर्य के लिए जानी जाती है इस जगह की यात्रा हम अपने परिवार और दोस्तों के साथ कर सकते है और ऐसे नयी जानकारी के लिए आप इस पोस्ट में लास्ट तक जरुर पढ़े

प्राकृतिक सुंदरता से लबरेज है कोरिया जिला

छत्तीसगढ़ में कोरिया सोलहवां जिला के रुप में अस्तित्व में आया. तब से लेकर आज तक इस जिले ने काफी तरक्की कर ली है.प्रकृति की गोद में बसे और हरियाली की चादर से ढंके कोरिया जिले में कई तरह की प्राकृतिक सुंदरता है. वर्षा ऋतु में इस जिले की पर्यटन स्थलों की सुंदरता चरम पर होती है. जिले की नदियों पर बनने वाले जलप्रपात लोगों को अपनी सुंदरता से मोह लेते हैं.कोरिया जिले में जलप्रपात हर समय अपनी सुन्दरता बिखेरते हैं.

कोरिया : आज हम छत्तीसगढ़ के सरगुजा संभाग के कोरिया जिले के आसपास के पर्यटन स्थलों के बारे में आपको बताने जा रहे हैं. अविभाजित मध्यप्रदेश राज्य में 25 मई 1998 को कोरिया को जिला का दर्जा मिला था. जिला का कोरिया नाम यहां के पूर्व रियासत कोरिया से लिया गया है.जिला बनने से पहले यह क्षेत्र सरगुजा जिले के अंतर्गत था.

कोरिया

जलप्रपात और पौराणिक स्थलों के लिए मिली प्रसिद्धि : हसदेव नदी का उद्गम स्थल भी कोरिया जिले को ही माना जाता है. कोरिया के आसपास गुरुघासीदास राष्ट्रीय उद्यान, हसदेव नदी पर गौरघाट, च्युल जलप्रपात, अकुरी नाला जलप्रपात, अमृतधारा जलप्रपात, गेज परियोजना, झुमका बोट, कोरिया पैलेस हैं. वहीं रामगढ़ के जोगीमारा और सीताबेंगरा गुफा में मर्यादा पुरूषोत्तम श्रीराम ने माता सीता और भाई लक्ष्मण के साथ प्रवास किया था.जिसे देखने के लिए दूर-दूर से पर्यटक कोरिया आते हैं.

भगवान श्रीराम का कोरिया से नाता : माना जाता है कि रामगढ़ की गुफाओं में श्रीराम की महर्षि विश्रवा से भेंट हुई. इस स्थान पर एक प्राचीन नाट्यशाला है. ऐसी मान्यता है कि इन्हीं पहाड़ियों पर कालिदास ने मेघदूतम महाकाव्य की रचना की है. यहां की गुफा में प्राचीन शैलचित्र में अंकित है.आपको बता दें कि कोरिया जिले में भगवान राम से जुड़ी स्मृतियों को यादगार बनाने के लिए प्रदेश की सरकार ने रामवनगमन पथ योजना भी शुरु की है. जिसके तहत चिन्हित जगहों पर भगवान श्रीराम की प्रतिमाओं को स्थापित किया जा रहा है.साथ ही साथ जिन जगहों से भगवान राम ने अपने वक्त गुजारे थे. उसे पर्यटन सेंटर के तौर पर विकसित किया जा रहा है.

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कोरिया की सबसे खूबसूरत जगह कौन सी है ?
नामी द्वीप (गंगवॉन)

आइए इस सूची की शुरुआत उस पहली चीज से करते हैं जो दक्षिण कोरिया में सबसे खूबसूरत जगह के बारे में सोचते ही हमारे दिमाग में आती है: नामी द्वीप। यह द्वीप अपने वृक्षों से घिरे रास्तों के लिए प्रसिद्ध है जो हर मौसम में बदलते रहते हैं और यहाँ की शांत नदी के किनारे की प्राकृतिक सुंदरता मनमोहक है।

कोरिया में घूमने के लिए कौन सी जगहें हैं ?

कोरिया (छत्तीसगढ़) में घूमने के लिए प्रमुख प्राकृतिक स्थल अमृतधारा जलप्रपात, झुमका बोट क्लब (बैकुंठपुर), रामदाहा जलप्रपात, और सीतामढ़ी हरचौका (गुफाएं) हैं. यह जिला अपनी हरी-भरी वादियों और झरनों के लिए प्रसिद्ध है, जिसे छत्तीसगढ़ का कश्मीर भी कहा जाता है. यहाँ के प्रमुख आकर्षणों की

कोरिया ज़िले का संस्कृति और विरासत

सामुदायिक नृत्य
कोरिया ज़िले अलग अलग त्यौहारो मे मुख्यता तीन सामुदायिक नृत्य एवं कार्यक्रम मनाये जाते है :-
कर्मा
सैला
सुआ

कर्मा : कर्मा त्योहार भाद्रपद-शुक्लपक्ष एकादशी को मनाया जाता है। यह त्यौहार खरीफ के कृषि पूरी होने के बाद आता है। यह सभी कोरियन के प्रमुख त्योहारो मे से एक है कृषि के संचालन के पूरा होने के बाद, समुदाय “कर्म देव” की फसल की अधिक उपज के लिए प्रार्थना करता है। यह भी कठिन परिश्रम वे कृषि कार्यों के माध्यम से किया है के बाद एक उत्सव का प्रतीक है। नवयुवक लड़के और लड़कियां उपवास रहती है और शाम में “करम ट्री” की एक शाखा को लाते है और अपने समुदाय के मुखिया के घर के आँगन में लगाते है। जावा और गेहूं कुछ दिन पहले अंकुरित हो जाता है और उनके छोटे पौधों को एक छोटे से बांस की टोकरी में डाल दिया जाता है और करम पेड़ की शाखा के नीचे रख दिया जाता है। यह शाखा करम देव का प्रतीक होता है। एक दीपक जला कर करम देव के नीचे रखा जाता है।

सैला नृत्य : अगहन के महीने में, ग्रामीणों सैला नृत्य प्रदर्शन करने के लिए आसपास के गांवों के लिए जाते है। डाल्टन के अनुसार, यह द्रविड़ समुदाय का एक नृत्य है। सैला नर्तकियों के समूह , सैला नर्तकियों के मेढा प्रत्येक घर के लिये जाते है और नृत्य करते है। वे अपने हाथ मे लिये छोटी छड़ी से बगल मे व्यक्ति के पकड़े हुये छड़ी को मारते है वे एक बार गोले मे दक्षिणावर्त और बाद मे वामावर्त धूमते हुये नृत्य करते है । “मंदार” नर्तकियों को ताल देता है। जब ताल तेजी से हो जाता है, तब नर्तक भी तेजी से चलते हुये नृत्य करते हैं।छड़ी ऊपर जाते हुये दूसरे छड़ी से और फिर नीचे जाते हुये दूसरे छड़ी से टकराया जाता है।

सुआ नृत्य : यह मूल रूप से महिलाओं का एक लोक नृत्य है। सैला की तरह, महिलाओं को एक ही प्रकार की छोटे छड़ी का उपयोग किया जाता है और ध्यान रखा जाता है की छड़ी नीचे की ओर न जाने पाये । वे एक गोले मे नृत्य और गाते हुये चलते हैं। चावल रखे बर्तन मे कुछ लकड़ी के बने तोतो बर्तन केंद्र में रखा जाता है।

अमृतधारा जलप्रपात
अमृतधारा जलप्रपात छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले के मनेन्द्रगढ़ तहसील के बरबसपुर नामक स्थान के पास हसदेव नदी पर स्थित है।
यह खूबसूरत झरना राष्ट्रीय राजमार्ग 43 और नागपुर ग्राम पंचायत से 8 किलोमीटर दूर स्थित है,
यह हसदेव नदी पर स्थित प्रकृति का एक सुंदर दृश्य है।
हर साल महा शिवरात्री पर अमृतधारा महोत्सव त्योहार कोरिया जिला प्रशासन द्वारा आयोजित किया जाता है।

झुमका बांध,

छत्तीसगढ़ अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए देश भर में जाना जाता है, और यही वजह है कि यह टूरिज्म के लिए एक खास जगह बन गया है. आजकल, युवा पीढ़ी में सोलो ट्रैवलिंग का क्रेज बढ़ रहा है, जिसके कई फायदे हैं और इसने इसे युवाओं की पहली पसंद बना दिया है. अगर आप अकेले यात्रा करने का शौक रखते हैं और शांति और सुकून की तलाश में हैं, तो छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले का झुमका बांध आपके लिए एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है.

झुमका बांध,

झुमका बांध, जिसे रामानुज प्रताप सागर के नाम से भी जाना जाता है, अपनी सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है. यह बांध इतना विशाल है कि यह बिल्कुल समुद्र जैसा दिखता है. आपकी नजर जहां तक जाएगी, वहां तक आपको सिर्फ पानी ही पानी दिखाई देगा. यह दृश्य निश्चित रूप से आपको मंत्रमुग्ध कर देगा

कुबेर घाट जलप्रपात: हसदेव नदी पर बना हुआ एक और सुंदर जलप्रपात है. यह जलप्रपात कोरिया जिले में गौर घाट जलप्रपात के पास ही स्थित है. यह जलप्रपात घने जंगलों में स्थित है. आप यहां पर भी घूमने के लिए आ सकते हैं. इस जलप्रपात के बारे में ज्यादा लोगों को जानकारी नहीं है. इसलिए यहां पर बहुत कम भीड़ आ पाती है. यहां हर मौसम में आकर शांतिमय वातावरण का आनंद ले सकते हैं. परिवार के साथ आने के लिए यह काफी अच्छी जगह मानी जाती है.

चिरमिरी जब भी छत्तीसगढ़ की सबसे बेहतरीन जगहों की बात होती है, तो उस लिस्ट में चिरमिरी का नाम ज़रूर लिया जाता है। छत्तीसगढ़ के कोरिया जिले में मौजूद एक बेहद ही खूबसूरत हिल स्टेशन है। आपको बता दें कि चिरमिरी/चिरिमिरी को ‘छत्तीसगढ़ का स्वर्ग’ भी कहा जाता है। चारों तरफ मौजूद हरियाली, पहाड़ और नदियां यक़ीनन आपको लिए किसी जन्नत में कम नहीं लगेंगे। समुद्र तल से लगभग पांच सौ से भी अधिक मीटर की ऊंचाई पर मौजूद ये जगह कोयला खदानों के लिए भी प्रसिद्ध है।

कर्मघोंघा जलप्रपात: कोरिया जिले में घने जंगलों के अंदर स्थित है. यह जलप्रपात मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ की सीमा पर स्थित है. यह जलप्रपात बहुत सुंदर है. इस जलप्रपात में बहुत ऊंचाई से पानी नीचे गिरता है. यहां पर आपको मंदिर भी देखने के लिए मिलता है, जिसे कर्मघोंघेश्वर धाम कहते हैं. इस जगह पर हरे भरे पेड़-पौधे, साथ ही छोटे-छोटे खूबसूरत नहर देखने को मिल जायेंगे. कर्मघोंघा झरना प्राकृतिक सुंदरता से घिरा हुआ है. झरना ऊंची चट्टानों से नीचे गिरता है. यहां पर चारों तरफ पेड़-पौधे देखने के लिए मिलते हैं, जो बहुत सुंदर लगते हैं. आप यहां पर बरसात के समय घूमने के लिए आ सकते हैं.

हैंशिव जलप्रपात: हैंशिव धारा एक सुंदर जलप्रपात है. यह जलप्रपात कोरिया में धरमपुर गांव के पास स्थित है. यह जलप्रपात मुख्य सड़क से कुछ दूरी पर जंगल के अंदर स्थित है. महादेव घाट तर्रा एक सुंदर पिकनिक स्थल है. ये जगह कोरिया के केव्राबहरा नाम के गांव के पास स्थित है. यह जगह जंगल में स्थित है. यहां पर आपको हसदेव नदी का सुंदर दृश्य देखने के लिए मिलता है. हसदेव नदी यहां पर चट्टानों के ऊपर से बहती हुई आगे बढ़ती है, जो बहुत अच्छी लगती है. यहां गर्मी के दिनों में भी समय गुजार सकते हैं

गौरघाट जलप्रपात

गौरघाट जलप्रपात हसदेव नदी पर स्थित यह झरना जो कोरिया के जिला मुख्यालय से 33 किलोमीटर दूर है।
यह बनास नदी पर एक बहुत ही सुंदर झरना है जो भरतपुर जनपद पंचायत में स्थित है।
दिसंबर और जनवरी के महीने के दौरान कई नागरिक पिकनिक के लिए यहां आए हैं।
यह जलप्रपात पूरी तरह से प्राकृतिक रूप से विकसित है जो वर्षा के दिनों में अपनी सौंद्रयता बिखेरता है चूँकि यह जलप्रपात पूरी तरहसे प्राकृतिक है इसलिए यहाँ के लोकल नागरिक ही इसके बारे अच्छी तरह से परिचित है

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