Last updated on May 12th, 2026 at 12:18 pm
सभी को एक शान्त वातावरण मनमोहन स्थान पसन्द होता है तो आइए आपको ऐसे ही सुंदर स्थान से रूबरू कराते हैं जहां शोर-शराबा न हो, साथ ही स्थानीय संस्कृति की झलक के साथ पहाड़ों की खूबसूरती का भी लुत्फ उठाया जा सके उत्तराखंड ‘जिसे पहले उत्तरांचल के नाम से जाना जाता था’
उत्तराखंड घुमने के लिए मनपसंद स्थान
उत्तर भारत का एक राज्य, जिसे देवताओं की भूमि यानि देवभूमि के रूप में जाना जाता है। यह एक पहाड़ी राज्य है जो उत्तर में चीन और पूर्व में नेपाल के साथ अंतरराष्ट्रीय सीमा साझा करता है। यह विशाल हिमालयी क्षेत्र प्रकृति की सुंदरता और देवताओं के प्रति समर्पण को प्रदर्शित करता है। इसके दो मुख्य क्षेत्र है गढ़वाल और कुमाऊं ,जिनमें पहाड़ों, घाटियों, नदियों, झीलों, ग्लेशियरों और कई पवित्र मंदिरों का आकर्षण है। दुनिया भर से पर्यटक स्कीइंग,वन्यजीव,अभयारण्यों, रिवर राफ्टिंग, ध्यान और चार धाम यात्रा के लिए उत्तराखंड आते हैं।उत्तराखंड के पौड़ी गढ़वाल में ऐसे कई पर्यटन स्थल हैं, जहां सर्दी- गर्मी किसी भी मौसम में छुट्टियां बिताने आ सकते हैं. अंगेजों का बसाया हुआ पौड़ी शहर आज भी पर्यटन की दृष्टि से वह पहचान नहीं पा पाया, जो अन्य शहरों या हिल स्टेशनों को मिली हैअब यहां कई ऐसे उत्साही लोग हैं, जो इस सफर में एक बार जायेगा उनको वापस आने का मन नहीं होगा मन को मोह लेता है ये शांत वातावरण
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जंगल के बीच सुकून के पल
चेतन बताते हैं अभी तक पौड़ी में ज्यादातर सोलो ट्रैवलर या कपल ही पहुंचते थे. फैमिली हॉलिडे स्पेंड करने वाले पर्यटक यहां कमत ही आते थे. इसका एक बड़ा कारण यहां फैमिली कंफर्ट स्टे या फिर एक्टिविटी का न होना था. इसलिए उनके मन में ख्याल आया कि एक ऐसा रिजॉर्ट तैयार किया जाए, जो जंगलों के बीच हो और यहां सभी एडवेंचर एक्टिविटी हो सकें. ताकि अपने परिवार के साथ क्वालिटी टाइम बिताने यहां आ सकें.
1.हिमालय का अद्भुत दृश्य
चेतन पुरी बताते हैं प्रकृति का दीदार करने वालों को यह जगह काफी पसंद आती है. यहां पर्यटक बड़ी संख्या में हिमालय का विंहगम दृश्य देखने पहुंचते हैं. जंगलों के बीच एकांत में होने और सभी सुविधा उपलब्ध होने के कारण यहां पर्यटक बढ़ रहा है. सुबह और शाम के समय विराट हिमालय राज के अद्भुत दर्शन यहां से होते हैं. चौखंबा, कॉमेट से लेकर बंदरपूंछ और त्रिशूली पर्वत श्रेणियों का इन्फिनिटी व्यू यहां से नजर आता है, जो पर्यटकों को खासा आकर्षित करता है.
कैसे पहुंचे ?
पौड़ी शहर से 20 किलोमीटर दूर सल्डा गांव में शिवा फॉरेस्ट विला है. यहां तक सड़क मार्ग से पहुंचा जा सकता है. जंगल के बीचोंबीच मौजूद यह रिजॉर्ट आपको एक अलग अहसास दिलाएगा. साथ ही यहां से आप श्रीनगर, देवप्रयाग, खिर्सू और पौड़ी को भी एक्सप्लोर कर सकते हैं. ट्रेकिंग कर यहां के नजदीक कई बेहतरीन स्थलों पर भी पहुंचा जा सकता है.
उत्तराखंड में क्या- क्या खायें
अगर आप उत्तराखंड घूमने जा रहे हैं, तो आप यहां पर आप यहां की फेमस तथा ट्रेडिशनल खाने को ही खायें, क्योंकि ये खाने आपको उत्तराखंड के अलावा और कहीं नहीं मिलेंगे । जैसे आप यहां पर कुमाउनी रायता, मंडवे की रोटी, भांग की चटनी, डुबुक, झंगोरा की खीर, आलू गुटुक, आलू का झोल जो पूरी के साथ खायी जाती है और यह यहां के स्ट्रीट फूड में भी आती है। इसके साथ ही आप कंडाली का साग, अरसा, गुलगुला, सिंगोरी, ठठवानी रास यह एक प्रकार का सूप होता है, फानू, बाड़ी, गढवाल का फनाह, काफूली, भट के डुबके यह एक प्रकार की दाल होती है जो चावल के साथ खाई जाती है।
उत्तराखंड में क्या शॉपिंग करें
उत्तराखंड में शॉपिंग के लिये बहुत सी वस्तुयें हैं जिन्हें आप आसानी से रिजनेबल रेट में खरीद सकते हैं। यहां पर आप हाथ से बने स्वेटर, हिमालायं बैग्स, स्कार्फ, श्रग, आर्टिफिशियल ज्वैलरी, तिब्बत एथनिक वियर, उत्तराखंड की मशहूर दाल भट, मलमल के कपड़े, जैम, अचार, यहां के अंगूर के ताजे बने हुए शराब, ताजा शहद, तांबे के बर्तन, बांस से बनी वस्तुयें, बैग, पर्स, फर्नीचर, सुंदर बांस से बनी टोकरीयां, वाॅल हैंगिंग, शोपीस, अंगोरा और पश्मीना शॉल, लकड़ी की ज्वैलरी बॉक्स, लकड़ी की जानवरों की मूर्तियाँ, गर्म कपड़े, आदि बहुत सी वस्तुओं की खरीददारी कर सकते हैं।
2.बद्रीनाथ
बद्रीनाथ उत्तराखंड का एक लोकप्रिय तीर्थ स्थल है। बद्रीनाथ समुद्रतल से लगभग 3,100 मीटर की उचाईं पर अलकनंदा नदी के तट पर स्थित है। यह तीर्थ हिंदुओं के चार प्रमुख धामों में से एक है। यह पवित्र स्थल भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार नर एवं नारायण की तपोभूमि है। इस धाम के बारे में कहावत है कि-“जो जाए बद्री,वो न आए ओदरी”यानि जो व्यक्ति बद्रीनाथ के दर्शन कर लेता है उसे माता के गर्भ में दोबारा नहीं आना पड़ता। माना जाता है यह मन्दिर ‘ दिव्य देशम’ के नाम से जाने, जाने वाले तमिल संतों के द्वारा भगवान विष्णु को समर्पित 108 मंदिरों में से एक है। यह मन्दिर हर साल अप्रैल- मई में खुलता है और सर्दियों में नवंबर के तीसरे सप्ताह में बंद हो जाता है क्योंकि यहां पर बहुत ही अधिक बर्फबारी होती है।
कैसे पहुंचे बद्रीनाथ
हवाई मार्ग से: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है। देहरादून के लिए दिल्ली से उड़ान भरें और सड़क या हेलीकॉप्टर से बद्रीनाथ की यात्रा करें। सहस्त्रधारा हेलीपैड से आप हेलीकॉप्टर से बद्रीनाथ धाम भी जा सकते हैं।
रेल द्वारा:ऋषिकेश निकटतम रेलवे स्टेशन है। ऋषिकेश रेलवे स्टेशन NH58 पर स्थित है और भारत में प्रमुख स्थलों के साथ भारतीय रेलवे नेटवर्क द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग से: बद्रीनाथ उत्तराखंड के प्रमुख शहरों से मोटर योग्य सड़क द्वारा जुड़ा हुआ है। बद्रीनाथ पहुंचने के लिए देहरादून, ऋषिकेश और हरिद्वार से नियमित बसें चलती हैं।
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हरिद्वार
हरिद्वार उत्तराखंड के घूमने एवं दर्शन करने के स्थानों में से एक है। तथा यह चारों धामों में भी आता है। तथा हरिद्वार को ” ईश्वर का प्रवेश द्वार भी कहा जाता है” भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक माना जाने वाला हरिद्वार अपने शहर में तमाम मंदिरों और धार्मिक स्थलों को समेटे हुए है। आप अगर हरिद्वार आएं हैं, तो यहां की गंगा आरती में जरूर शामिल हो। यहां होने वाली आरती की सुंदरता का बखान कर पाना बहुत मुश्किल है। यहां की जलती बातियों और बजती घंटियों के बीच यहां के पंडित एक सुर में गंगा की आरती करते हैं। इस आरती में हजारों सैलानी शामिल होते हैं। यहां हर शाम 7 बजे आरती होती है, लेकिन लोगों की भीड़ 5 बजे से ही जुटना शुरू हो जाती है। शाम 6 बजे से ही लोग यहां हर-हर गंगे और जय गंगा मैया बोलने लगते हैं। इसके साथ ही आप यहां पर स्थित घाट हर की पैड़ी भी जरूर जाएं। माना जाता है राजा विक्रमादित्य ने बनवाया था।हरि की पैड़ी के पास बैठकर तथा गंगा में स्नान के बाद मन को बहुत ही शांति मिलती है। आप यहां पर मनसा देवी मन्दिर भी घूम सकते हैं। तथा चंडी देवी मन्दिर, भारत माता मन्दिर इन सभी जगहों पर आप दर्शन कर सकते हैं।
कैसे पहुंचे हरिद्वार
हवाई मार्ग से: जॉली ग्रांट हवाई अड्डा निकटतम हवाई अड्डा है।
रेल द्वारा: हरिद्वार जंक्शन दिल्ली, मुंबई, कोलकाता, देहरादून, अहमदाबाद और पटना जैसे प्रमुख शहरों से रेल द्वारा अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है।
सड़क मार्ग से: हरिद्वार अन्य प्रमुख उत्तर भारतीय गंतव्यों जैसे दिल्ली, यूपी, हरियाणा और पंजाब के साथ-साथ उत्तराखंड के अन्य हिस्सों से अच्छी तरह से जुड़ा हुआ है। बस सेवाएं लगातार और किफायती दामों में होती हैं। कोई भी हरिद्वार के लिए ड्राइव कर सकता है या टैक्सी किराए पर ले सकता है। ए/सी, और नॉन-ए/सी और डीलक्स बसें हरिद्वार को प्रमुख भारतीय शहरों और पर्यटन स्थलों से जोड़ती हैं।
मसूरी
मसूरी उत्तराखंड राज्य का एक पर्वतीय नगर है, जिसे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। देहरादून से 35 किलोमीटर की दूरी पर स्थित, मसूरी उन स्थानों में से एक है जहाॅं लोग बार-बार आते जाते हैं। घूमने-फिरने के लिए जाने वाली प्रमुख जगहों में मसूरी एक प्रमुख जगह है। यह पर्वतीय पर्यटन स्थल हिमालय पर्वतमाला के मध्य हिमालय श्रेणी में पड़ता है, जिसे पर्वतों की रानी भी कहा जाता है। यह उत्तराखंड का एक मुख्य पर्यटन स्थल है जो बड़ी संख्या में पर्यटकों को आकर्षित करता है। मसूरी का नाम मंसूर शब्द से पड़ा है, जो एक झाड़ी को संदर्भित करता है जो यहां बड़ी मात्रा में पाया जाता है। गढ़वाल हिमालय पर्वतमाला के बीच स्थित, मसूरी में पूरे साल सुखद मौसम रहता है। पहाड़ियों, झीलों और मंदिरों का घर, उत्तराखंड में मसूरी भारत में सबसे अच्छे हनीमून स्थानों में से एक है। इसमें बर्फ से ढके पहाड़ों और हरी-भरी घाटियों के मंत्रमुग्ध कर देने वाले दृश्य हैं। मसूरी में दर्शनीय स्थलों की सैर और ट्रेकिंग से लेकर धुंधली झीलों और राजसी झरनों तक जाने के लिए बहुत सी जगहें हैं। इसके साथ ही मसूरी के घूमने लायक जगहों में से कुछ हैं, दलाई हिल्स,केम्प्टी फॉल्स, कैमल्स बैक रोड, भट्टा वॉटरफॉल,लाल टिब्बा और कंपनी गार्डन आदि। गन हिल मसूरी की सबसे ऊंची चोटियों में से एक है और यहां पर मॉल रोड से केबल कार द्वारा पहुँचा जा सकता है। 2,024 मीटर से अधिक की ऊंचाई पर स्थित, यह हिमालय की बर्फ से ढकी चोटियों से घिरा हुआ है।
कैसे पहुंचे मसूरी
हवाई मार्ग से: देहरादून का जॉली ग्रांट हवाई अड्डा मसूरी का निकटतम हवाई अड्डा है।
रेल द्वारा: देहरादून रेलवे स्टेशन इस हिल स्टेशन की सेवा करता है।
सड़क मार्ग से: राज्य सरकार और निजी बसें मसूरी को यूपी और दिल्ली जैसे प्रमुख राज्यों से जोड़ती हैं।
मुख्य घूमने के स्थान
- देहरादून और मसूरी
- नैनीताल और रानीखेत
- ऋषिकेश और हरिद्वार
- जिम कॉर्बेट
- अल्मोडा
- औली
- चकराता
- चोपता
- लैंसडाउन
- फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब
- चारधाम (यमनोत्री, गंगोत्री, बद्रीनाथ और केदारनाथ)
- धनोल्टी
- कनाटल
- मुक्तेश्वर
- बिनसर
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