Last updated on October 22nd, 2025 at 08:01 am
सावन अपने साथ हरियाली लेकर आता है और मन को प्रफुल्लित कर देता हैं। ऐसे में इस बार्सत के मौसम में सभी की चाहत होती हैं कि दोस्तों के साथ बाहर घूमने जाया जाए और मौसम का मजा लिया जाए। इस मौसम के प्राक्रतिक नजार मन को मोह लेने वैल होते हैं। इसलिए सावन के इन दिनों में अपने दोस्तों के साथ घूमने का प्लान जरूर बना लेना चाहिए। अगर आपको कोई जगह समझ नहीं आ रही हैं तो आज हम आपको कुछ ऐसी जगहों की जानकारी देने जा रहे हैं जो बरसात के इस मौसम का पूरा मजा देगी। तो आइये जानते हैं इन जगहों के बारे में।
सावन में एक बार इस जगह में जरुर जाए
1.बाबा बैद्यनाथ मंदिर, झारखंड
बाबा बैद्यनाथ धाम भारत के सबसे पवित्र स्थानों में से एक है। श्रावण महीने के दौरान बैद्यनाथ मंदिर में एक मेला आयोजित किया जाता है जिसे श्रावण मेला कहा जाता है। इस मेले के दौरान हजारों भक्त पवित्र मंदिर में आते हैं। साथ ही कई श्रद्धालु नंगे पैर चलते हैं और देवता को गंगा जल अर्पित करते हैं।
2. त्र्यंबकेश्वर मंदिर, महाराष्ट्र
इस पवित्र त्र्यंबकेश्वर मंदिर के तीन चेहरों में भगवान ब्रह्मा, भगवान विष्णु और भगवान रुद्र हैं। बता दें श्रावण महीने के दौरान, यहां बेहद प्रसिद्ध त्योहार मनाया जाता है, जिसमें शामिल होने के लिए लाखों श्रद्धालु जुटते हैं। वहीं नाग पंचमी और नारली पूनम के दिन देवताओं को विशेष आभूषणों से सजाया जाता है।
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3. सोमनाथ मंदिर
श्रावण महीने में मंदिर सुबह 4 बजे खुलता है और रात 10 बजे मंदिर के कपाट बंद होते हैं। साथ ही श्रावण महीने में यहां महान सोमनाथ महोत्सव होता है, जिसे देखने के लिए पूरे भारत से भक्त आते हैं।
4. केदरनाथ मंदिर
केदारनाथ पवित्र हिंदू मंदिर हिमालय में मंदाकिनी नदी के पास स्थित है। भारत में इस मंदिर के 4 प्रमुख स्थल हैं; यमुनोत्री, गंगोत्री, छोटा चार धाम और बद्रीनाथ। बता दें यह मंदिर अप्रैल के अंत से कार्तिक पूर्णिमा तक खुला रहता है। साथ ही ये भी बता दें की केदारनाथ मंदिर सड़कों के रास्ते सीधा नहीं पहुंचा जा सकता है। यहां पहुंचने के लिए गौरीकुंड से 14 किमी की चढ़ाई करनी पडती है। वहीं अगर आपको ज्यादा उंचाई वाली जगह पसंद है, तो आप दुनिया के सबसे ऊंचे शिव मंदिर तुंगनाथ के दर्शन जरूर करें। तुंगनाथ 3,810 मीटर की दूरी पर स्थित है। यहां “बम बम भोले” का जाप करते हुए चढ़ाई करते जाएं।
5.बैद्यनाथ धाम
बाबा बैद्यनाथ धाम झारखंड के देवघर जिले में मौजूद प्रसिद्ध ज्योतिर्लिंग है. इस प्राचीन शिव मंदिर में भगवान शिव को समर्पित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग स्थापित है. इस मंदिर में सालों भर भक्तों का आना जाना लगा रहता है. श्रावण मास में बाबा के दर्शन करने यहां लाखों की भीड़ उमड़ती है.यहां सावन महीने में विशेष श्रावणी मेले का आयोजन किया जाता है, जिसे देखने देश-विदेश से पर्यटक और श्रद्धालु देवघर आते हैं. पूरे सावन माह में भगवान भोलेनाथ का विशेष श्रृंगार किया जाता है. इस दौरान उनका मुकुट और श्रृंगार जेल से बनकर आता है. बाबा भोलेनाथ यहां आने वाले भक्तों की मुराद जरूर पूरी करते हैं. इस कारण इस ज्योतिर्लिंग को मनोकामना लिंग के नाम से भी जाना जाता है.
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6.बासुकीनाथ धाम
बासुकीनाथ मंदिर देवघर-दुमका राज्य राजमार्ग पर स्थित भगवान शिव को समर्पित पवित्र शिवालय है. इस मंदिर में पूरे साल हजारों-लाखों श्रद्धालु पूजा अर्चना करने आते हैं. बासुकीनाथ धाम में श्रावण मास के दौरान भक्तों की खास भीड़ जमा होती है. कांवड़ यात्रा पर निकले श्रद्धालु बैद्यनाथ धाम में जलार्पण कर बासुकीनाथ धाम पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते हैं. पौराणिक मान्यता है, बाबा बैद्यनाथ धाम में पूजा करने के बाद बासुकीनाथ में बाबा के दर्शन करना अनिवार्य होता है, नहीं तो भक्तों की पूजा अधूरी मानी जाती है. बासुकीनाथ धाम झारखंड के प्रमुख धार्मिक केंद्र के रूप में स्थापित है.
7.पहाड़ी मंदिर
झारखंड की राजधानी रांची में स्थित है प्रसिद्ध पहाड़ी मंदिर. भगवान शिव को समर्पित इस पावन धाम में नाग देवता की भी विशेष पूजा-अर्चना की जाती है. झारखंड आने वाले पर्यटक पहाड़ी मंदिर के दर्शन जरूर करते हैं. सावन के दौरान मंदिर को फूलों से सजाया जाता है और बाबा की विशेष पूजा अर्चना भी होती है.
इस दौरान लाखों की संख्या में भक्त बाबा के दर्शन करने पहाड़ी मंदिर पहुंचते हैं. श्रावण मास के दौरान करीब 350 फीट ऊंची पहाड़ी पर 468 सीढ़ियां चढ़कर भक्त बाबा के दर्शन करने पहुंचते हैं. भक्ति का यह नजारा काफी मनमोहक होता है. पूरे सावन माह में रोजाना ताजा फूलों से बाबा का भव्य श्रृंगार होता है. इस दौरान सुबह तीन-चार बजे से ही भगवान भोलेनाथ के दर्शन करने के लिए लाइन लगनी शुरू हो जाती है. पहाड़ी मंदिर झारखंड में मौजूद खूबसूरत धार्मिक और दार्शनिक स्थल है.
सावन में क्या करे दार्शनिक स्थल है.
- रोज प्रातः स्नान कर शिव पूजा करें। बेलपत्र, गंगाजल, दूध, दही, शहद, घी, शक्कर से शिवलिंग पर रुद्राभिषेक करें। ॐ नमः शिवाय मंत्र का 108 बार जाप करें।
- सावन के सभी सोमवार को उपवास रखें, यह भगवान शिव को विशेष रूप से प्रिय है। सोलह सोमवार व्रत भी शुभ फल देता है।
- सावन में हरी वस्तुओं का प्रयोग करें। महिलाएं हरी चूड़ियां, हरी साड़ी, हरा बिंदी आदि पहनें। हरी सब्जियां, तुलसी और बेलपत्र का सेवन करें।
- सावन में सात्त्विक आहार लें। सावन में फलाहार करें। हल्दी, जीरा, सेंधा नमक जैसे शुद्ध मसालों का प्रयोग करें।
- पंचाक्षरी मंत्र और महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें। ॐ नमः शिवाय और महामृत्युंजय मंत्र का जप शिव कृपा को आकर्षित करता है।
- ब्राह्मण और जरूरतमंदों को दान दें। अन्न, वस्त्र, जल, छाता, गौ-सेवा, तुलसी, धार्मिक पुस्तकें दान करें।
धार्मिक मान्यता
सावन में महिलाएं विशेष व्रत रखती हैं और शिव-पार्वती की पूजा करती हैं। मान्यता है कि अगर पहली सावन में दुल्हन मायके में रहकर पूरे श्रद्धा और भक्ति से व्रत करे तो उसका वैवाहिक जीवन सुखमय और स्थायी होता है।
शिव पूजा से जुड़ी खास बातें
सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित होता है. इस महीने में शिव की पूजा करने से मनोकामनाएं जल्दी पूरी होती हैं. भक्तों को सावन के हर सोमवार को विशेष पूजा करनी चाहिए.
सावन में शिवलिंग पर जल चढ़ाना सबसे पवित्र माना जाता है. इससे शिवजी को प्रसन्नता मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि आती है. जल के साथ बेलपत्र चढ़ाना भी शुभ होता है.
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