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कब है तुलसी विवाह? जानें-तिथि,पूजा विधि और धार्मिक महत्व 2025

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By Travel Life Angel Updated: May 13, 2026
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सनातन धर्म का एक पवित्र पर्व है, जो कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि को मनाया जाता है। इस दिन भगवान विष्णु अपनी चार महीने की योग निद्रा से जागते हैं और सभी शुभ कार्यों की शुरुआत होती है। इस विवाह का बड़ा धार्मिक महत्व है, जिससे कन्यादान के समान पुण्य फल मिलता है, तो आइए इस पर्व की डेट से लेकर सभी जरूरी बातों को जानते हैं।

Tulsi Vivah 2025: हिंदू पंचांग के अनुसार, कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को तुलसी विवाह कराया जाता है. इस तिथि को देवोत्थान एकादशी, देवउठनी एकादशी या प्रबोधिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है. इस साल 02 नवंबर को तुलसी विवाह किया जाएगा. धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु चार महीने की योगनिद्रा से जागते हैं. इन चार महीनों को चातुर्मास कहा जाता है, जिनमें भगवान विष्णु विश्राम अवस्था में रहते हैं. जब वे इस दिन पुनः जागृत होते हैं, तो समस्त सृष्टि में शुभ कार्यों का प्रारंभ होता है. इसी दिन तुलसी विवाह का आयोजन किया जाता है, जो धार्मिक रूप से अत्यंत शुभ माना गया है. तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का विशेष प्रकार से श्रृंगार किया जाता है. जानते हैं कि तुलसी विवाह के दिन माता तुलसी का श्रृंगार कैसे करें ताकि उनका आशीर्वाद प्राप्त हो सके. 

तुलसी विवाह 2025 कब?

द्रिक पंचांग के अनुसार, 2025 में कार्तिक शुक्ल द्वादशी की शुरुआत 2 नवंबर को सुबह 07 बजकर 31 मिनट से होगी और इसका समापन 3 नवंबर को सुबह 05 बजकर 07 मिनट पर होगा. ऐसे में इस साल तुलसी विवाह 2 नवंबर, रविवार को किया जाएगा. इस दिन घर-घर में विशेष पूजन, व्रत और विवाह की रस्में की जाती हैं.

तुलसी विवाह

तुलसी विवाह

तुलसी विवाह की तैयारी और पूजन विधि

सबसे पहले घर या आंगन में जहां तुलसी का पौधा स्थापित है, उस स्थान की सफाई करें, उसके बाद गंगाजल या पवित्र जल का छिड़काव करें. तुलसी माता को नए वस्त्र पहनाएं, पास में एक सुंदर आसन पर शालिग्राम भगवान को स्थापित करें, उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं, चंदन, फूल और तुलसी दल अर्पित करें. इस दौरान मंगल गीत, विवाह मंत्र, और आरती गाई जाती है. पूजा के बाद प्रसाद स्वरूप पंचामृत, मिठाई या खीर का भोग लगाया जाता है. इस दिन देवउठनी एकादशी का व्रत रखा जाता है. संध्या समय तुलसी जी की आरती की जाती है.

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तुलसी विवाह की पूजा विधि (Tulsi Vivah 2025 Puja Rituals)

  • घर के आंगन, बालकनी या पूजा स्थल पर तुलसी के पौधे को स्थापित करें और उस पर रंगोली बनाकर सुंदर मंडप सजाएं।
  • तुलसी जी को चूड़ी, चुनरी, साड़ी और सभी शृंगार सामग्री अर्पित करें।
    शालिग्राम जी को तुलसी के पौधे के दाहिनी ओर स्थापित करें।
  • तुलसी माता और शालिग्राम भगवान को गंगाजल से स्नान कराएं।
  • शालिग्राम जी को चंदन और तुलसी जी को रोली का तिलक लगाएं।
  • उन्हें फूल, भोग के रूप में मिठाई, गन्ने, पंचामृत सिंघाड़े आदि चढ़ाएं।
  • धूप और दीप जलाएं।
    शालिग्राम जी पर चावल नहीं चढ़ाया जाता, इसलिए उनके ऊपर तिल या सफेद चंदन चढ़ाएं।
तुलसी विवाह की पूजा विधि

तुलसी विवाह की पूजा विधि

तुलसी विवाह का महत्व

तुलसी विवाह में माता तुलसी (जिसे वृंदा देवी भी कहा जाता है) और श्री शालिग्राम भगवान (जो भगवान विष्णु का स्वरूप हैं) का विवाह होता है. मान्यता है कि इस विवाह से घर में सुख, समृद्धि, और सौभाग्य का वास होता है. जो लोग अपने घर में यह विवाह कराते हैं, उन्हें भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी का विशेष आशीर्वाद प्राप्त होता है. मान्याता है कि इस दिन व्रत रखने से अविवाहित कन्याओं को अच्छा वर मिलता है. वहीं विवाहित दंपतियों के जीवन में इस व्रत को रखने से खुशहाली आती है.

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तुलसी माता का श्रृंगार

मां तुलसी का श्रृंगार करना तुलसी विवाह का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. इस दिन विशेष रूप से माता तुलसी को दुल्हन की तरह सजाया जाता है. सबसे पहले तुलसी के गमले या स्थान को अच्छी तरह साफ करें. पवित्र जल से शुद्ध करें. इसके बाद तुलसी माता को लाल या पीले रंग की साड़ी पहनाएं, क्योंकि ये रंग शुभता और मंगल के प्रतीक माने जाते हैं.

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तुलसी विवाह से जुड़ें रीति-रिवाज एवं परम्पराएं

मां तुलसी को चुनरी, चूड़ी, नथनी, मांग टीका, हार, कंगन, बिंदी, फूल, कमरबंद और अन्य हल्के आभूषणों से सजाएं. उनके चारों ओर सुंदर रंगोली बना कर दीपक जलाएं. 

  • तुलसी विवाह के दिन उपवास रखा जाता है जिसे संध्याकाल में विवाह समारोह के आरम्भ होने के पश्चात ही तोड़ा जाता है।
  • हिंदू विवाह की भांति ही फूलों और रंगोली से एक सुंदर ‘मंडप’ का निर्माण किया जाता है।
  • अब तुलसी के पौधे और भगवान विष्णु की प्रतिमा को स्नान कराने के बाद उन्हें फूलों या मालाओं से सजाया जाता है।
  • तुलसी विवाह के दौरान, तुलसी का दुल्हन की तरह उज्ज्वल लाल साड़ी, गहने और बिंदी से शृंगार किया जाता है।
  • भगवान विष्णु की मूर्ति या शालिग्राम (भगवान विष्णु का प्रतीक) को पारंपरिक धोती से सजाया जाता है।
  • इसके बाद जोड़ी को विवाह समारोह के लिए धागे से बांधा जाता है।
  • इस विवाह समारोह को पुजारी और सभी आयु की महिलाओं द्वारा भी सम्पन्न किया जा सकता है।
  • तुलसी विवाह समारोह का अंत समस्त भक्तों द्वारा नवविवाहित युगल पर चावल और सिंदूर की वर्षा के साथ हो जाता है।
  • इस विवाह समारोह के बाद, सभी भक्तों को ‘प्रसाद’ या ‘भोग’ वितरित किया जाता है।
Ask question

1. 2025 में देवउठनी एकादशी तुलसी विवाह कब है?

इसका समापन अगले दिन यानी 3 नंबवर को होगा. इस दिन का मुहूर्त सुबह 5:07 बजे तक होगा.

2.तुलसी माता का विवाह कितनी तारीख को है?तुलसी विवाह 2025 तिथि

पंचांग के अनुसार, तुलसी विवाह इस बार 2 नवंबर को कराया जाएगा. इस बार कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वादशी तिथि 2 नवंबर को सुबह 7 बजकर 31 मिनट पर शुरू होगी और तिथि का समापन 3 नवंबर को सुबह
3.एकादशी के दिन तुलसी की पूजा कैसे करें?

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एकादशी पर तुलसी की पूजा करते समय, उन्हें जल नहीं देना चाहिए, पत्तियां नहीं तोड़नी चाहिए और न ही छूना चाहिए, क्योंकि मान्यता है कि इस दिन तुलसी माता भी निर्जला व्रत करती हैं। इसके बजाय, आप शाम को तुलसी के पास दीपक जला सकते हैं, आरती और मंत्रों का जाप कर सकते हैं, चुनरी और श्रृंगार का सामान अर्पित कर सकते हैं और 11 या 21 परिक्रमा कर सकते हैं। 

4.तुलसी विवाह घर में कैसे करें?

घर पर तुलसी जी का विवाह करने के लिए, सुबह पूजा के लिए संकल्प लें और शाम को तुलसी जी के गमले के पास रंगोली बनाएं। गन्ने या केले के पत्तों से मंडप सजाएं, फिर एक चौकी पर तुलसी जी और शालिग्राम भगवान को स्थापित करें। शालिग्राम को पीले वस्त्र और तुलसी जी को लाल चुनरी व श्रृंगार का सामान अर्पित करें। फिर, हाथ में शालिग्राम जी को लेकर तुलसी जी की सात परिक्रमा करें। अंत में, आरती करें और भोग लगाएं

Anju Ratre

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